अयोध्या: नेताजी गम में दे रहे साथ, खुशियों में भी पहुंचकर बिछा रहे चुनावी बिसात
अयोध्या। कोरोना के केस में लगातार इजाफा होता जा रहा है। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार देखकर ऐसा आभास हो रहा है कि इस बार नेताओं को जनता से संपर्क साधने के लिए वर्चुअल तरीका ही अपनाना पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक पंडित सभी के लिए इस तरीके को सटीक नहीं मानते हैं। इसी के मद्देनजर दलों के …
अयोध्या। कोरोना के केस में लगातार इजाफा होता जा रहा है। संक्रमण की बढ़ती रफ्तार देखकर ऐसा आभास हो रहा है कि इस बार नेताओं को जनता से संपर्क साधने के लिए वर्चुअल तरीका ही अपनाना पड़ेगा, लेकिन राजनीतिक पंडित सभी के लिए इस तरीके को सटीक नहीं मानते हैं।
इसी के मद्देनजर दलों के दावेदारों ने लोगों से जुड़ने का एक नया तरीका इजाद किया है। वे हर जगह लोगों के गम और खुशी में शरीक हो रहे हैं। यही नहीं किसी खास समुदाय के बीच जाकर उनके त्योहारों को भी मना रहे हैं। साथ ही खुशी के मौके पर शिरकत कर उपहार भी दे रहे हैं।
उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में चुनावी शंखनाद होते ही निर्वाचन आयोग ने कोरोना की बढ़ती रफ्तार को देखते हुए 15 जनवरी तक के लिए रैलियों, जन सभाओं व नुक्कड़ नाटकों पर प्रतिबंध लगा दिया था।
इसके बाद से राजनीतिक दलों व उनके नेताओं में खलबली मच गई थी की लोगों के बीच कैसे जाया जाएगा। इसे देखते हुए उन्होंने लोगों के गम और खुशियों में शामिल होने का प्लान बनाया है। जहां नहीं पहुंच पा रहे वहां अपने प्रतिनिधि या फिर इलाके के नेताओं को भेज रहे हैं।
निधन पर जता रहे संवेदनाएं, घर भी जा रहे
आए जब चुनाव तो पकड़ लेते हैं जनता का पैर, वरना इन झूठे नेताओं को है कहाँ किसी की खैर। किसी शायर की यह पंक्तियां आज के समय के नेताओं पर बिल्कुल सटीक बैठती है। कल तक लोगों को दिखाई न पड़ने वाले नेता आज घर-घर पहुंच रहे हैं।
क्षेत्र में किसी का निधन होने पर श्मशान घाट ही नहीं बल्कि उनके घर पहुंचकर संवेदनाएं जता रहे हैं। जहां नहीं पहुंच पा रहे वहां अपने सगे संबंधियों को भेज कोरम पूरा कर रहे हैं।
खरमास खत्म होते ही शुरू हो रही हैं शादियां
एक माह का खरमास खत्म होने के बाद अब शुभ घड़ी शुरू होने जा रही है। ऐसे में शादियों का भी खूब मुहूर्त है। उसके लिए भी दावेदारों ने प्लान बनाया है। चुनावी सीजन को देखते हुए उनका हर जगह पहुंचने का प्लान है।
वे वर-वधु को आशीर्वाद देने का ही प्लान नहीं बना रहे बल्कि शगुन और गिफ्ट भी देने की बातें सामने आई हैं। हालांकि वोटर सब जानता चुनाव से पहले वादों का पुल तैयार करने वाले नेता बाद में पलटी खा जाते हैं।
त्योहारों की बधाई के विज्ञापन से पटा पड़ा है सोशल मीडिया
इन दिनों फेसबुक व व्हाट्सएप्प सहित तमाम सोशल मीडिया के प्लेटफॉर्म पर त्योहारों को लेकर नेताओं की बधाई देने वाली पोस्ट की बाढ़ सी आई हुई है। इसे अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए मैसेज को शेयर भी किया जा रहा है।मैसेज के जरिये लोहड़ी, मकर संक्रांति के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं भी दी जा रही है। यही नहीं कुछ ने तो लोहड़ी के पर्व को उनके साथ भी मिलकर मनाया। मूंगफली और रेवड़ियां भी बांटी।
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