रामपुर : 31 साल से मिलक-शाहबाद में अस्तित्व तलाश रही कांग्रेस

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आकाश शंकर/अमृत विचार। किसी समय में विकास की इबारत लिखने वाली कांग्रेस से विधानसभा सीट 38-मिलक-शाहबाद के लोगों का ऐसा जुड़ाव खत्म हुआ कि अब यहां कांग्रेस अपना अस्तित्व तलाश रही है। विधानसभा 38-मिलक-शाहबाद की जनता ने छह बार कांग्रेस के प्रत्याशियों को विधायक बनाया। वर्ष 1989 में कांग्रेस से विधायक चुने गए बंशीधर के …

आकाश शंकर/अमृत विचार। किसी समय में विकास की इबारत लिखने वाली कांग्रेस से विधानसभा सीट 38-मिलक-शाहबाद के लोगों का ऐसा जुड़ाव खत्म हुआ कि अब यहां कांग्रेस अपना अस्तित्व तलाश रही है। विधानसभा 38-मिलक-शाहबाद की जनता ने छह बार कांग्रेस के प्रत्याशियों को विधायक बनाया। वर्ष 1989 में कांग्रेस से विधायक चुने गए बंशीधर के बाद इसका कोई भी प्रत्याशी 38-मिलक-शाहबाद की जनता के दिल में जगह नहीं बना सका। नतीजतन वर्ष 1991 में हुए चुनाव के बाद कांग्रेस को ऐसी शिकस्त मिली कि आज तक कांग्रेस का प्रत्याशी यहां के लोगों का दिल नहीं जीत सका।

कभी सभी सीटों पर कब्जा जमाए रखने वाली कांग्रेस की झोली 38-मिलक-शाहबाद विधानसभा में पिछले 31 साल से खाली है। पहली बार वर्ष 1952 में कांग्रेस से कृष्ण सरन आर्य ने जीत दर्ज की,उसके बाद वर्ष1957 में कल्याण राय और वर्ष1962 में बलदेव सिंह कांग्रेस से विधायक बने। इसके बाद 1967 में स्वतंत्रत पार्टी के चुनाव चिन्ह से बंशीधर विधायक बने और वर्ष 1969 में भारतीय क्रांति दल की तरफ से चुनाव लड़े और विधायक बनकर विधानसभा पहुंचे। इसके बाद वर्ष 1974 में बंशीधर कांग्रेस में आ गए और विधायक बने। वर्ष 1977 में आई जनता पार्टी की लहर अपने साथ सभी को उड़ाकर ले गई और कांग्रेस को भारी नुकसान हुआ।

वर्ष 1977 में आई लहर का लाभ जागन सिंह को मिला, वह जनता दल से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। वर्ष1980 में बंशीधर ने कांग्रेस से चुनाव लड़ा और जनता ने उन्हें अपना विधायक चुना। वर्ष 1985 में एक बार फिर जागन सिंह एलकेडी से मैदान में आये और विधायक बने। इसके बाद वर्ष 1989 में बंशीधर कांग्रेस से चुनाव लड़े और जीत दर्ज की। इसके बाद 1991 में कांग्रेस से चंद्रपाल सिंह मैदान में आये मगर उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद मतदाता कांग्रेस पार्टी से किनारा करने लगे। इसके बाद कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी अपने प्रतिद्वंद्वी को खास टक्कर भी नहीं दे सके। हालात यहां तक आ गए कि कई प्रत्याशी अपनी जमानत तक जब्त करा बैठे। मौजूदा वक्त में भी कांग्रेस के हाथ को साथ देने के लिए राजनेता भरसक कोशिश में लगे हैं। जनता का रुख किधर होगा यह आगामी 14 फरवरी को होने वाला चुनाव तय करेगा।

 

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