बाराबंकी: रिंकू और रामजी बना रहे दरियाबाद में बहुकोणीय मुकाबले की तस्वीर

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बाराबंकी। जिले का दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र यूं तो फैजाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। लेकिन यहां की सियासत बाराबंकी से प्रभावित रही है। सरयू के किनारे बसे इस विधानसभा क्षेत्र की सियासत सरयू में उठ रही लहरों से भी ज्यादा तेज है। तराई क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण यहां जितनी ठंड रहती है उतना …

बाराबंकी। जिले का दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र यूं तो फैजाबाद संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है। लेकिन यहां की सियासत बाराबंकी से प्रभावित रही है। सरयू के किनारे बसे इस विधानसभा क्षेत्र की सियासत सरयू में उठ रही लहरों से भी ज्यादा तेज है। तराई क्षेत्र का हिस्सा होने के कारण यहां जितनी ठंड रहती है उतना ही यहां की राजनीति का इन दिनों मिजाज गर्म है।

कारण यह है कि राजा राजीव कुमार सिंह की मौत के बाद उनके बेटे रितेश कुमार सिंह उर्फ रिंकू ने उसी तरह निर्दल उम्मीदवार के रूप में नामांकन कर दिया है, जिस तरह 1985 में कांग्रेस से टिकट न मिलने पर उनके पिता राजीव कुमार सिंह निर्दल चुनाव लड़ा था। राजीव कुमार सिंह तो उस समय चुनाव जीत गए थे। लेकिन अब जबकि उनके बेटे निर्दल चुनाव लड़ने जा रहे हैं तो तस्वीर थोड़ी अलग है। वे अपने पिता की तरह कोई करिश्मा कर पाएंगे यह तो भविष्य ही तय करेगा।

यहां का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि किसान आंदोलन के बाद पहली बार किसानों का कोई राजनीतिक दल चुनाव लड़ने जा रहा है। राष्ट्रवादी किसान क्रांति दल ने यहां अपने प्रदेश अध्यक्ष राम जी तिवारी को उम्मीदवार बनाया है। अब वे किसानों को कितना एकजुट कर पाते हैं यह उनके राजनीतिक कौशल पर निर्भर करेगा। अरविंद सिंह गोप के बारे में कहा जाता है कि वे जहां भी गए पहले ही प्रयास में जीत दर्ज की। पहला चुनाव उन्होंने हैदर गढ़ से जीता था। जब पार्टी ने उन्हें रामनगर भेजा तो वहां से भी वे चुनाव जीते।इस बार वे दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र से सपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं ।

कांग्रेस ने स्व बेनी प्रसाद वर्मा के भाई की बहू को चुनाव मैदान में उतार कर राजनीतिक हलके में हलचल पैदा कर दी है। यह क्षेत्र बेनी प्रसाद वर्मा के प्रभाव वाला क्षेत्र रहा है। उनके बेटे राकेश वर्मा कुर्सी विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में बेनी प्रसाद वर्मा के प्रभाव का फायदा उनकी बहू को मिलता है या फिर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार अरविंद सिंह गोप को । यह तो वक्त बताएगा लेकिन इस पर चर्चा जरूर शुरू हो गई है। हालांकि गोप के समर्थक उनकी जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त दिख रहे हैं। लेकिन चुनौतियां बड़ी हैं। उनका मुकाबला भाजपा के उम्मीदवार सतीश शर्मा और बसपा के उम्मीदवार से जग प्रसाद रावत से भी है।

घाघरा की बाढ़ और कटान यहां बड़ी समस्या है। लेकिन इस क्षेत्र की रेत सोना उगलती है। यह क्षेत्र बेहद उपजाऊ माना जाता है। राजा राजीव कुमार सिंह यहां से 26 साल तक विधायक रहे। 2017 के मोदी लहर में वह भाजपा के युवा प्रत्याशी सतीश चंद शर्मा से चुनाव हार गए थे। 1980 में इस विधानसभा सीट पर कृष्ण मंगल सिंह ने कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज की थी. 1985 में राजा राजीव कुमार सिंह निर्दलीय प्रत्याशी के रूप जीते थे।

1989 में वे यहीं से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीते। 1991 और 1993 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। दोनों बार राधेश्याम ने जीत दर्ज की. 1993 में राधेश्याम समाजवादी पार्टी से विधायक बने थे। 1996 में राजीव कुमार सिंह भाजपा के टिकट पर चुनाव जीते। 2002 में भी उन्होंने भाजपा से ही चुनाव जीता । 2007 और 2012में उन्होंने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज की। 2017 में मोदी लहर के दौरान भाजपा के उम्मीदवार सतीश चंद शर्मा ने उन्हें 50686 मतों से पराजित किया।

जातीय समीकरण

इस विधानसभा क्षेत्र में ब्राह्मण मुस्लिम और छत्रिय मतदाताओं के साथ-साथ पिछड़ी जाति के मतदाताओं का भी प्रभुत्व है। दलित मतदाता यहां निर्णायक भूमिका अदा करते हैं। यहां सपा ने क्षत्रिय, भाजपा ने ब्राम्हण, कांग्रेस ने पिछड़ी जाति और बसपा ने दलित उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है। राष्ट्रवादी किसान क्रांति दल का ब्राम्हण और निर्दल छत्रीय उम्मीदवार भी कड़ी टक्कर देंगे। ऐसे में जीत हार इस पर निर्भर करेगा कि कौन सजातीय मतदाताओं का ध्रुवीकरण करा कर दूसरे खेमे में कितनी सेंध लगा सकता है।

फैसला इनके हाथ

कुल मतदाता – 410877

पुरुष मतदाता – 216221

महिला मतदाता – 194647

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