बरेली: सरकार से खफा शिक्षा मित्र, चुनाव में मजा चखाने की ठानी
बरेली, अमृत विचार। सम्मान और पद के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षा मित्रों ने इस बार सरकार को विधानसभा चुनाव में मचा चखाने की ठान ली है। शिक्षा मित्रों का कहना है कि सरकार ने उनके पक्ष में अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। इसलिए उनका बेड़ा पार करने वाली पार्टी को ही …
बरेली, अमृत विचार। सम्मान और पद के लिए संघर्ष कर रहे शिक्षा मित्रों ने इस बार सरकार को विधानसभा चुनाव में मचा चखाने की ठान ली है। शिक्षा मित्रों का कहना है कि सरकार ने उनके पक्ष में अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। इसलिए उनका बेड़ा पार करने वाली पार्टी को ही इस बार चुनाव जिताएंगे।
जिले में 3 हजार से ज्यादा शिक्षा मित्र कार्यरत हैं। शिक्षामित्रों का कहना है कि 5 सालों में कई शिक्षा मित्रों को हटा दिया गया। जबकि, सहायक अध्यापक का दर्जा पाने के लिए वे लोग अनेक आंदोलन करते रहे। बावजूद राज्य या केंद्र सरकार ने उनकी एक समस्या का समाधान नहीं किया। वर्तमान सरकार में मानदेय में 2 हजार रुपये की बढ़ोतरी की बात कही गई। उसका शासनादेश भी लागू नहीं हुआ और आचार संहिता लग गई। सभी सरकारी मापदंडों पर खरा उतरने के बाद भी शिक्षा मित्र सिर्फ 10 हजार प्रति माह के मानदेय पर गुजारा करने को विवश हैं।
सहायक अध्यापक का समायोजन रद होने के बाद पिछले 5 साल से शिक्षामित्र संगठन ने जिले से लेकर लखनऊ व दिल्ली तक आवाज उठाई। महिला शिक्षा मित्रों ने सरकार को एहसास कराने के लिए बड़ी मात्रा में राखी भी भेजी थी लेकिन फिर भी सरकार को रहम नहीं आया।
जब 5000 शिक्षामित्रों ने मौत को गले लगाया
2017 में शिक्षामित्रों का समायोजन निरस्त होने के बाद से अब तक लगभग 5000 शिक्षामित्रों ने मौत को गले लगा लिया। इसकी संख्या भी सरकार को उपलब्ध कराई गई लेकिन शिक्षामित्रों के सुरक्षित भविष्य को लेकर कोई कदम नहीं उठाया गया।
खुद को ठगा महसूस कर रहे शिक्षामित्र
शिक्षामित्र पिछले 10 वर्षों से खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं। इस बार एकजुट होकर एक ही पार्टी को सहयोग और अपना वोट करेंगे। -डा. केपी सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष शिक्षामित्र संघ
वर्तमान सरकार से उम्मीद थी कि शिक्षा मित्रों के हित में कुछ निर्णय लिए जाएंगे जो धूमिल हो चुकी है। इस बार हमारे वोट का बंटवारा नहीं होगा। -संगीता गंगवार, जिलाध्यक्ष, महिला प्रकोष्ठ शिक्षामित्र संघ
शिक्षामित्र इस बार जाति-बिरादरी और धर्म में नहीं बंटेंगे जिन्होंने हमें सम्मान देने का काम किया था हम इस बार अपना वोट भी उन्हीं को देंगे। -विनीत चौबे, शिक्षामित्र
तत्कालीन सरकार ने हमसे वादाखिलाफी की है। विधानसभा चुनाव में मनपसंद पार्टी को जिताने के लिए हम अपनी पूरी ताकत लगाएंगे।
-सर्वेश पटेल, शिक्षा मित्र
