मुरादाबाद : बसपा ने धीरे से चला मुस्लिम कार्ड, शहर पर अभी भी मंथन

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मोहित गौर/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में बसपा ने धीरे से पत्ते खोले हैं। हालंकि अभी भी शहर सीट पर रहस्य बरकरार है। जबकि, भाजपा, सपा, कांग्रेस, आप, एआइ्एमआईएम ने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। बसपा के इस केमिस्ट्री से अन्य दलों की समीकरण बिगड़ सकता है। शहर में अगर हिंदू चेहरा आया तो भाजपा …

मोहित गौर/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में बसपा ने धीरे से पत्ते खोले हैं। हालंकि अभी भी शहर सीट पर रहस्य बरकरार है। जबकि, भाजपा, सपा, कांग्रेस, आप, एआइ्एमआईएम ने उम्मीदवार का ऐलान कर दिया है। बसपा के इस केमिस्ट्री से अन्य दलों की समीकरण बिगड़ सकता है। शहर में अगर हिंदू चेहरा आया तो भाजपा और मुस्लिम आया तो सपा की पेशानी पर बल स्वाभाविक है।

हालांकि वर्ष 2007 में जब बसपा की लहर थी, तब जिले में केवल तीन सीटों पर हाथी दौड़ सका था। जबकि उसके बाद से पार्टी को लागतार हार का मुंह देखना पड़ रहा है। कई बार से सियासी आंकड़ों में बसपा का जनाधार खिसकता जा रहा है। इस बार दलित व मुस्लिम ध्रुवीकरण कर बसपा चौंकाने वाले परिणाम देने का दावा कर रही है।

सदर विधानसभा सीट से आज तक किसी भी बसपा प्रत्याशी ने जीत हासिल नहीं की है। इस सीट पर कब्जा करने के लिए वर्ष 2012 में बसपा ने लगातार चार बार विधायक रहे संदीप अग्रवाल पर भी दांव खेला था। लेकिन, वह पार्टी का यहां पर सूखा खत्म नहीं कर सके। अलबत्ता वर्ष 2002 और 2007 में कांठ सीट पर रिजवान अहमद खां ने कब्जा किया था। वर्ष 2002 और 2007 में कुंदरकी विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी हाजी अकबर हुसैन जीत हासिल कर चुके हैं।

वहीं वर्ष 2007 में ठाकुरद्वारा विधानसभा सीट से विजय यादव ने बाजी मारी थी। अब विजय सपा में हैं। जिले में पांच सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं, जिसमें से तीन नए चेहरे हैं। बसपा ने कांठ से आफाक अली खां, ठाकुरद्वारा से मुजाहिद हुसैन, मुरादाबाद देहात से अकील चौधरी, कुंदरकी से हाजी चांद बाबू मलिक और बिलारी से अनिल चौधरी को चुनाव मैदान में उतारा है।

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