चुनावी मुद्दा : सियासी मठों से बिछने लगे शतरंजी चौसर, कई जगह बागियों ने ठोकी ताल
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। चुनाव चिह्न आवंटन के बाद सियासी रंग दिखने लगेगीा। सोमवार को नामांकन पत्र वापसी के बाद चिह्नों का आवंटन हो जाएगा। इसके बाद से सभी उम्मीदवार मतदाताओं के चौखट पर दस्तक बढ़ा देंगे। सियासी मठों में शतरंजी चाल शुरू हो गई है। जोड़-तोड़ और शतरंजी चौसरों के सहारे चुनावी नैया पार लगाने …
आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। चुनाव चिह्न आवंटन के बाद सियासी रंग दिखने लगेगीा। सोमवार को नामांकन पत्र वापसी के बाद चिह्नों का आवंटन हो जाएगा। इसके बाद से सभी उम्मीदवार मतदाताओं के चौखट पर दस्तक बढ़ा देंगे। सियासी मठों में शतरंजी चाल शुरू हो गई है। जोड़-तोड़ और शतरंजी चौसरों के सहारे चुनावी नैया पार लगाने की मुहिम प्रभावी होने लगी है।
ऐन वक्त टिकट कटने के बाद कई विधान सभा क्षेत्रों में समीकरणों के करवट लेने के कयास तेज हो गए हैं। टिकट कटने वाले दावेदारों की बगावत कोई नया गुल खिला दे तो किसी को कोई आश्यर्य नहीं होना चाहिए। जिले वर्ष 2017 के चुनाव में समाजवादी गढ़ के रूप में उभर कर सामने आया था। वर्ष 2019 के लोक सभा चुनाव में यहां के मतदाताओं ने गौर भाजपा उम्मीदवारों को पसंद किया।
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14 फरवरी को मतदान होना है। इस बार भी समाजवादी विचारधारा से जुड़े उम्मीदवारों के हौंसले बुलंद हैं। लेकिन, प्रेम, जंग और राजनीति में कब क्या हो जाए, कोई दावे के साथ कुछ भी नहीं कह सकता। इस बार का चुनाव किस मुद्दे पर होगा या मतों का ध्रुवीकरण होगा, यह तय होना बाकी है। शहर सीट पर भाजपा ने विधायक रितेश गुप्ता, सपा ने पूर्व उम्मीदवार यूसुफ अंसारी को मौका दिया है, जबकि कांग्रेस के हाजी रिजवान कुरैशी की एंट्री से यहां चुनाव की तस्वीर बदलने की चर्चा है। बसपा के इरशाद अहमद को पार्टी के परंपरागत मतों के साथ अपने समाज पर पूरा भरोसा है।
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देहात सीट पर अबकी रोचक मुकाबला होने के संकेत हैं। सपा के विधायक हाजी इकराम कुरैशी बागी होकर कांग्रेस के निशान पर मैदान में हैं। भाजपा के डॉ. केके मिश्र, बसपा के आकिल चौधरी का दमखम दिख रहा है। सपा उम्मीदवार हाजी नासिर का प्रचार चर्चा में है। वह मीट के बड़े कारोबारी हैं और बसपा उम्मीदवार के रूप में इस क्षेत्र से चुनाव लड़ चुके हैं। यह जरूर है कि वर्ष 2012 के चुनाव में उन्हें यहां सफलता नहीं मिल पाई।
कुंदरकी विधान सभा क्षेत्र में रोचक मुकाबले के संकेत हैं। यहां से विधायक हाजी रिजवान बसपा के उम्मीदवार बने हैं। सपा से उन्हें टिकट नहीं मिल पाया, जबकि बसपा के हाजी चांद बाबू की जगह बसपा ने रिजवान पर दांव लगा दिया। सपा उम्मीदवार जिया उर रहमान मैदान में हैं। भाजपा के कमल कुमार प्रजापति और कांग्रेस की दरक्शा बेगम की लामबंदी चर्चा में है। बसपा से टिकट कटने से नाराज चांद बाबू दूसरे के साथ लामबंद हो गए हैं। विधान सभा क्षेत्र कांठ में भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह, सपा के कमाल अख्तर, बसपा के आफाक उल्ला खां और कांग्रेसी इसरार सैफी के बीच रोचक मुकाबले के आसार हैं।
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ठाकुरद्वारा में भाजपा ने नया प्रयोग किया है। यहां अजय प्रताप सिंह, सपा विधायक नवाबजान खान, बसपा के मुजाहिद अली और कांग्रेस की सलमा आगा ने ताल ठोंकी है। यह भाजपा की परंपरागत सीट रही है। लेकिन, 2015 के उप चुनाव से सपा का कब्जा है। यहां भाजपा उम्मीदवार के चुनाव संचालन की कमान पूर्व सांसद सर्वेश कुमार सिंह ने संभाली है, जिससे मुकाबला रोचक होना तय है।
बिलारी क्षेत्र में सपा विधायक मो. फहीम को भाजपा के परमेश्वर लाल सैनी, बसपा के अनिल चौधरी और कांग्रेस की कल्पना सिंह से भिड़ंत है। भाजपा ने इस बार उम्मीदवार बदला है और बसपा के अनिल चौधरी वर्ष 2017 के चुनाव में रालोद उम्मीदवार के रूप में मैदान में थे। तब अनिल ने बसपा से टिकट का दावा किया था। लेकिन, ऐन वक्त उनका टिकट कट गया था। दूसरे चरण के मतदान को लेकर सभी दलों के चुनावी मठ गुलजार हो गए हैं। चुनाव चिह्न आवंटन के बाद प्रचार और जनसंपर्क का व्यापक माहौलदिखने लगेगा।
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