UP Election 2022 : राजनीतिक विरासत संभालने को दूसरी पीढ़ी मैदान में

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आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। राजनीति को जनसेवा का सबसे बड़ा मंच मानने वाले सियासी पीढ़ी अपनी विरासत बचाने के लिए मैदान में हैं। किसी की तीसरी पीढ़ी मैदान में है तो कोई दूसरी वार लखनऊ जाने की उम्मीद में हैं। भाजपा और सपा के तीन चेहरे जनता की अदालत में है। तीन विधायक अपनी राजनीतिक थाती …

आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। राजनीति को जनसेवा का सबसे बड़ा मंच मानने वाले सियासी पीढ़ी अपनी विरासत बचाने के लिए मैदान में हैं। किसी की तीसरी पीढ़ी मैदान में है तो कोई दूसरी वार लखनऊ जाने की उम्मीद में हैं। भाजपा और सपा के तीन चेहरे जनता की अदालत में है। तीन विधायक अपनी राजनीतिक थाती बचाने की जंग लड़ रहे हैं।

14 फरवरी को दूसरे चरण में यहां मतदान होना है। जिले की छह सीटों पर दलीय-निर्दलीय सहित 66 उम्मीदवार मैदान में हैं। बिजनौर के बढ़ापुर विधान सभा सीट पर विधायक सुशांत कुमार सिंह दूसरी बार मैदान में हैं। वर्ष 2017 के चुनाव में ऐन वक्त पर भाजपा ने सुशांत को वहां से मैदान में उतारा, जबकि उन्होंने अपनी परंपरागत सीट ठाकुरद्वारा से टिकट की दावेदारी की थी। सुशांत के पिता सर्वेश कुमार सिंह इस सीट पर पांच बार विधायक चुने गए। वर्ष 1991 में उन्हें भाजपा के सिबंल पर जीत मिली थी, जबकि सर्वेश सिंह के पिता रामपाल सिंह इस क्षेत्र से लगातार विधायक रहे। साल 2014 में सर्वेश सिंह मुरादाबाद के सांसद चुन लिए गए।

कांठ क्षेत्र से भाजपा विधायक राजेश कुमार सिंह मैदान में हैं। साल 1996 में राजेश पहली बार एमएलए चुने गए थे। इनके पिता पहले कांठ से विधायक रहे। लगातार हार के बाद राजेश साल 2017 में चुने गए। इस बार चुनावी मैदान में घिरे हैं। यहां सपा उम्मीदवार कमाल अख्तर के मैदान में उतरने से राजेश की सांस अटक गई है। कमाल सपा सरकार से मंत्री रहे और अमरोहा के जिले के बड़े खेतिहर और सपा के प्रभावशाली चेहरों में एक हैं।

बिलारी के विधायक मो. फहीम सपा उम्मीदवार के रूप में हैट्रिक लगाने की फिराक में हैं। फहीम के पिता इरफान नए परिसीमन के बाद साल 2012 में बिलारी के पहले विधायक चुने गए। सड़क हादसे में उनके निधन के बाद बेटे फहीम सहानुभूति में साल 2016 का चुनाव जीते। साल 2017 में दूसरी बार चुनाव जीतने वाले फहीम इस बार फिर मैदान में हैं। उन्हें उम्मीदवार परमेश्वर लाल सैनी से जूझ रह हैं।

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