रामपुर : तब सिर्फ दो बार रामपुर आकर जीत गए अबुल कलाम आजाद

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सुहेल जैदी/अमृत विचार। मौलाना अबुल कलाम आजाद वर्ष 1952 में रामपुर से सांसद चुने गए और भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने। हालांकि, वह चुनाव के दौरान महज दो बार रामपुर आए। उन्होंने एक जनसभा गांधी पार्क में की और दूसरी बार अपनी जीत का प्रमाण पत्र लेने रामपुर आए। मौलाना अबुल कलाम आजाद की …

सुहेल जैदी/अमृत विचार। मौलाना अबुल कलाम आजाद वर्ष 1952 में रामपुर से सांसद चुने गए और भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने। हालांकि, वह चुनाव के दौरान महज दो बार रामपुर आए। उन्होंने एक जनसभा गांधी पार्क में की और दूसरी बार अपनी जीत का प्रमाण पत्र लेने रामपुर आए। मौलाना अबुल कलाम आजाद की खिलाफत आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका रही। वर्ष 1923 में वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सबसे कम उम्र के अध्यक्ष बने, मौलाना अबुल कलाम आजाद वर्ष 1940 और 1945 के बीच कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। मौलाना अबुल कलाम आजाद अलग मुस्लिम राष्ट्र (पाकिस्तान) के सिद्धांत का विरोध करने वाले मुस्लिम नेताओ में से थे।

पवित्र शहर मक्का में 11 नवंबर 1888 को जन्मे मौलाना अबुल कलाम आजाद के पिता मोहम्मद खैरुद्दीन एक बंगाली मौलाना थे और इनकी माता अरबी थीं, जो शेख मोहम्मद जहरवात्री की बेटी थीं और मदीना में एक मौलवी थीं। वर्ष 1857 के समय हुई विद्रोह की लड़ाई में उन्हें भारत देश छोड़ कर अरब जाना पड़ा जहां मौलाना अबुल कलाम आजाद का जन्म हुआ। मौलाना अबुल कलाम आजाद जब 2 वर्ष के थे, तब 1890 में उनका परिवार वापस भारत आ गया और कलकत्ता में बस गया। मौलाना अबुल कलाम आजाद महात्मा गांधी के सिद्धांतो का समर्थन करते थे। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए कार्य किया। खिलाफत आंदोलन में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। स्वतंत्रता के बाद वह भारत के उत्तर प्रदेश राज्य के रामपुर जिले से 1952 में सांसद चुने गए और वे भारत के पहले शिक्षा मंत्री बने।

तीन साल जेल में रहे मौलाना
मौलाना अबुल कलाम आजाद धारासन सत्याग्रह के अहम इंकलाबी थे। जिस दौरान भारत छोड़ो आन्दोलन हुआ था। कांग्रेस के अन्य प्रमुख नेताओं की तरह उन्हें भी तीन साल जेल में बिताने पड़े थे। स्वतंत्रता के बाद विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की स्थापना उनके सबसे अविस्मरणीय कार्यों में से एक है।

महात्मा गांधी के अनुयायी थे मौलाना आजाद
स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई के समय मौलाना आजाद मुख्य सेनानी में से एक थे। मौलाना आजाद एक महान वैज्ञानिक, एक राजनेता और लेखक थे। आजादी की लड़ाई में हिस्सा लेने के लिए इन्होने अपने पेशेवर काम को भी छोड़ दिया और देशभक्ति के चलते देश की आजादी के लिए बाकी लोगों के साथ काम करने लगे। मौलाना आजाद महात्मा गांधी के अनुयायी थे। लेकिन एक सच्चे भारतीय होने के कारण उन्होंने स्वतंत्रता के बाद भारत में रहकर इसके विकास में कार्य किया और पहले शिक्षा मंत्री बन, देश की शिक्षा पद्धति सुधारने का ज़िम्मेदारी को बखूबी निभाया।

मौलाना अबुल कलाम आजाद ने वर्ष 1952 में रामपुर जनपद से लोकसभा का चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद वह देश के पहले शिक्षा मंत्री बने। मौलाना देश विभाजन के कट्टर प्रतिद्वंदी और महात्मा गांधी के अनुयायी थे।- नफीस सिद्दीकी, वरिष्ठ इतिहासकार

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