लखीमपुर-खीरी: मतदाताओं का रूख साफ न होने से प्रत्याशियों की धड़कन तेज
लखीमपुर-खीरी, अमृतविचार। विधानसभा चुनाव में ज्यों ज्यों मतदान की तारीख नजदीक आ रही है। प्रत्याशियों के दिलों की धड़कनें बढ़ रही हैं। जिले की आठों सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा कब्जा बरकरार रखने के लिए जहां पसीना बहाती दिख रही है। वहीं सपा खोई हुई सीटों को वापस पाने के लिए एड़ी से चोटी …
लखीमपुर-खीरी, अमृतविचार। विधानसभा चुनाव में ज्यों ज्यों मतदान की तारीख नजदीक आ रही है। प्रत्याशियों के दिलों की धड़कनें बढ़ रही हैं। जिले की आठों सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा कब्जा बरकरार रखने के लिए जहां पसीना बहाती दिख रही है। वहीं सपा खोई हुई सीटों को वापस पाने के लिए एड़ी से चोटी का जोर लगा रही है।
इन सबके बीच मतदाताओं का रुख अभी तक साफ नहीं है। इससे प्रत्याशियों की धड़कने तेज हो गई हैं। जिले में लखीमपुर सदर सहित आठ विधानसभा क्षेत्र हैं। इन आठों सीटों पर 23 फरवरी को मतदान होगा। जिले के 2802835 लाख मतदाता 3172 मतदान केंद्रों पर मतदान कर प्रत्याशी के भाग्य को ईवीएम में कैद करेंगे।
किस सीट से कौन विधायक होगा। यह तो 10 मार्च को आने वाले नतीजे बताएंगे, लेकिन इस बार जिले की आठों विधानसभा सीट पर कब्जा बरकरार रखना भाजपा के लिए आसान नहीं दिख रहा है। अभी तक जो समीकरण उभर के सामने आए हैं। उससे जिले में भाजपा और सपा के बीच सीधी लड़ाई दिख रही है। इसके बाद कांग्रेस व बसपा है।
वर्ष 2012 के चुनाव में जिले की चार सीटों लखीमपुर सदर, मितौली, गोला और धौरहरा सीट पर सपा का कब्जा था। निघासन सीट भाजपा के कब्जे में थी। पलिया सहित तीन सीटों पर बसपा के विधायक थे। मोदी लहर के बीच वर्ष 2017 के हुए चुनावों में सपा व बसपा जिले से साफ हो गई थी। सभी आठों सीटे भाजपा की झोली में आ गईं थीं।
इस विधानसभा चुनाव में सपा खोई हुई सीटों को वापस लाने और अन्य सीटों पर भी अपने प्रत्याशी जिताने के लिए सारे दांवपेंच लगा रही है। वहीं भाजपा ने सिटिंग विधायकों पर दांव लगाया है। मतदाताओं की बात करें तो किसान सम्मान निधि, महीने में दो बार निःशुल्क राशन वितरण को मतदाता सरकार की अच्छी पहल मानते हैं।
इसके साथ ही अधिकतर लोगों में पांच साल से मुसीबत बने आवारा पशुओं को लेकर भाजपा सरकार से नाराजगी है। साथ ही चुने गए विधायकों के कामों से वह अधिक संतुष्ट नहीं दिख रहे हैं। इससे कहीं न कहीं इस बार आठों सीटों पर भाजपा की वापसी कर पाना भाजपा के लिए मुश्किल भरा होगा।
आवारा पशुओं और गन्ना भुगतान, एमएसपी पर गारंटी आदि को लेकर जनता के बीच पहुची सपा पर इन मुद्दों के साथ स्थानीय मुद्दों को लेकर हावी है। यह मुद्दे कितना असर डाल पाएंगे यह तो 10 मार्च को ही पता चल सकेगा, लेकिन इतना तो तय है कि भाजपा के लिए आठो सीटों पर कब्जा बरकरार रखना और सपा को खोई हुई सीटों को दोबारा पाना इस बार के चुनाव में आसान नहीं दिख रहा है।
हाथी ने बिगाड़ी चाल लड़ाई हुई त्रिकोणीय
लखीमपुर सदर सीट पर बहुजन समाजवादी पार्टी ने शहर के प्रमुख ट्रांसपोर्टर मोहन बाजपेयी को मैदान में उतारा है। इस सीट पर दो कुर्मी प्रत्याशी भाजपा से विधायक योगेश वर्मा, सपा से पूर्व सपा विधायक उत्कर्ष वर्मा चुनाव मैदान है। मोहन वाजपेयी के चुनाव मैदान में उतरने से भाजपा और सपा के समीकरण बिगड़ गए हैं। राजनीति के जानकार बताते हैं कि सदर सीट पर कुर्मी बिरादरी निर्णायक वोट है। दो प्रत्याशियों के कुर्मी बिरादरी का होने से वोटों का ध्रुवीकरण होगा। मोहन वाजपेयी की दलित वोटों पर भी अच्छी पकड़ है। ब्राह्मण वोटों पर भी सेंध लगेगी। सदर सीट पर जातीय समीकरण गड़बड़ाने से चुनाव काफी रोचक होने की प्रबल सम्भावन है।
फैक्ट फाइल
जिले में कुल मतदाता 2802835
पुरुष मतदाता 1495089
महिला मतदाता 1307623
अन्य 123
जिले की विधान सभा क्षेत्रों पर एक नजर
विधानसभा का नाम कुल मतदाता पुरुष मतदाता महिला मतदाता अन्य
लखीमपुर सदर 410473 218038 192426 09
निघासन 339473 183406 156056 11
धौरहरा 331871 179133 152720 18
पलिया 360124 190640 169460 24
कस्ता 309332 164772 144543 17
मोहम्मदी 337664 180781 156869 14
श्रीनगर 318465 170138 148323 04
गोला 395433 208181 187226 26
