मुरादाबाद : चुनावी पाबंदियों ने फीका कर दिया प्रचार का माहौल

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जूही/अमृत विचार। चुनाव आयोग की बेडियों ने इस बार प्रचार का रंग फीका कर दिया है। लाउडस्पीकर का कानफाड़ू शोर और गलियों में फरार्टा भरती नेताजी की गाड़ियां अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई हैं। कोविड के चलते आयोग की सख्ती के बाद चुनाव प्रचार का दम ही निकल गया है। एक दौर …

जूही/अमृत विचार। चुनाव आयोग की बेडियों ने इस बार प्रचार का रंग फीका कर दिया है। लाउडस्पीकर का कानफाड़ू शोर और गलियों में फरार्टा भरती नेताजी की गाड़ियां अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई हैं। कोविड के चलते आयोग की सख्ती के बाद चुनाव प्रचार का दम ही निकल गया है।

एक दौर था, जब पार्टियों के रंग-बिरंगे झंडे, बैनर माहौल में चुनावी रंग घोलते थे। लेकिन, कोरोना के चलते रैलियों पर लगी पाबंदी ने इस सब को बेरंग कर दिया है। कारोबारियों को कोरोना काल की मंदी से उबरने के लिए विधानसभा चुनाव का इंतजार था। चुनाव की तिथि घोषित होने के बाद आचार संहिता लागू होने से प्रचार सामग्री का धंधा भी ठंडा हो गया। ऐसे में व्यापारियों में मायूसी का माहौल है।

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दुकानों पर धरे रह गए झंडे-बिल्ले
गुरहट्टी चौराहा स्थित चुनाव प्रचार सामग्री विक्रेता दीपक गुप्ता ने बताया कि कोरोना संक्रमण से पूर्व के विधानसभा व लोकसभा चुनावों में प्रचार सामग्री की दुकानों पर भीड़ उमड़ती थी। चुनाव को देखते हुए गठबंधन, सत्ता पक्ष के अलावा क्षेत्रीय दलों के झंडे, टोपी, पटका व बिल्ला आदि माल एडवांस में मंगाया था। लेकिन, चुनावी रैलियों पर पाबंदी से सारा माल धरा रह गया। उन्होंने बताया कि आचार संहिता के चलते आम बैनरों की बिक्री भी बंद हो गई है। विधानसभा चुनावों में 1.5 से दो लाख रुपये का माल बिक जाता था। इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव की तुलना में 10 फीसद ही बिक्री हुई है।

नहीं हुई अब तक गाड़ियों की बुकिंग
अग्रवाल टूर एंड ट्रैवल्स के मालिक विशाल ने बताया कि इस बार बुकिंग का काम ठप है। चुनावी सीजन में कैंपेनिंग के लिए गाड़ियों की 20-25 दिनों के लिए बुकिंग हो जाती थी। पार्टियां प्रचार- प्रसार के लिए 20-25 गाड़ियां पहले ही बुक कर देते थे। कारोबार भी अच्छा होता था। लेकिन इस बार कोरोना और आयोग की सख्ती ने कारोबार ही खत्म कर दिया।

हेलीकॉप्टर से नामांकन की आस रह गई अधूरी
अक्सर नेता 20-30 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए भी हेलिकॉप्टर का सहारा लेते हैं। स्टार प्रचारक से ज्यादा भीड़ कई बार हेलिकॉप्टर बटोर लेता है। कई प्रत्याशियों ने नामांकन में हेलिकॉप्टर के प्रयोग की योजना बनाई थी, जो पाबंदियों के कारण परवान नहीं चढ़ सकी।

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