अमृत विचार अभियान : उफ! डीएम-एसएसपी वाले वार्ड का इतना बुरा हाल
मुरादाबाद,अमृत विचार। नाम बड़े और दर्शन छोटे, यह लाइनें नगर निगम के वार्ड नंबर दो आदर्श कॉलोनी पर सटीक हैं। इस वार्ड की सीमा में जिले के बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी रहते हैं फिर भी जनता बेचारी है। उसे बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हैं। वार्ड में न स्वच्छ भारत का जोर है और …
मुरादाबाद,अमृत विचार। नाम बड़े और दर्शन छोटे, यह लाइनें नगर निगम के वार्ड नंबर दो आदर्श कॉलोनी पर सटीक हैं। इस वार्ड की सीमा में जिले के बड़े प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी रहते हैं फिर भी जनता बेचारी है। उसे बुनियादी सुविधाएं भी मयस्सर नहीं हैं। वार्ड में न स्वच्छ भारत का जोर है और न चमकती सड़कों का सुखद अहसास। केवल नाम का आदर्श है।
20 हजार की आबादी वाले आदर्श कॉलोनी के लोगों का खुद पर इतराना लाजिमी है, क्योंकि जिस वार्ड में जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, मुख्य विकास अधिकारी, एसपी सिटी बसे हों गौरव की अनुभूति स्वाभाविक है। मगर विडंबना कि यहां के लोग बुनियादी सुविधाओं को तरस रहे हैं। स्मार्ट सिटी के इस वार्ड में कागज में 28 सफाई कर्मी हैं फिर भी स्वच्छता मिशन ठेंगे पर है। कांग्रेस पार्षद की लाचारी यह कि निगम के बोर्ड में कमल का बहुमत है।
सफाई और गंदे पानी की निकासी का इंतजाम नहीं
वार्ड में कागज में 28 सफाई कर्मचारी हैं, फिर भी यहां न तो सफाई है और न जल निकासी का इंतजाम। लोगों का दर्द है कि किसे अपनी व्यथा सुनाएं। पार्षद लोगों के बीच में तो रहते हैं, लेकिन कोई ऐसा बड़ा काम वह करीब चार साल में नहीं करा पाए जिसे खुद के गुडवर्क के रूप में गिना सकें।
सीवर लाइन का काम अधर में
कॉलोनी में सीवर लाइन नहीं है। काम शुरू हुआ लेकिन अधर में लटका है। नालियों के चैंबर सीवर पाइप लाइन डालने के कार्य में नीचे दबा तो पार्षद की भी आपत्ति हुई। काम ठप कर कार्यदायी संस्था के लोग चलते बने। अब इसके फिर शुरू होने की आस में नागरिक और पार्षद दोनों हैं। कूड़ा उठान के लिए चार कंपनियां हैं फिर भी यहां डोर टू डोर कूड़ा उठान नहीं। अनाधिकृत कूड़ा डंपिंग जोन वार्ड में नारकीय जीवन का अहसास दिलाता है।
पहले नगर पंचायत में था वार्ड
नगर निगम के दायरे में आने से पहले यह वार्ड नगर पंचायत का हिस्सा था। परिसीमन के बाद निगम का हिस्सा बना, इसकी पहचान वार्ड नंबर दो आदर्श कॉलोनी हो गई।
वार्ड में है शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
वार्ड में फकीरपुरा शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र है। गंभीर रोगों की तो नहीं लेकिन सामान्य चिकित्सा सेवा चिकित्साधिकारी के भरोसे मिलता है। कोविड टीकाकरण, मरहम पट्टी, गर्भवतियों व नवजातों के टीकाकरण के लिए भटकना नहीं पड़ता है।
पार्षद को सालता है सीवर लाइन न होने का दंश
वार्ड के पार्षद शिवराज सिंह गुर्जर कांग्रेस के झंडा बरदार हैं। तीन बार से कुर्सी उनके परिवार में है। दो बार वह खुद और बीच में उनकी पत्नी को जनता का आशीष था। पार्षद कहते हैं कि वह कांग्रेसी हैं और निगम के बोर्ड में भाजपा का बहुमत। विकास कार्य के प्रस्ताव में राजनीतिक अड़ंगेजाबी झेलनी पड़ती है। अपने बूते सड़क, नाली, सफाई का इंतजाम कराते हैं। सफाई ठीकठाक है मगर डोर टू डोर कूड़ा उठान न होने का दर्द है। बड़े नाले से असुविधा के सवाल पर कहते हैं कि बस्ती में नाला नहीं बनाना चाहिए था। इसे पाटने से नगर निगम का इंकार है। इसके मैनहोल में 23वीं वाहिनी पीएसी और अन्य इलाके की गंदगी और पानी आता है।
सफाई कर्मचारी नियमित नहीं आते हैं। वार्ड में कई सड़क जर्जर और नाली टूटी है। न तो पार्षद ध्यान देते हैं न नगर निगम के अधिकारी कभी हाल लेते हैं। बरसात में इस वार्ड में स्थिति और नारकीय हो जाती है। -दुर्योधन, वार्ड निवासी
नाला पटना चाहिए, बच्चे और जानवर गिरकर इसमें जख्मी हो जाते हैं। मोहल्ले में सफाई कर्मचारी नियमित नहीं आते। वार्ड में महीने दो महीने में सफाई कर्मी का दर्शन होता है। कई बार वह सफाई के नाम पर पैसे मांगते हैं। -पंडित सुरेश चंद्र शर्मा, वार्ड निवासी
गंदगी वार्ड की पहचान बनी अनाधिकृत कूड़ा डंपिग प्वाइंट से गंदगी वार्ड की पहचान बन गई है। कॉलोनी के मोड़ पर सोनकपुर, हिमगिर कॉलोनी के अलावा आवासीय कॉलोनी के सारे घरों का कूड़ा डाला जाता है। मना करने पर झगड़ने को उतारू हो जाते हैं। नगर निगम ने कूड़ा डालना अपराध का बोर्ड लगाया था उसे भी किसी ने उखाड़ फेंका।-शेखर बिजली मिस्त्री, वार्ड निवासी
मोहल्ले में सफाई व्यवस्था बदहाल है। हफ्ते 15 दिन में सफाई कर्मचारियों का दर्शन होता है। न तो अधिकारी सुनते हैं न जन प्रतिनिधि। जनता की नियति केवल असुविधाओं के बीच जिंदगी गुजारना है। वार्ड में खूंखार कुत्तों के चलते लोग असुरक्षित हैं।-सुरेश वर्मा, आदर्श कालोनी
मोहल्ले में गंदगी व सफाई से अधिक बड़ा खुला नाला प्रमुख समस्या है। इस खुले नाले में मेरी सास भी गिरकर चोटिल हो चुकी हैं। कई बार जानवर भी जख्मी हो चुके हैं। नाले की सफाई तो होती नहीं, इसे बंद होना चाहिए। -संगीता देवी, वार्ड निवासी
