तस्वीर साफ: अयोध्या की पांच सीटों पर 46 प्रत्याशी होगें आमने-सामने, एक उम्मीदवार ने लिया नाम वापस
अयोध्या। विधानसभा चुनाव के अन्तर्गत शुक्रवार को नाम वापसी के बाद अयोध्या जिले की पांचों विधानसभा सीटों की तस्वीर साफ हो गई। अब पांच सीटों पर कुल 46 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं। शुक्रवार को नाम वापसी के दिन बीकापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दल नामांकन करने वाले अनूप सिंह के अलावा अन्य किसी विधानसभा क्षेत्र से …
अयोध्या। विधानसभा चुनाव के अन्तर्गत शुक्रवार को नाम वापसी के बाद अयोध्या जिले की पांचों विधानसभा सीटों की तस्वीर साफ हो गई। अब पांच सीटों पर कुल 46 प्रत्याशी मैदान में बचे हैं। शुक्रवार को नाम वापसी के दिन बीकापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दल नामांकन करने वाले अनूप सिंह के अलावा अन्य किसी विधानसभा क्षेत्र से किसी भी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया है। विधानसभा चुनाव को लेकर प्रत्याशियों की तस्वीर साफ होने के बाद अब चुनावी पारा भी चढ़ गया है। चुनावी संग्राम में डटे उम्मीदवारों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।
पांचों विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 11 प्रत्याशी बीकापुर विधानसभा क्षेत्र में हैं। सबसे कम उम्मीदवारों वाली सीट मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र है। जहां कुल सात उम्मीदवार सुरक्षित सीट पर अपनी किस्मत आजमागें। अयोध्या और रूदौली विधानसभा क्षेत्र में दस – दस प्रत्याशी मैदान में हैं। गोसाईंगंज विधानसभा क्षेत्र के रण में आठ उम्मीदवार ताल ठोंक रहे हैं। पांचवे चरण के मतदान में 27 फरवरी को प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में लाक हो जाएगी। शनिवार को कलेक्ट्रेट सभागार में जिला निर्वाचन अधिकारी/ जिलाधिकारी नितीश कुमार प्रत्याशियों के साथ बैठक कर उन्हें आदर्श आचार संहिता के बारे में बतायेंगे।
सपा के बागी रहे अनूप ने पर्चा लिया वापस
नाम वापसी के दिन जिले की पांचों विधानसभा सीटों से केवल बीकापुर विधानसभा क्षेत्र से निर्दल राघवेंद्र प्रताप सिंह अनूप ने अपना नाम वापस लिया है। मालूम हो कि बीकापुर विधानसभा सीट से अनूप सिंह सपा से टिकट के प्रबल दावेदार थे। इस सीट पर पार्टी ने पहले आनंद सेन यादव फिर बलराम मौर्य और अंत में फिरोज खान गब्बर को प्रत्याशी घोषित किया है। अनूप सिंह को उम्मीद थी कि बीकापुर सीट से आनंद सेन यादव के बजाय पार्टी उन्हें ही टिकट देगी। टिकट न मिलने पर बगावत कर उन्होंने नामांकन के आखिर दिन निर्दल प्रत्याशी के रूप में पर्चा भर दिया था। समझा जाता है कि मान-मनौव्वल और पार्टी नेतृत्व से वार्ता के बाद उन्होंने नामांकन वापस ले लिया।
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