यूपी चुनाव 2022: राजधानी लखनऊ की इस सीट पर मुद्दों की नहीं दलों की चमक
लखनऊ। दशहरी आमों की खुशूब और स्वाद से देश दुनिया को रिझाने वाला मलिहाबाद क्षेत्र आम की पट्टी के रूप में प्रदेश में जाना जाता है। हालांकि आम की दशहरी किस्म के लिए इस इलाके की वैश्विक पहचान हैं। राजधानी लखनऊ के पश्चिमी ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा …
लखनऊ। दशहरी आमों की खुशूब और स्वाद से देश दुनिया को रिझाने वाला मलिहाबाद क्षेत्र आम की पट्टी के रूप में प्रदेश में जाना जाता है। हालांकि आम की दशहरी किस्म के लिए इस इलाके की वैश्विक पहचान हैं। राजधानी लखनऊ के पश्चिमी ग्रामीण क्षेत्र का हिस्सा मलिहाबाद विधानसभा क्षेत्र मोहनलालगंज संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है लेकिन राजधानी से करीबी के चलते यहां राजनैतिक हलचल हरदम जोर पकड़े रहती है। यहां कस्बों में ही नहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी सियासत का पारा चढ़ा रहता है। ।
करीब 3.53 लाख मतदाताओं वाला यह विधानसभा क्षेत्र सुरक्षित है। जिले की राजनीति में यह इलाका महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सरकार किसी की भी रही हो लेकिन इस विधानसभा सीट पर चुनावी रस्साकसी काफी तल्ख रहती है। मलिहाबाद सुरक्षित विधानसभा सीट पर वैसे तो अल्पसंख्यक मतदाताओं की संख्या करीब 22 फीसदी तक हैं लेकिन यहां अनुसूचित जाति के मतदाताओं की तादाद करीब 35 फीसदी तक है। इसमें पासी मतदाताओं की संख्या 8 फीसदी के करीब है। हालांकि यादव, क्षत्रिय और ब्राह्मण मतदाता भी इस सीट पर काफी प्रभावी है।
विधानसभा क्षेत्र में मलिहाबाद, रहीमाबाद, माल, नबीपनाह, अटारी आदि क्षेत्रों में ज्यादातर लोगों की जीविकोपार्जन दशहरी आम के बाग अथवा उनकी नर्सरी करते हैं। इसके अलावा पारंपिरक खेती में भी यहां के किसान काफी आगे हैं। जिले की मॉडल ग्राम पंचायत लतीफपुर भी इसी विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा है। विधानसभा क्षेत्र की सीमाएं पड़ोसी जिलों उन्नाव, हरदोई और सीतापुर को छूती है। विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं का स्तर भले ही औसत ही हो लेकिन राजधानी की तरह यहां भी राजनैतिक चर्चाएं आम हैं। अब जब विधानसभा के चुनाव घोषित हो चुके हैं तो इसका आलम पूछिए ही मत।
अब चुनाव में पहले जैसी बात नहीं….
मलीहाबाद में आग के अलाव के बाहर बैठे चुनावी चर्चा करते विनय प्रताप सिंह कहते हैं कि अबकी बार फिर पूर्ण बहुमत से भाजपा की सरकार बनेगी। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्या के भाजपा में जाने के सवाल पर तीखा प्रहार करते हुए जितेंद्र मौर्य कहते हैं की मौर्य समाज दल बदलुओं के झांसे में ना कर अबकी बार भाजपा को वोट देगा। वहीं एक खोखे पर चाय की चुस्कियां ले रहे शकील मियां अपनी चाय खत्म कर बीड़ी सुलगाकर एक सुट्टा लगाने के बाद बोलते हैं कि भइया, अब कहां चुनाव में वह बात जो पहले होती थी। पहले तो चुनाव आयोग की पाबंदिया और उस पर कोरोना का खतरा। ऐसे में चुनाव रस्मअदायगी भर रह गया हैं। हालांकि उनके पास ही चाय पीने बैठे मसीढ़ा गांव के रामऔतार कहते हैं कि ऐसा नहीं है, चुनाव काफी असरदा होगा। इसकी वजह पूछने पर वह बताते हैं कि साठ साल की उम्र हो गई है, कई बार वोट डाल चुके हन लेकिन जितना बाबा हम लोगन का ख्याल रखिन है, उत्ता कौनों नहीं रखिस।
वोट देने से पहले इलाके का विकास रहेगा प्राथमिकता
