मुरादाबाद : औरंगजेब बोले- हालात सुधरने का इंतजार, वापस जाएंगे यूक्रेन

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मुरादाबाद/अमृत विचार। यूक्रेन-रूस जंग के बीच घर लौटे मेडिकल छात्रों को जल्द वहां हालात सुधरने की उम्मीद है। जबकि, विदेश में फंसे बाकी छात्र-छात्राओं के घरवालों को नींद नहीं आ रही है। मंगलवार को दोपहर बाद एक भारतीय युवा के जान गंवाने की घटना ने अनिगनत भारतीयों को गमगीन कर दिया। यानी, यूक्रेन के जंग …

मुरादाबाद/अमृत विचार। यूक्रेन-रूस जंग के बीच घर लौटे मेडिकल छात्रों को जल्द वहां हालात सुधरने की उम्मीद है। जबकि, विदेश में फंसे बाकी छात्र-छात्राओं के घरवालों को नींद नहीं आ रही है। मंगलवार को दोपहर बाद एक भारतीय युवा के जान गंवाने की घटना ने अनिगनत भारतीयों को गमगीन कर दिया। यानी, यूक्रेन के जंग ने तमाम लोगों की धुकधुकी बढ़ा दी है। उधर, मुश्किलों के बीच घर लौटे युवाओं की आगामी योजना भी सभी को उत्साहित करने वाली है।

जिले के 41 छात्र-छात्राओं की सूची लेकर विदेश मंत्रालय से संपर्क करने वाले प्रशासनिक अधिकारी पांच छात्रों के ब्योरे को लेकर परेशान हैं। कुल 41 सदस्य यूक्रेन गए हैं, जिसमें आठ की वापसी हो गयी है। पांच की पड़ताल नहीं हो पाई है। जबकि देर रात पंडित नगला के साकिब के साथ घर (करूला, नजदीक अखबार फैक्टी) आए औरंगजेब के घर वाले प्रसन्न हैं। रिश्तेदारों के तड़के से मिलने आने का क्रम जारी है। जबकि कांठ रोड निवासी अरहम से मोबाइल पर घर की खुशी साझा करने में औरंगजेब का चेहरा देखते बन रहा था।

अमृत विचार की टीम से यात्रा का विवरण साझा करते समय औरंगजेब केंद्र सरकार के प्रयास की चर्चा करते रहे। बोले, एंबेसी (दूतावास) की संजीदगी और दिल्ली से घर आने में जिला प्रशासन की तैयारी शानदार रही। उधर, सरकार के प्रयास के मुद्दे पर औरंगजेब के पिता कौसर अली बोलने से स्वयं को रोक नहीं पाए। बोले, युद्ध के माहौल में बेटा सकुशल घर पहंच आया, यह कोई साधारण बात नहीं है।

भविष्य की योजना के प्रश्न पर औरंगजेब का कहना है कि विश्व विद्यालय की ओर से आनलाइन पढ़ाई के संदेश दिए गए हैं। वहां के हालात सुधरने के बाद हम फिर वापस जाएंगे। औरंगजेब ने बताया कि 10 छात्रों का पूरा खर्च सरकार ने उठाया है। जबकि, 10 छात्रों ने खुद टिकट खरीद लिये थे।

औरंगजेब ने बताया कि 15 फरवरी का दूतावास की ओर से खतरे का अंदेशा जताया गया था। जबकि, 20 फरवरी को देश वापसी की अपील की गयी। वापसी के मुद्दे हम सभी निर्णय नहीं ले पाए, इस दौरान 24 फरवरी को कीव पर हमला हो गया। औरंगजेब के विश्वविद्यालय से कीव की दूरी 800 किमी है। इसके बाद विश्व विद्यालय की ओर से सभी छात्रों को पहले छात्रावास में रखा गया। इसके बाद दूसरे स्थान पर बंकर में सुरक्षित कर दिया गया।
औरंगजेब के अनुसार दूतावास से एयर टिकट मिलने के बाद 28 फरवरी को बस से हंगरी लाया गया। सात घंटे के सफर के बाद सभी दिल्ली पहुंच आए। वहां यूपी भवन में खाना मिला और उसके बाद कार से रात के एक बजे घर पहुंच गए। मंगलवार को दिन में 12 बजे सोकर उठे औरंगजेब के घर में खुशियों का डेरा है।

कस्बे के रजत जोहल पहुंचने वाले हैं घर
चन्दौसी। रूस-यूक्रेन जंग में जिले के कई छात्र यूक्रेन में फंसे हैं। कस्बे के छात्र रजत जोहल पुत्र ज्ञानेन्द्र राजधानी कीव में पढ़ाई के लिए गये थे। अब वह भारत के लिए निकल पड़े हैं। उपजिलाधिकारी राजपाल सिंह ने बताया कि चन्दौसी क्षेत्र में जितने भी छात्र छात्राएं कीव में हैं, उन सभी को सुरक्षित घर तक पहुंचाने का प्रयास जारी। एसडीएम ने मंगलवार को रजत जोहल के परिवार को सांत्वना दी और इसके बाद जनेटा गए। जनेटा के भी कई छात्र यूक्रेन में पढ़ाई करने गए हैं।

यूक्रेन से छात्रा को सकुशल लाने को ज्ञापन सौंपा
नगीना। पिछड़ा समाज पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को एसडीएम को ज्ञापन देकर संगठन के प्रदेश अध्यक्ष की बेटी को सकुशल स्वदेश लाने की मांग की है। पिछड़ा समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष कृपाल सिंह सैनी के नेतृत्व में दर्जनभर पदाधिकारी एसडीएम कार्यालय पहुंचे। बताया कि संगठन के प्रदेश अध्यक्ष रमेश चंद सैनी की बेटी स्वेता रानी यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस कर रही है। युद्ध होने से श्वेता अन्य भारतीयों की तरह वहां फंस गई है। संगठन ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री को ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा। ज्ञापन देने वालों में लेखराज सिंह सैनी, सुमेर सिंह पाल, सुशील सैनी, सुभाष चंद आदि मौजूद रहे है।

पीपली का छात्र यूक्रेन से लौटा, परिवार में खुशी
हीमपुर दीपा: यूक्रेन में फंसे पीपली गांव के सुहेल घर लौट आये। इससे परिवार में खुशियों का माहौल है। गांव के लोगों ने सुहेल से यूक्रेन के हालातों की जानकारी ली। डॉ.मोमिन अली के पुत्र सुहेल यूक्रेन के इवानो शहर के फ्रैंक विस्नर चैनल मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस के छात्र हैं। द्वितीय वर्ष के छात्र युद्ध के दौरान अपने 20 साथियों संग वहां के एक फ्लैट में शरण लिए हुए थे। सुहेल रविवार दोपहर 20 साथियों के संग इवानो से निजी बस से रोमानिया के लिए चल दिए। बस चालक ने उन्हें रोमानिया से 10 किलोमीटर पहले ही छोड़ दिया, जिसके बाद सभी को पैदल चलकर रोमानिया एयरपोर्ट तक आना पड़ा। बॉर्डर पार होने के बाद भारतीय दूतावास के अधिकारियों ने उनकी मदद की। फ्लाइट से सोमवार सुबह आठ बजे दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंच गए। जिसके बाद गांव पहुंच गये।

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