रामपुर : बेटे से मुकाबले में राजमाता को मिली थी हार
अखिलेश शर्मा/रामपुर, अमृत विचार। यह बात करीब 50 साल पुरानी है, जब रामपुर की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया, जिसमें रियासत के नवाब रजा अली खां की पत्नी रफत जमानी बेगम (राजमाता) और उनके बड़े बेटे नवाब मुर्तजा अली खां विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट से आमने-सामने आ गए। मां-बेटे के बीच चुनावी लड़ाई …
अखिलेश शर्मा/रामपुर, अमृत विचार। यह बात करीब 50 साल पुरानी है, जब रामपुर की राजनीति में एक ऐसा भूचाल आया, जिसमें रियासत के नवाब रजा अली खां की पत्नी रफत जमानी बेगम (राजमाता) और उनके बड़े बेटे नवाब मुर्तजा अली खां विधानसभा चुनाव में रामपुर सीट से आमने-सामने आ गए।
मां-बेटे के बीच चुनावी लड़ाई पूरे देश में सुर्खियों में रही। कोशिशें भी बहुत हुईं कि किसी तरह कोई एक मुकाबले से पीछे हट जाए। लेकिन, ऐसा हो नहीं सका। इस रोचक मुकाबले में राजमाता को हार का मुंह देखना पड़ा और बेटे के सिर जीत का सेहरा बंधा। दरअसल यह बात 1969 से 1973 के बीच की है। उत्तर प्रदेश में जब विधानसभा चुनाव होने शुरू हुए तो रामपुर शहर विधानसभा सीट पर पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू के खानदान का खासा असर था।
पंडित नेहरू के रिश्ते यहां के नवाब खानदान से बहुत गहरे थे। इस सीट से पहले कांग्रेस के फजलुल हक खान, दूसरी बार स्वतंत्र विधानमंडलीय दल के असलम खान, तीसरे चुनाव में किश्वर आरा बेगम, चौथे चुनाव में स्वतंत्र पार्टी के अख्तर अली खान, नवाब सैयद मुर्तजा अली खान विधानसभा पहुंचे थे। वह जब चुनाव में उतरे तो बेटे को हराने के लिए राजमाता रफत जमानी भी चुनाव में कूद गईं। जनता ने रफत जमानी बेगम को हरा दिया और बेटे पर भरोसा जताया था।
नवाब रजा की तीन रानियों में सबसे बड़ी थीं रफत जमानी बेगम
आजादी से पहले रामपुर में नवाबों का राज था। उनकी अपनी सरकार थी। पुलिस, फौज, अदालतें सब कुछ उनका अपना था। तब नवाबों के बड़े जलवे थे। बड़ी शान ओ शौकत की जिंदगी गुजारते थे। रियासत के आखिरी नवाब रजा अली खां की तीन रानियां थीं। बड़ी रानी राजमाता रफत जमानी बेगम बेहद खूबसूरत थीं। हीरे जवाहरात से सजी शाही पोशाक पहनती थीं।
शाही पोशाक में खींचे गए उनके फोटो का आज भी बड़ा क्रेज है। 34 साल पहले उनकी मौत हो चुकी है। लेकिन, अब भी देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी इनके फोटो फायदे के लिए इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। राजमाता के पौत्र नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां बताते हैं कि राजमाता की कई सौ पोशाक थीं, जो उन्होने अपनी बहुओं और बेटियों को दे दीं। वह कहते हैं कि राजमाता की हीरे-जवाहारात से सजी पोशाक अगर अब तैयार कराई जाए तो एक करोड़ से भी ज्यादा खर्च आएगा।
रियासत के पहले मुख्यमंत्री अब्दुलस्समद की थीं बेटी
रियासत काल में रामपुर में तीन मुख्यमंत्री रहे थे। 20 जून 1930 को सर अब्दुस्समद को पहला सीएम बनाया गया था। वह नवाब रजा अली खां के ससुर थे। उनकी बेटी रफत जमानी बेगम का निकाह नवाब रजा अली खां से हुआ था। अब्दुस्समद खान ने चार दिसंबर 1934 में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
1774 में बसी थी रियासत
फैजुल्ला अली खान ने सन 1774 में रामपुर रियासत को बसाया था। अपनी जनता और फौज के लिए उन्होंने कई आलीशान भवन बनवाए थे। इनमें किला, कोठी बेनजीर, कोठी खासबाग, लक्खी बाग व खुसरो बाग भी शामिल हैं। अंग्रेजी हुकूमत के प्रतिनिधि के लिए बनवाए गए भवन को आज नूरमहल के नाम से जाना जाता है, जिसमें बेगम नूरबानो और नवाब काजिम अली उर्फ नावेद मियां रहते हैं। आजादी से पहले करीब पौने 200 साल तक रामपुर में नवाबों का राज चलता था। इस दौरान कई बार उनको लड़ाइयां भी लड़नी पड़ीं। रियासत में इनकी ही अदालतें होती थीं।
