रामपुर की शहर सीट पर हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में जिले की पांचों सीटों पर कांटे की टक्कर है। न विकास का मुद्दा उठाया गया न बिजली-पानी और सड़क की बात की। पूरे चुनाव प्रचार भर जाति-धर्म के वोट कैसे हासिल होंगे, ऐसी सियासत चलती रही, 14 फरवरी को होने वाले मतदान में जिले की सबसे अहम सीट रामपुर …
अखिलेश शर्मा/अमृत विचार। विधानसभा चुनाव में जिले की पांचों सीटों पर कांटे की टक्कर है। न विकास का मुद्दा उठाया गया न बिजली-पानी और सड़क की बात की। पूरे चुनाव प्रचार भर जाति-धर्म के वोट कैसे हासिल होंगे, ऐसी सियासत चलती रही, 14 फरवरी को होने वाले मतदान में जिले की सबसे अहम सीट रामपुर शहर में हिंदू-मुस्लिम वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना बन रही है वहीं स्वार-टांडा सीट पर सपा के अब्दुल्ला आजम और अपना दल के हमजा मियां के बीच कड़ा संघर्ष दिखाई दे रहा है।
रामपुर शहर सीट से सपा के कद्दावर नेता आजम खां मैदान में हैं। सबसे खास बात यह है कि 87 मामलों में करीब दो साल पहले जेल गए आजम खां सीतापुर जेल में रहते हुए चुनाव लड़ रहे हैं। पहला ऐसा विधानसभा चुनाव है जिसमें आजम खां मौजूद नहीं हैं, उनके बेटे अब्दुल्ला आजम जोकि 15 जनवरी को ही सीतापुर जेल से जमानत पर आए हैं अपने पिता का चुनाव संभाल रहे हैं। साथ ही खुद स्वार सीट से प्रत्याशी होने के कारण वहां भी मतदाताओं को साध रहे हैं। आजम खां के सामने गैर मौजूदगी चुनौती है तो दूसरी चुनौती इस बार नवाब परिवार के कद्दावर नेता नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां को कांग्रेस ने मैदान में उतारा है।
हमेशा आजम खां मुस्लिम फैक्टर से ही जीतते आए हैं, लेकिन इस बार मुकाबले में बड़ा मुस्लिम चेहरा होना सवाल खड़े कर रहा है, हालांकि लोग कह रहे हैं कि नौ बार लगातार विधायक रह चुके आजम खां के लिए मुश्किल नहीं है। इन दोनों की लड़ाई में भारतीय जनता पार्टी से प्रत्याशी आकाश सक्सेना को पूरा फायदा मिल रहा है। एक तरफ हिंदू वोटों के ध्रुवीकरण की पूरी उम्मीद जताई जा रही है, वहीं दूसरी तरफ मुस्लिम वोटों का भी ध्रुवीकरण होता है तो समीकरण बन बिगड़ भी सकते हैं और कुछ चमत्कार भी हो सकता है। लिहाजा रामपुर सीट पर त्रिकोणीय संघर्ष माना जा रहा है।
बिलासपुर में त्रिकोणीय संघर्ष
बिलासपुर क्षेत्र में त्रिकोणीय संघर्ष हो रहा है। भाजपा से बलदेव औलख राज्यमंत्री मैदान में हैं, तो सपा से सरदार अमरजीत सिंह ताल ठोंके हुए हैं। कांग्रेस ने संजय कपूर को मैदान में उतारा है। संजय कपूर कांग्रेस से स्वच्छ छवि के नेता माने जाते हैं और दो बार विधायक भी रह चुके हैं। इस सीट पर कोई भी मुस्लिम प्रत्याशी मैदान में नहीं हैं। अब मुस्लिम वोट कहां जाएगा ? यह बड़ा सवाल है। आमतौर पर कहा यही जाता है कि मुस्लिम वोट सपा को जाएगा। लेकिन यह भी एक सवाल है कि जो मुस्लिम वोट जो प्रत्याशी भाजपा पर भारी पड़ेगा उसकी ओर भी रुख कर सकता है, ऐसे में संजय कपूर भी इसका फायदा उठा सकते हैं। इसी वजह से यहां त्रिकोणीय संघर्ष है।
चमरौआ-मिलक और शाहबाद में भी भाजपा को मिल सकता है फायदा
चमरौआ सीट पर सभी बड़े दलों से मुस्लिम प्रत्याशी हैं। सपा से नसीर खां, बसपा से मुस्तफा हुसैन, कांग्रेस से यूसुफ अली हैं, तो भाजपा से मोहनकुमार लोधी हैं। माना जा रहा है कि मुस्लिम बाहुल्य सीट पर भाजपा को इसका फायदा मिल सकता है। ठीक इसी तरह से मिलक सुरक्षित सीट पर भी भाजपा के मुकाबले सपा के विजय सिंह और कांग्रेस के कुमार एकलव्य वाल्मीकि मैदान में हैं। एकलव्य युवा हैं, वाल्मीकि समाज से हैं। बसपा से सुरेंद्र सागर हैं। इस तरह कहीं न कहीं भाजपा से ही सभी अपनी लड़ाई मान रहे हैं।
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