लखनऊ: एसजीपीजीआई में अव्यवस्था का आलम, मरीज देखने की संख्या अब भी सीमित, 200 पेशेंट बिना इलाज लौटे
लखनऊ। संजय गांधी स्नात्कोत्तर आर्युविज्ञान संस्थान में कोविड जांच की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है, बावजूद इसके ओपीडी में अभी भी सीमित संख्या में मरीज देखे जा रहे हैं। सोमवार को करीब 200 मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित थे वह बिना इलाज ही अस्पताल से वापस लौट गए। संख्या सीमित होने के कारण …
लखनऊ। संजय गांधी स्नात्कोत्तर आर्युविज्ञान संस्थान में कोविड जांच की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया गया है, बावजूद इसके ओपीडी में अभी भी सीमित संख्या में मरीज देखे जा रहे हैं। सोमवार को करीब 200 मरीज गंभीर बीमारी से ग्रसित थे वह बिना इलाज ही अस्पताल से वापस लौट गए। संख्या सीमित होने के कारण डॉक्टर उन्हें नहीं देख रहे हैं वह उतने ही मरीज देखते हैं जितने ऑनलाइन पंजीकरण से आते हैं ऐसे में इमरजेंसी में या ऑफलाइन पंजीकरण में आने वाले मरीजों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
ओपीडी में चक्कर काटने के बाद लौट गए मरीज
नये व पुराने करीब 200 मरीज जो बिना तारीख व ऑनलाइन पंजीकरण के आए थे, कर्मचारियों ने कहा कि ओपीडी में डॉक्टर से लिखवाकर लाओ तब पंजीकरण करेंगे। मरीज व उनके तीमारदार गेस्ट्रो, न्यूरो, इंडो व यूरो समेत दूसरे विभाग के चक्कर काटते रहे। कोई उम्मीद न दिखने पर बिना इलाज चले गए।
ओपीडी के कर्मचारियों को नहीं आ रही मरीजों पर दया
आलमबाग निवासी मुकेश यादव को ब्रेन स्ट्रोक हुआ था। निजी अस्पताल से रेफर करने पर सोमवार को एसपीजीआई पहुंचे। रजिस्ट्रेशन नहीं किया गया वहीं ओपीडी में मौजूद कर्मचारियों ने भी उनकी एक नहीं सुनी। उनसे कहा गया कि मरीजों का स्लॉट भर गया है। अगले दिन आना। मरीज के तीमारदार उनके आगे गिड़गिड़ाते रहे लेकिन उन्होंने एक न सुनी।
कोरोना जांच की अनिवार्यता हटा दी गई है उसके बाद नए निमय लागू किए गए हैं जो सिस्टम से आएगा उसका ही इलाज किया जाएगा। ऑफलाइन पंजीकरण वाले अभी मरीज नहीं देखे जा रहे हैं जो ऑनलाइन के माध्यम से आएंगे उन्हें ही देखा जाएगा।
कुसुम यादव, प्रवक्ता, SGPGI.
यह भी पढ़ें: लखनऊ: राजधानी में लगातार घट रहे कोरोना के मरीज, 24 घंटे में मिले मात्र 86 संक्रमित
