बरेली: टैक्स लगा नहीं, सभी को खुश रखने का प्रयास
बरेली, अमृत विचार। बजट में कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया गया है। करों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बजट वर्तमान में किसी को कुछ नहीं दे रहा, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम होंगे। इसलिए यह इंडस्ट्री के लिए अच्छा है। बजट परिचर्चा के दौरान यह बात उद्यमियों ने एक स्वर से कही। पूर्वप्रधानमंत्री अटल बिहारी …
बरेली, अमृत विचार। बजट में कोई अतिरिक्त कर नहीं लगाया गया है। करों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। बजट वर्तमान में किसी को कुछ नहीं दे रहा, लेकिन इसके दूरगामी परिणाम होंगे। इसलिए यह इंडस्ट्री के लिए अच्छा है। बजट परिचर्चा के दौरान यह बात उद्यमियों ने एक स्वर से कही। पूर्वप्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का सपना था कि देश के विभिन्न भागों में आने वाली बाढ़ से लोगों को बचाने के लिए नदियों को आपस में जोड़ा जाए।
इससे बाढ़ का पानी किसी की बर्बादी न करे बल्कि उस पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई में किया जा सके। इस बजट में केन बेतवा नदी को जोड़ने के बड़े काम के लिए धन आवंटित हुआ है। इससे हरित क्रांति को बढ़ावा मिलेगा। एक होटल में हुई परिचर्चा में आईआईए के उद्यमियों ने बजट के प्रत्येक बिंदु पर राय रखी।
आईआईए के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सुरेश सुन्दरानी ने कहा कि बजट में रक्षा अनुसंधान पर धन बढ़ाया है। यूपी में डिफेंस कॉरीडोर है। इसका लाभ प्रदेश को मिलेगा। प्रधानमंत्री कार्पोरेट सेक्टर को आगे ले जाना चाहते हैं। इस सेक्टर में टैक्स को कम किया है। ओवरआल अप्रत्यक्ष सरचार्ज कम होने से लाभ मिलेगा। इंपोर्ट ड़्यूटी बढ़ाया जाना भी अच्छा संकेत है। इससे बाहर से मंगाए जाने वाले माल की उपलब्धता कम हो सकेगी। इसका लाभ भी देश की इंडस्ट्रीज को मिलेगा।
पूर्व चेयरमैन एसके सिंह ने बताया कि टैक्स स्लैब बढ़ाने का इंतजार था। वह नहीं बढ़ा है, लेकिन कार्बो टर्मिनल बनाने की घोषणा से उद्यमियों को लाभ होगा। माल ढुलाई में समय कम लगेगा और लॉस भी कम होगा। इससे उद्यमी को ही लाभ होगा। इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए यह बजट बेहतर साबित होने वाला है। कई लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। कोरोना काल में कई मेंटल हेल्थ प्रोग्राम चले थे। कई डाक्टर भी इससे प्रभावित हुए थे। टेली मेंटल सर्विस की सुविधा देकर इस पर भी फोकस रखा गया है।
उद्यमी तनुज भसीन ने कहा कि लघु उद्योगों के लिए सरकार ने 2 लाख करोड़ की मदद करने की घोषणा की है। सरकार ने उद्यमियों की वर्किंग कैपिटल का 6 फीसद लोन कोविड फंड से दिया था। यह योजना पहले 31 मार्च 22 तक थी। अब इसे बढ़ाकर 23 मार्च कर दिया है। इससे कई लघु उद्यमी लाभ ले सकेंगे और अपने उद्यम को बढ़ा सकेंगे। अब देखना है कि एक बार लोन ले चुके उद्यमी इसमें सरकार शामिल करती है या नए उद्यमी शामिल होंगे। साथ ही कितना लोन ले सकेंगे। इसकी डिटेल आने पर पता चलेगा।
आईआईए के राष्ट्रीय महासचिव दिनेश गोयल ने कहा कि सरकार ने बजट में एग्जिट पालिसी लाकर उद्यमियों को बदनामी से बचाया है। कहा कि कोई उद्योग हानि में जाने पर भी बंद नहीं हो सकता था। सभी विभाग पहले अपना बकाया जमा करने को कहते हैं। कई औपचारिकताएं पूरी होने में कई वर्ष लग जाते थे। इससे हानि की रकम बढ़ती जाती थी। उद्यम भी बंद नहीं होता था और उद्यमी की भी बदनामी होती थी। अब सरकार ने कहा कि यदि कोई उद्यमी नुकसान होने पर उद्योग बंद होने की शर्तों को पूरा करता है तो उसे छह माह में बंद कर दिया जाएगा।
