UP Election 2022: BJP को वृन्दावन सीट पर भगवा लहराने के लिए कड़ी चुनौती का करना पड़ेगा सामना

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Edited By Amrit Vichar
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मथुरा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास और सुशासन के दावे के साथ चुनावी रणक्षेत्र में उतरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिये मथुरा वृन्दावन सीट पर भगवा लहराने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। यूं तो इस विधानसभा क्षेत्र से 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है लेकिन असली टक्कर कांग्रेस …

मथुरा। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में विकास और सुशासन के दावे के साथ चुनावी रणक्षेत्र में उतरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लिये मथुरा वृन्दावन सीट पर भगवा लहराने के लिए कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।

यूं तो इस विधानसभा क्षेत्र से 15 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है लेकिन असली टक्कर कांग्रेस के प्रदीप माथुर, भाजपा के श्रीकांत शर्मा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एस के शर्मा और समाजवादी पार्टी (सपा) के देवेन्द्र अग्रवाल के बीच में है। क्योंकि देवेन्द्र अग्रवाल इस जिले के निवासी नही हैं इसलिए आज की तारीख में उनका स्थान त्रिकोणीय संघर्ष में भी नही आ रहा है तथा उन्हें काफी परिश्रम करना पड़ रहा है जबकि पूर्व के सपा/रालोद प्रत्याशी अशोक अग्रवाल दोनो चुनाव में सीधी चुनौती की स्थिति में रहे हैं।

पहली बार के चुनाव मे तो वे जीतते जीतते हार गए थे जबकि दूसरी बार पराजय का अन्तर कुछ बढ़ गया था। विधानसभा क्षेत्र में 4,58,405 मतदाता है जिनमें से 2,47,491 पुरूष एवं 2,10,816 महिलाएं है। इनमें से 5026 नये मतदाता है जो 18 वर्ष से कम आयु के हैं तथा 8411 मतदाता 80 वर्ष से अधिक आयु के है।

मतदाताओं का यह वर्गीकरण भाजपा प्रत्याशी श्रीकांत शर्मा के काम एवं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के इस क्षेत्र को संवारने का मूल्यांकन करेगा। योगी अपने पांच साल के कार्यकाल में 19 बार मथुरा आए। बीसवीं बार वे आज मथुरा में दो चुनाव सभाओं को संबोधित करने आये हैं।

योगी ने इस क्षेत्र को संवारने के लिए न केवल तीर्थस्थल की घोषणा की बल्कि वृन्दावन कुंभ, जन्माष्टमी, होली को नया कलेवर देने का प्रयास किया तो श्रीकांत ने बिजली की अनवरत आपूर्ति कर, जवाहरबाग को नया कलेवर दिलाकर, मीठे पानी की व्यवस्था, मल्टी स्टोरीड कार पार्किंग, वृन्दावन की कुंज गलियों को नया कलेवर देने, ओपेन एयर थियेटर जैसे कई कार्य कराये।

कहा जाता है कि 99 दोस्त पर एक दुश्मन भारी पड़ता है।मथुरा की यमुना प्रदूषण की समस्या उक्त कार्यों पर भारी पड़ सकती है। बन्दरों की समस्या, महंगाई, बेरोजगारी , चैबिया पाड़ा क्षेत्र के मकानों के फटने जैसी कई समस्या ऐसी है जो ब्रजवासियों के जनजीवन से सीधी जुड़ी हुई है तथा भाजपा जब विरोध में थी तो इन्ही को प्रमुख मुद्दा बनाती रही है।

पिछले पांच साल में केन्द्र और प्रदेश में भाजपा सरकारों के होने के बावजूद इस दिशा में कुछ न हुआ। नमामि गंगे योजना से यमुना प्रदूषण को जोड़ने का झुनझुना ब्रजवसियों को काफी समय तक पकड़ाया गया। नमामि गंगे परियोजना का प्रजेन्टेशन कर ब्रजवासियों को दम दिलासा दिलाई जाती रही पर यमुना मैली की मैली ही रह गई।

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