प्रयागराज: गंगा और यमुना के जलस्तर बढ़ने से कल्पवासी बेहाल

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प्रयागराज। दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माघ मेला क्षेत्र में गंगा और यमुना के जलस्तर में हो रही बढ़ोत्तरी से साधु-संतों और कल्पवासियों की समस्या बढ़ती जा रही है हालांकि दोनो नदियों के जलस्तर अब स्थिर हैं। सिंचाई विभाग अधिशासी अभियंता वृजेश कुमार सिंह ने रविवार को बताया कि पहाड़ों पर लगातार बारिश …

प्रयागराज। दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक माघ मेला क्षेत्र में गंगा और यमुना के जलस्तर में हो रही बढ़ोत्तरी से साधु-संतों और कल्पवासियों की समस्या बढ़ती जा रही है हालांकि दोनो नदियों के जलस्तर अब स्थिर हैं। सिंचाई विभाग अधिशासी अभियंता वृजेश कुमार सिंह ने रविवार को बताया कि पहाड़ों पर लगातार बारिश और कानपुर बैराज से पानी छोडे जाने के बाद गंगा के जलस्तर में वृद्धि हुई थी। इसके साथ ही केन और बेतवा नदी में पानी बढ़ने का असर भी जलस्तर पर पड़ा लेकिन अब दोनों नदियों का जलस्तर स्थिर हैं।

उन्होंने बताया कि गंगा के बढ़े जलस्तर से गंगदीप में शिविरों में पानी भर गया था, इसलिए गंगदीप से कल्पवासियों के शिविरों को सेक्टर पांच में शिफ्ट कर दिया गया है। शिफ्ट किए गए शिविरों के चलते मेला अब ओल्ड जीटी से करीब एक किलोमीटर उत्तर की फैल गया है। नई जगह की बसावट ऊंचे पर है और साफ सुथरी है। सिंह ने बताया कि बढे जलस्तर के कारण गंगा लगातार कटान करती चली आ रही थीं। कटान रोकने के लिए सिंचाई विभाग की ओर से बाढ़ रोकने के लिए टीम सक्रिय है। त्रिवेणी और काली पांटून पुल के बीच बाढ़ के पानी ज्यादा दबाव है। यहां पर बनाए गए बंधे के ऊपर से पानी बहने लगा तो वहां पर बालू भरी बोरियां डालकर उसे रोका गया।

झूंसी निवासी राजेन्द्र पाण्डेय ने बताया कि उन्होने अपना शिविर गंगद्वीप में लगाया था। गंगा का जलस्तर बढने से वहां पानी भर गया उसके बाद प्रशासन ने हमें सेक्टर पांच में शिफ्ट किया। उन्होंने कहा “ हम जानते है कि माघ मेला के दौरान हर साल गंगा के जलस्तर में वृद्धि होती रही है। कल्पवासियों को परेशानी भी होती है।”

पाण्डेय जैसे बडी संख्या में कल्पवासियों को सेक्टर पांच में जगह दिया गया है। उनमें से फूलपुर निवासी कलावती देवी ने बताया कि कल्पवास का मतलब ही सांसारिक सुख का त्यागकर ही भगवान का भजन किया जा सकता है। संगम में भी घर जैसा सुख की कल्पना रखनी है तो कल्पवास का कोई औचित्य नहीं। हम यहां सुविधा लेकर भजन करने नहीं आए। भगवान में ध्यान लगाना है तो सुख और दु:ख से परे हाेकर हमें उनको भजना होगा।

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