बाराबंकी: खोया गौरव हासिल करना चाहता है दरियाबाद, जानें पूरा मामला…

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बाराबंकी। सदियों से दरियाबाद गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। अंग्रेजी हुकूमत में दरियाबाद जिला मुख्यालय हुआ करता था। यही पर अंग्रेजी शासन के कलेक्टर का दफ्तर  संचालित होता था, तो वहीं बगल में अंग्रेजी हुकूमत की कोर्ट भी संचालित होती थी। 1857 की क्रांति के बाद दरियाबाद में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजा। विद्रोह की …

बाराबंकी। सदियों से दरियाबाद गौरवशाली इतिहास समेटे हुए है। अंग्रेजी हुकूमत में दरियाबाद जिला मुख्यालय हुआ करता था। यही पर अंग्रेजी शासन के कलेक्टर का दफ्तर  संचालित होता था, तो वहीं बगल में अंग्रेजी हुकूमत की कोर्ट भी संचालित होती थी।

1857 की क्रांति के बाद दरियाबाद में अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल बजा। विद्रोह की स्थिति को भांपते हुए अंग्रेज खुद को असुरक्षित समझने लगे। यही कारण रहा कि वर्ष 1858 ई. तक दरियाबाद जिला रहा, लेकिन 1859 में अंग्रेजों ने जिलामुख्यालय बदल कर नवाबगंज बना लिया।

बतातें हैं कि अंग्रेजी शासन काल में जिला बाराबंकी को दारियाबाद के नाम से जाना जाता था। जिसका मुख्यालय दरियाबाद शहर हुआ करता था। जिसे मोहम्मद शाह शारिकी की सेना के एक अधिकारी दरिआब खां द्वारा स्थापित किया गया था। दरियाबाद 1858 तक जिला मुख्यालय बना रहा।

1859 में जिला मुख्यालय को नवाबगंज में स्थानांतरित कर दिया गया था। जो अब बाराबंकी कहा जाता है। जिले के विस्तार के लिये अंग्रेजों द्वारा, तब दरियाबाद जिले में कुर्सी को जिला लखनऊ और हैदरगढ़ को जिला रायबरेली से जोड़ा गया था। दरियाबाद टाउन के बन्नेतले वार्ड में अंग्रेजी कलेक्टर का कार्यालय हुआ करता था। यहां पर कलेक्टर बैठता था।

अंग्रेजी सेना भी इसी मोहल्ले में रुकती थी। वर्तमान में यहां पर बीआरसी दफ्तर व प्राथमिक विद्यालय संचालित है। वहीं इसके सामने बने भवन में अंग्रेजों का कोर्ट चलता था। यह भवन आज भी मौजूद है। आजादी के बाद से इस भवन में अस्पताल संचालित हो रहा है। यहां पर आज भी कोर्ट का फर्नीचर रखा हुआ है। यहां मौजूद फार्मासिस्ट केके सिंह बतातें हैं कि इस कक्ष में बहुत बड़े पंखे लगे थे। जिन्हें चलाने के लिए एक रस्सी बंधी होती थी, जो दरवाजे के एक छिद्र से दूसरे कक्ष में बैठकर नौकर खीचते थे, तब पंख चलता था। वो दरवाजा, कक्ष , भवन आज भी मौजूद है।

भवन पर एक शिलारोपण का पत्थर लिखा है। जिस पर लिखा है कि सभापति डिस्ट्रिक्ट बोर्ड बाराबंकी व रईस दरियाबाद राय उमानाथ बली   ने 4 जनवरी सन 1935 ई. को निज कर कमलों से शिलारोपण किया तथा उद्घाटन डिप्टी कमिश्नर भोलानाथ भक्त साहब बहादुर के द्वारा जुलाई 1935 में किया गया।

शिक्षक आनंद श्रीवास्तव बतातें है कि 1857 की क्रांति के बाद विद्रोह की आशंका भांप अंग्रेज धीरे- धीरे नवाबगंज को जाने लगे। उसे ही अपना सुरक्षित स्थान समझ ठिकाना बनाया। वर्तमान में जहां खंड शिक्षा अधिकारी का दफ्तर है वहां पर जिला मुख्यालय का दफ्तर था, कलेक्टर बैठता था और जहां अस्पताल हैं, वहां कोर्ट थी।

हड़हा में नेता जी ने दिया था प्रशिक्षण

जिस वक्त देश में आजादी के लिए आंदोलनों का दौर चल रहा था  उस वक्त 24 नवंबर 1938 को दरियाबाद के हड़ाहा गांव में शिविर लगा था। 24 नवंबर को नेता जी सुभाषचंद्र बोस हड़ाहा गांव आये हुए थे। यहां कांग्रेस सोशलिस्ट पार्टी की ओर से एक प्रांतीय शिविर आयोजित हुआ था।

इस शिविर के आचार्य डॉ. राम मनोहर लोहिया व प्रभारी केशव प्रसाद शर्मा थे। शिविर का उद्घाटन नेताजी सुभाषचंद्र बोस व कार्यक्रम की अध्यक्षता योगेश चंद्र चटर्जी ने की थी। आचार्य नरेंद्र देव के आग्रह पर इस कैंप का समस्त व्यय हड़ाहा रियासत के तत्कालीन राजा प्रताप बहादुर सिंह ने किया। यहां नेता जी की प्रतिमा लगाकर शिविर का उद्घाटन किया गया था।

शिविर में देश के राष्ट्रवादी नेता भी आए थे। बतातें हैं कि यहां शिविर में कई दिन तक प्रशिक्षण चला था। इस अधिवेशन में शामिल होकर नौजवानों से आर पार की लड़ाई लड़कर देश को आजादी दिलाने का आवाहन किया गया।

ललिता शास्त्री ने किया कक्ष का उद्घाटन 

दरियाबाद के लाल बहादुर शास्त्री इंटर कालेज के कार्यालय कक्ष का शिलान्यास देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की धर्मपत्नी श्रीमती ललिता शास्त्री करने पहुंची थी। उन्होंने यहां पर 25 फरवरी 1983 को कक्ष का शिलान्यास किया था।

यहां के प्रधानाचार्य आनंद श्रीवास्तव बतातें है कि उस वक्त वो सहायक अध्यापक हुआ करते थे। ललिता शास्त्री ने शिलान्यास मौके पर छात्रों से शास्त्री के नाम की गरिमा को बनाएं रखने की बात कही थी।

जिला बनाने की होती रही मांग

दरियाबाद को जिला मुख्यालय बनाने की मांग अरसे से चली आ रही है। कई बार लोगों ने पद यात्रा कर दरियाबाद को खोया गौरव दिलाने की मांग की। लेकिन जिलामुख्यालय रहने वाला दरियाबाद आज महज आदर्श नगर पंचायत तक ही सीमित रहकर रह गया है।

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