मलिहाबाद से बारह किलोमीटर आगे बढ़कर माल पहुंचे। यहां चुनावी सरगर्मी का अनुमान लगाने के लिए विकास खंड के बाहर पांच-छह ग्रामीण धूप सेंकते मिले। इनसे बातचीत शुरू कर चुनावी माहौल के बारे में पूछते ही वह सब सोशल डिस्टेंसिंग बनाने लगे और मुहं को मास्क से ढांपने लगे। हालांकि पांच दस मिनट बाद जब उनसे चुनावी चर्चा का आश्य बताया गया तो सभी बेझिझक बातचीत करने को तैयार हो गए।
सैदपुर गांव के अमृतलाल कहने लगे कि हियां तो भइया पहले राजा साहब के कहे तेरे ही वोटिंग होत रहैय। उई जौन पार्टी तरफ रहत रहैं, वहीं तरफ हम लोग भी रहित रहन। लेकिन अब वैसी बात नहीं है। परिचर्चा में शामिल होते हुए एक युवक सुमेर सिंह बोले कि अब पुराना जमाना नहीं रहा, हम जानते हैं कि हमारा हित कौन कर सकता है। अब व्यक्तिगत और जातिगत लाभ नहीं हम इलाके, जिले और प्रदेश का विकास करने वाले को वोट देंगे।
भाईजान, चुनाव अब मुद्दे पर नहीं मजहब पर हो रहा…
हरदोई जिले की संडीला से सीमावर्ती विधानसभा इलाके रहीमाबाद के पास एक चाय की दुकान पर बस के इंतजार में खड़े विश्वविद्यालय के छात्र मोईन खान कहते हैं कि भाईजान, अब चुनाव किसी मुद्दे पर नहीं हो रहे। इलाके की समस्या से भी न तो नेताओं को कोई लेना-देना और न वोटर को। बस मजहबी और जातीय जुनून ही उफान पर है। वहीं जिन्दोर निवासी राज किशोर कहते हैं कि विकास के मुद्दे पे वोट करेगे। जबकि जितेंद्र कुमार गौतम कहते हैं कि जनता विकास के कार्यों पर वोट करेगी।
गांव गोइला निवासी श्रीकिशन कश्यप लखनऊ में कारोबार करते हैं। कुछ सवाल करने से पहले ही वो बोल उठे कि भइया, कहौ चाहे जो कुछ लेकिन मोदी और योगी जी पे कोराना लॉकडाउन मा जितना काम किहिन है, उइका कौनो मुकाबला नहीं कर सकत, बाते चाहे जितनी बड़ी करे। उनकी बात का समर्थन करते हुए चाय दुकानदार रमेश भी बोल उठे कि इस बार चुनाव रस्मअदायगी है। इस सरकार ने जितना काम किया है, उतना किसी ने नहीं किया। इसलिए दूसरे दलों के पास कोई अवसर नहीं।
पिछले चुनाव में पहली बार जीती थी भाजपा
मलिहाबाद (सुरक्षित) विधानसभा सीट पर 2017 में भारतीय जनता पार्टी ने जीत दर्ज की थी। भाजपा की जय देवी ने समाजवादी पार्टी के राजबाला को 22668 वोटों के अंतर से हराया था। जबकि 2012 में सपा के इंदल कुमार ने राष्टवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कौशल किशोर को हराकर इस सीट पर कब्जा जमाया था। उससे पहले वर्ष 2007 में सपा के गौरीशंकर ने बसपा के मेवालाल को 2229 मतों से हराकर विधायक बन सके थे। जबकि 2002 में कौशल किशोर यहां से विधायक बने थे। इस सीट पर तीर बार सपा का कब्जा रह चुका है जबकि उससे पहले कांग्रेस का यह अभेद दुर्ग थी।
मैंगोमैन बोले, मुकाबला तो सपा-भाजपा के बीच ही होगा
मैंगोमैन के नाम से मशहूर पद्मश्री हाजी कलीमुल्लाह कहते हैं कि भई, मुकाबला तो इस बार भी सपा-और भाजपा के बीच ही होगा। हालांकि चुनावी माहौल के बारे में कम और सर्द मौसम के बारे में ज्यादा बाते करते हैं। 300 से भी ज़्यादा आमो की किस्मो को एक पेड़ में बांधने के कारनामे को अंजाम देने वाले कलीमुल्लाह साहब के प्रधानमंत्री मोदी और किक्रेटर सचिन तेंदुलकर तक प्रशसंक रहे हैं। शहर की अजीम शख्शियत के तौर पर उनको जाना जाता है। दबी जुबान से वह भी स्वीकार करते हैं कि अब चुनाव स्थानीय मुद्दों की बजाय दूसरी बातों पर ज्यादा बनता और बिगड़ता है।
देखिए आंकड़े
पुनरीक्षण के पहले कुल मतदाताओं की संख्या 3,40,477 थी, जो पुनरीक्षण के बाद 3,53,043 हो गई है. जिनमें 1,89,603 पुरुष मतदाता, 1,63,407 महिला मतदाता और 33 ट्रांसजेंडर मतदाता लिस्ट में शामिल हैं।
