लखीमपुर-खीरी: भाजपा विधायक नहीं कर सके पांच साल में कोई ऐसा विकास कार्य जो जनता के बीच जा सकें
लखीमपुर-खीरी,अमृत विचार। पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की आठ सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा के विधायक पूरे पांच साल में अपने दम पर कोई ऐसे विकास कार्य नहीं करा सके, जिसको लेकर वह जनता के बीच जा सकें। सरकार की योजनाओं से लोगों को मिले लाभ को लेकर ही वह जनता के बीच जा …
लखीमपुर-खीरी,अमृत विचार। पिछले विधानसभा चुनाव में जिले की आठ सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा के विधायक पूरे पांच साल में अपने दम पर कोई ऐसे विकास कार्य नहीं करा सके, जिसको लेकर वह जनता के बीच जा सकें। सरकार की योजनाओं से लोगों को मिले लाभ को लेकर ही वह जनता के बीच जा रहे हैं और एक बार फिर योगी-मोदी के नाम पर अपनी नैया पार लगाने में जुटे हुए हैं।
हम बात करें वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनावों की तो उस वक्त समाजवादी पार्टी की प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। इस चुनाव से पूर्व वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में केंद्र में भाजपा की सरकार बनी थी। नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बन जाने के बाद तीन साल के कार्यकाल को देखकर देश में मोदी लहर चली थी।
मोदी लहर में हुए विधानसभा चुनाव में जनता ने भाजपा को प्रचंड मत से विजयी बनाया था। लखीमपुर-खीरी जिले की आठों विधानसभा में भी कमल खिला था। हालांकि चुनाव में विजयी होने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी विधायकों से यह अपील की थी कि वर्ष 2022 में जब चुनाव आए तो वह जनता के बीच जाकर अपने कराए गए कार्यों के आधार पर वोट मांगे।
उनका कहने का तात्पर्य यह था कि अपने-अपने क्षेत्रों में जनता के बीच जाकर अच्छा कार्य करें, जिससे खुद प्रत्याशी पर जनता का विश्वास बढ़े और अगले चुनाव में जनता प्रत्याशी को देखकर ही उसके पक्ष में मतदान करें, लेकिन धरातल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का यह मंत्र कारगर साबित नहीं हुआ।
चुनाव जीतने के बाद क्षेत्रीय विधायकों ने क्षेत्र में रूख तो दो-चार बार किया, लेकिन वह गांवों तक नहीं पहुंच सके। क्षेत्रीय लोगों के छोटे-मोटे मुद्दों को भी हल नहीं करा सके। विधायकों की अनदेखी की टीस आज भी क्षेत्रीय लोगों में है। जिले के मतदाताअों का कहना है कि विधायक अपनी-अपनी विधान सभा के स्थानीय मुद्दों और समस्याओं को पूरे पांच साल तक हल नहीं करा सके।
क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद थी कि भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने से विधायकों को क्षेत्रीय समस्याओं और स्थानीय मुद्दे हल हो सकेंगे, लेकिन पूरे पांच साल तक विधायकों ने क्षेत्र में जनता से जुड़े मुद्दों को निस्तारित कराने की दिशा में कोई कदम नहीं उठाए। अगर हम लखीमपुर विधानसभा की बात करें तो शहर की सबसे बड़ी समस्या रोडवेज बस स्टैंड है।
यह शहर के बीचोंबीच है। इससे अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है। योगी सरकार के गड्डामुक्त करने के वादे भी स्थानीय प्रशासन की लापरवाही के कारण धरातल पर नहीं उतर पाए। नगर पालिका की लापरवाही से शिवकालोनी, शिवपुरी, रामनगर आदि कई मोहल्लों को जल भराव से मुक्त नहीं मिली। शहर का रोडवेज बस अड्डा भी शहर से बाहर नहीं जा सका।
अतिक्रमण से भी लोगों को माननीय निजात नहीं दिला सके। निघासन विधानसभा नेपाल सीमा से जुड़ी है। नेपाल सीमा से जिला मुख्यालय की दूरी करीब डेढ़ सौ किलोमीटर है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए परिजन लखीमपुर ले जाते हैं। क्षेत्रीय लोगों की मांग पर निघासन में सिंगाही रोड पर पोस्टमार्टम हाउस बनकर तैयार हो गया, लेकिन पांच साल के कार्यकाल में भी यह पोस्टमार्टम हाउस अभी तक चालू नहीं हो सका है।
इसके अलावा बड़ा मुद्दा पचपेड़ी घाट पुल है। पुल न होने से लोग तीस किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर काटकर आते-जाते हैं। पलिया विधानसभा का अधिकतर इलाका दुधवा टाइगर रिजर्व से जुड़ा है। इसका एक बड़ा भूभाग शारदा नदी हर साल प्रभावित करती है। हजारों एकड़ जमीन और मकान शारदा कटान कर प्रतिवर्ष निगल लेती है।
क्षेत्रीय लोगों को उम्मीद थी कि प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद क्षेत्रीय विधायक बाढ़ कटान से निजात दिलाने के लिए कोई ठोस उपाय करेंगे, लेकिन ऐसा कुछ न होने से बाढ़ कटान पीड़ितों की इस उम्मीद पर भी पानी फिर गया। शारदा नदी श्रीनगर विधानसभा के एक हिस्से को पूरी तरह से प्रभावित करती है। प्रतिवर्ष इस क्षेत्र में शारदा नदी बड़े पैमाने पर तबाही मचाती है।
क्षेत्रीय लोग बाढ़ कटान रोकने के पुख्ता इंतजाम होने के कई सालों से उम्मीद लगाए थे, लेकिन उनकी उम्मीद को हर बार झटका लगा है। इस बार भी बाढ़ कटान रोकने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किए गए। पूरे गांव के गांव पानी में डूबे रहे। यही हाल मोहम्मदी, धौरहरा, कस्ता का भी है।
कुल मिलाकर वर्ष 2022 का चुनाव भी आ गया, फिर भी जिले की आठों विधानसभा में शायद ही कोई ऐसा विधायक हो जो अपने क्षेत्र में जाकर अपने कराए गए कार्यों या अपने दम पर चुनाव लड़ रहा हो। सभी केवल योगी-मोदी के नाम पर या सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं के सहारे ही अपनी चुनावी नैय्या पार लगाने के प्रयास में लगे हुए हैं।
अब यह तो आने वाला समय ही बताएंगा कि 2022 के चुनाव में ऊंट किस करवट बैठेगा और आगामी दस मार्च को किसके सिर पर जीत का सेहरा बंधेगा।
जिल की कुल जनसंख्या: 5018425
जिले में विधानसभाएं: 08
जिले में कुल पुरुष मतदाता: 1495089
जिले में कुल महिला मतदाता: 1307623
कुल अन्य मतदाता 123
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