मथुरा: दुर्दशा का शिकार बना पौराणिक प्रह्लाद कुंड, आंख मूंदे बैठे हैं जिम्मेदार

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मथुरा। मथुरा के फालैन में मौजूद पौराणिक प्रह्लाद कुंड दुर्दशा का शिकार है। ये कुंड अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। यहां पर होली में प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाता है। कहते हैं जिस प्रकार से माता होलिका अपने भतीजे भक्त प्रह्लाद को लेकर होलिका में बैठ गई थीं और प्रह्लाद उस जलती …

मथुरा। मथुरा के फालैन में मौजूद पौराणिक प्रह्लाद कुंड दुर्दशा का शिकार है। ये कुंड अपनी बदहाली के आंसू रो रहा है। यहां पर होली में प्राचीन परंपरा का निर्वहन किया जाता है। कहते हैं जिस प्रकार से माता होलिका अपने भतीजे भक्त प्रह्लाद को लेकर होलिका में बैठ गई थीं और प्रह्लाद उस जलती चिता से निकल आए थे वैसे ही यहां पर इस परंपरा को आज भी जीवित किया जाता है।

यहां पर भक्त प्रहलाद के रूप में पंडा जलती हुई चिता से निकल कर बाहर आता है और उस कालखंड को फिर से जीवित करता है। इस कुंड को सुधारने का प्रशासन को ध्यान नहीं है। प्रशासन की अनदेखी से दुखी होकर अब ग्रामीणों ने खुद ही कुंड को सुधारने का बीड़ा उठाया है। ग्रामीण अब खुद ही इस कुंड की सफाई कर रहे हैं। बता दें कि ये कुंड करीब पांच हजार साल पुराना है और महाभारत कालीन है। गौरतलब है कि इस कुंड की देखभाल की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग की है, जो जिम्मेदारी से आंखें मूंदे हुए है।

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