उद्यमी अल्पित अग्रवाल ने बताया कि बैट्रीचलित वाहनों के लिए चार्जिंग स्टेशन बनाने की पॉलिसी अभी तक नहीं थी। इस बजट में इसे शामिल किया गया है। बताते हैं कि गैस सिलेंडर की एजेंसी की तरह चार्जिंग स्टेशन बनाकर वाहनों को चार्ज किया जा सकेगा। ई व्हीकल्स की पालिसी आएगी। एनीमेशन गेमिंग में भी अरबों का कारोबार है। डिजिटल यूनिवर्सिटी खोलने से इस व्यापार में भी बूम आएगा। युवाओं को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा आईटीआर रिटर्न दाखिल करने में कोई चूक होने पर उसे सुधाराने का समय देना भी बेहतर है।
आईआईए चैप्टर के चेयरमैन नीरज गोयल बताते हैं कि कोई एडीशनल टैक्स नहीं लगाया है। ऐसे में बजट अच्छा है। प्रत्यक्ष तौर पर किसी को लाभ नहीं हुआ है। हर क्षेत्र में कॉमन मैन को लाभ दिए गए हैं। सभी को खुश करने की दूरगामी सोच बजट में रखी गई है। किसानों को लाभ देने की घोषणाएं हैं, लेकिन गंगा किनारे वाले किसान लाभान्वित होंगे। आर्गनिक खेती को बढ़ावा देना अच्छा कदम है। इससे जहरीले उर्वरकों पर निर्भरता कम होगी।
आईआईए पदाधिकारी राजीव आनंद बताते हैं कि सरकार को स्वास्थ्य बीमा पर ध्यान देना चाहिए था। इस पर 18 फीसद जीएसटी प्रीमियम को बढ़ा देती है। इस पर जीएसटी को कम करना चाहिए था। इस पर जीएसटी को पांच फीसदी करनी चाहिए थी, ताकि परिवार के सभी लोग मेडिक्लेम पालिसी ले सकें। इसकी लिमिट को भी 50 हजार करना चाहिए था। इंकम टैक्स के दायरे में इस छूट को शामिल करने से छोटे बड़े उद्यमी, सरकारी कर्मचारी सभी लाभान्वित होते, लेकिन ऐसा नहीं किया गया है।
आईआईए के पदाधिकारी सतीश अग्रवाल बताते हैं कि टूरिज्म इंडस्ट्री पर ध्यान नहीं दिया गया है। इससे होटल उद्योग पर बूम नहीं आएगा। कोविड काल में पर्यटन से जुड़े सेक्टर प्रभावित हुए थे। इसमें होटल इंडस्ट्री भी थी। बजट में उम्मीद थी कि कोई राहत मिलेगी, लेकिन नहीं मिली। इससे होटल उद्योग से जुड़े उद्यमियों को निराशा हाथ लगी है। सरकार ने प्रत्यक्ष रूप से किसी को कुछ नहीं दिया है। अब बजट का डिटेल आने के बाद हो सकता है कि राहत की कोई किरण नजर आए।
पूर्व चैप्टर चेयरमैन चन्द्र भूषण शील ने बताया कि बजट में वित्त मंत्री ने किसी को संतुष्ट करने का प्रयास नहीं किया है। सरकार किसी से डरी नहीं है। बजट स्थिर है। सरकार ने मान लिया है कि जनता महंगाई को स्वीकार कर चुकी है। इसीलिए महंगाई को कम करने के लिए वित्त मंत्री ने भी कुछ नहीं किया है। छोटे उद्योगों को सरकार ने लाभ दिया है। यह लाभ अभी दिखाई नहीं दे रहा है। इंकम टैक्स की स्लैब को बढ़ाना चाहिए था। कर्मचारी आस लगाए थे।
म्युचुअल फंड कार्पोरेट ट्रेनर पंकज श्रीवास्तव बताते हैं कि शेयरों की कमाई पर लगने वाला एलटीजीएस के स्लैब को कम कर दिया है। पहले यह 15 से 35 फीसद था, जिसे अब अधिकतम 15 फीसद कर दिया गया है। पहले मकान बेचने पर अलग टैक्स था और शेयर म्युचुअल फंड बेचने पर अलग। अब इस सीमा को अधिकतम 15 फीसद कर दिया गया। शेयर बाजार के लिए बजट बेहतर है। आटो और इंफ्रास्ट्रक्चर क्षेत्र के लिए बजट बूस्ट देने वाला है। मकान बनाने में रोजगार के साथ कई इंडस्ट्रीज भी शामिल होती हैं। इसी तरह आटो सेक्टर में भी एसेसरीज से जुड़े लोग लाभ पाएंगे।
आईआईए के कोषाध्यक्ष मयूर धीरवानी बजट को संतुलित बताते हैं। बताया कि किसी वर्ग पर कोई कर का बोझ नहीं है। उद्यमियों में खुशी है कि उन्हें कोई अतिरिक्त टैक्स नहीं देना पड़ रह है। कारपोरेट करदाता भी खुश है। कहते हैं कि उद्यमियों ने उम्मीद तो बहुत लगाई थी लेकिन खुशी है कि कोई टैक्स नहीं लगा है। कोविडकाल में सरकार को भी धन की जरूरत है। उसने कर नहीं लगाकर जनता को परेशानी में नहीं डाला है। सरकार की आय ही टैक्स से होती है। उसने किसी प्रकार का टैक्स नहीं लगाकर अपनी आय को ही कम किया है। यह भी प्रशंसनीय है।
