बरेली: अतिक्रमण पर चला रेलवे का डंडा, जमीन कब्जा मुक्त कराई

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बरेली, अमृत विचार। पूर्वोत्तर रेलवे ने 99 साल की लीज पर दिए जाने के बाद शाहमतगंज मालगोदाम व उसके आसपास जमीन को कब्जा मुक्त कराना शुरू कर दिया गया है। शनिवार को रेलवे की टीम अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची। कब्जा हटाने के दौरान रेलवे अधिकारियों की कब्जाधारियों से नोकझोंक हुई। कई टिंबर कारोबारी अधिकारियों …

बरेली, अमृत विचार। पूर्वोत्तर रेलवे ने 99 साल की लीज पर दिए जाने के बाद शाहमतगंज मालगोदाम व उसके आसपास जमीन को कब्जा मुक्त कराना शुरू कर दिया गया है। शनिवार को रेलवे की टीम अतिक्रमण हटाने के लिए पहुंची। कब्जा हटाने के दौरान रेलवे अधिकारियों की कब्जाधारियों से नोकझोंक हुई। कई टिंबर कारोबारी अधिकारियों से समय मांगते रह गए, लेकिन टीम ने सालों पुराने कब्जे को जेसीबी से ढहा दिया।

शनिवार सुबह जब एक दर्जन से अधिक जेसीबी मशीन शाहमतगंज रेलवे मालगोदाम की जमीन को कब्जामुक्त कराने पहुंचीं तो लोगों की भीड़ जमा हो गई। अधिकारियों के मुताबिक कब्जे को पहले भी कई बार हटाने का प्रयास किया गया था, लेकिन कोर्ट से स्टे आर्डर के कारण जमीन से कब्जा नहीं हट पा रहा था। लिहाजा, अब कोर्ट से स्टे आर्डर हटने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार करीब 16 लोगों द्वारा किया गया अतिक्रमण हटाया गया है। यहां अधिकतर टिंबर कारोबारियों ने अपने दफ्तर बना रखे थे। इसके अलावा रेलवे मालगोदाम के पुराने भवन को भी जेसीबी से ढा दिया गया। पूर्वोत्तर रेलवे को इस जमीन से किसी प्रकार का मुनाफा नहीं हो रहा था। इस वजह से सात साल पहले 36 एकड़ में फैली इस जमीन को रेल भूमि विकास प्राधिकरण को हस्तानांतरित कर दिया गया था। आरएलडीए ने यह जमीन चार लोगों के कंसोर्टियम में लीज पर दी है। अतिक्रमण हटाने के साथ जेसीबी से मिट्टी को खोदकर जमीन समतल किए जाने का कार्य भी किया जा रहा है।

खुद ही हटाना शुरू कर दिया अतिक्रमण
खाली जमीन पर सालों से लोगों ने अतिक्रमण कर रखा था। यहां पशु बांधे जाते थे। व्यवसायिक गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। आरपीएफ ने कई बार अतिक्रमण हटवाया, लेकिन फिर कब्जा हो गया। शनिवार को जेसीबी चलनी शुरू हुई तो बड़ी संख्या में लोगों ने खुद ही सामान हटाना शुरू कर दिया। पशुओं को खोलकर ले जाने लगे।

भूमि पर विकसित की जाएगी आवासीय कालोनी
अधिकारियों के मुताबिक रेलवे ट्रैक मिलाकर करीब 36 एकड़ भूमि है। जिस कंपनी को जमीन लीज पर दी गई है, उसके द्वारा यहां कमर्शियल डेवलपमेंट किया जाना है, जिसमें आवासीय योजना को प्राथमिकता पर रखा गया है। मुख्य शहर के बीचों-बीच मीटरगेज रेलवे ट्रैक करीब चार किलोमीटर लंबा है। तीस साल से यह रेल लाइन बेकार पड़ी है। हालांकि, कुछ साल पहले तक मालगाड़ी के जरिए यहां टिंबर कारोबारियों के लिए लकड़ियां ढोकर लाई जाती थीं, लेकिन बाद में मालगाड़ी को भी बंद कर दिया गया। इस जमीन पर आवासीय योजना विकसित होती है तो विकास कार्यों को बल मिलेगा। रेलवे को भी मुनाफा होगा।

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