चुनावी जंग : इस बार हर सीट पर रोमांचक होगा मुकाबला, सभी दलों ने अपने हिसाब से बनाईं रणनीतियां
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। समाजवादी गढ़ में इस बार रोमांचक मुकाबले के आसार हैं। सपा विजय अभियान जारी रखने की तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। भाजपा ने सरकार के बेहतर कार्य का नारा देकर शानदार प्रदर्शन की व्यूह रचना तैयार की है। बसपा सभी नए चेहरों के साथ मैदान में है, जबकि कांग्रेस ने …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। समाजवादी गढ़ में इस बार रोमांचक मुकाबले के आसार हैं। सपा विजय अभियान जारी रखने की तैयारी के साथ मैदान में उतरी है। भाजपा ने सरकार के बेहतर कार्य का नारा देकर शानदार प्रदर्शन की व्यूह रचना तैयार की है। बसपा सभी नए चेहरों के साथ मैदान में है, जबकि कांग्रेस ने अपने बलबूते पर बेहतर प्रदर्शन का ताना-बाना बुना है। इस बार क्षेत्र में कुल 88 उम्मीदवार मैदान में हैं। लेकिन मुख्य मुकाबला बड़े दलों के बीच होने के संकेत हैं।

शहर सीट पर भाजपा ने विधायक रितेश कुमार गुप्ता को पांच साल के प्रयासों की थाती पर मैदान में उतारा है। सपा ने वर्ष 2017 के रनर हाजी यूसुफ अंसारी पर दांव खेला है। कांग्रेस ने मेयर चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाले हाजी रिजवान कुरैशी पर भरोसा जताया है, वहीं बसपा ने इसरार अहमद को मौका दिया है। मुरादाबाद देहात क्षेत्र के विधायक हाजी इकराम कुरैशी सपा से टिकट कटने के बाद कांग्रेसी उम्मीदवार के रूप में ताल ठोंक चुके हैं। भाजपा ने डॉ. केके मिश्रा, सपा ने हाजी नासिर और बसपा ने आकिल चौधरी को उतारा है। सपा पिछले चुनाव में विजयी रही और भाजपा उम्मीदवार को रनर के रूप में संतोष करना पड़ा था।

मीट कारोबारी हाजी नासिर अभी पार्टी में नए हैं। ठाकुरद्वारा सीट पर सपा ने विधायक नवाब जान खान पर भरोसा व्यक्त किया है, जबकि भाजपा ने युवा अजय प्रताप सिंह को अवसर प्रदान किया है। बसपा से मुजाहिद अली और कांग्रेस सलमा आगा के बलबूते जनता की अदालत में है। कांठ में कुर्सी बचाने के लिए विधायक राजेश कुमार सिंह व्यूह रचना बना रहे हैं। यहां पर सपा ने कमाल अख्तर पर दांव खेला है। बसपा की ओर से आफाक और कांग्रेस के इसरार सैफी मुकाबले को रोचक बनाएंगे।

चर्चित कुंदरकी सीट पर विधायक हाजी रिजवान हाथी पर सवार हो गए हैं। सपा ने जिया उर रहमान को मौका दिया है। पिछले चुनाव में भाजपा यहां दूसरे नंबर पर रही थी। पार्टी ने कमल कुमार को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने महिला आरक्षण की भरपाई दरक्शा बेगम से की है। बिलारी में विधायक फहीम सपा के प्रत्याशी हैं। बसपा उम्मीदवार के रूप में अनिल चौधरी मैदान में हैं। भाजपा ने यहां प्रत्याशी बदल दिया है। यहां से पूर्व एमएलसी परमेश्वर लाल सैनी और कांग्रेस की कल्पना सिंह मैदान में हैं। यानी की सभी दलों के प्रभावशाली चेहरे आरंभिक दौर में मुकाबले को रोचक बनाने में जुट गए हैं।
वर्ष 2017 के चुनाव में नहीं था कोई कांग्रेसी उम्मीदवार
सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस को जिले में एक भी सीट नहीं मिली थी। इस वजह से कांग्रेस की ताकत सार्वजनिक नहीं हो पाई। तब सपा के चार विधायक जीते थे और दो सीटों पर मामूली अंतर से गठबंधन को पराजित होना पड़ा था। अबकी कांग्रेस ने अपने बलबूते चुनाव मैदान में है। जिसमें देहात सीट पर पार्टी ने एन वक्त उम्मीदवार बदल दिया है। इससे इस क्षेत्र में कांग्रेस के बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद की जा रही है। क्षेत्र के सपा विधायक हाजी इकराम कुरैशी टिकट नहीं मिलने की वजह से पार्टी से बगावत करके कांग्रेसी रूप बनाकर मैदान में हैं। जिससे यहां पार्टी की चुनावी जंग रोचक होने के आसार हैं।
