लखनऊ: अखिलेश पहली बार लड़ेंगे विधानसभा चुनाव, किया ये बड़ा वादा…
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। उनके मैनपुरी के करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार ऐसी जानकारी सामने आ रही है। इससे पहले ऐसी …
लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने की चर्चा जोरों पर है। उनके मैनपुरी के करहल विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना जताई जा रही है। पार्टी सूत्रों के अनुसार ऐसी जानकारी सामने आ रही है। इससे पहले ऐसी खबरें थी कि अखिलेश यादव आजमगढ़ से चुनाव लड़ सकते हैं।
अखिलेश के चुनाव लड़ने की नहीं की गई आधिकारिक घोषणा…
हालांकि अखिलेश कहां से चुनाव लड़ेंगे, इसकी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। एक दिन पहले उन्होंने कहा था कि वह आजमगढ़ के लोगों से अनुमति लेकर चुनाव लड़ेंगे। उन्होंने कहा था कि पहले भी लोगों ने मुझे यहीं से चुनाव जिताया था, लिहाजा यदि वह अनुमति देंगे तो मैं लड़ूंगा।
फिलहाल करहल विधानसभा सीट पर सपा नेता सोबरन सिंह यादव मौजूदा विधायक हैं। सपा के लिए मैनपुरी, कन्नौज व इटावा घर की सीट मानी जाती है। यहां से परिवार के मुखिया मुलायम सिंह यादव समेत कई लोग चुनाव लड़कर विधानसभा पहुंच चुके हैं।
सत्ता आने पर पुरानी पेंशन करेंगे बहाल : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार बनने पर राज्य कर्मचारियों और शिक्षकों के लिए 2005 से पहले की पुरानी पेंशन योजना को बहाल करने का वादा किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी इसे अपने घोषणा पत्र में शामिल करेगी। आर्थिक मंथन के बाद पुरानी पेंशन बहाल करने का फैसला किया गया है। उन्होंने विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए दिए जाने वाले यश भारती सम्मान को फिर शुरू करने और जिला स्तर पर नगर भारती सम्मान दिए जाने की घोषणा की है।
पार्टी प्रदेश मुख्यालय में गुरुवार को मीडिया से वार्ता करते हुए उन्होंने कहा कि भाजपा ने कर्मचारियों और शिक्षकों की पुरानी पेंशन को खत्म कर दिया। सरकार बनने पर हम इसे दोबारा शुरू करेंगे। लम्बी सेवा के बाद सेवानिवृत्त होने वालों के जीवन निर्वाह के लिए पुनः पुरानी सामाजिक सुरक्षा पेंशन दिया जाना उचित है। पेंशन बहाली से 13.37 लाख लोग लाभाविन्त होंगे।
राज्य कर्मचारियों और अटेवा संगठन की इस संबंध में पुरानी मांग रही है। कर्मचारियों के इलाज के लिए कैशलेस स्कीम को लागू किया जाएगा। आउटसोर्सिंग को लेकर उन्होंने कहा कि यह अच्छी प्रथा नहीं है, इसमें शोषण के अलावा कुछ नहीं होता है। भाजपा सरकार ने कर्मचारियों की बात नहीं सुनी।
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