रामपुर : यूक्रेन से रामपुर पहुंचे छात्र-छात्राएं परिजनों के खिले चेहरे
रामपुर, अमृत विचार। यूक्रेन से रामपुर पहुंचे छात्र-छात्राओं के परिजनों के चेहरे खिल गए हैं। छात्र-छात्राएं देर रात को इंदिरा गांधी एअरपोर्ट से देर रात को अपने घरों को पहुंचे। पूरे दिन घर पर रिश्तेदारों, मिलने-जुलने वालों समेत आसपास के लोगों द्वारा यूक्रेन के हालात पूछने में गुजर गया। शाहबाद गेट के निकट सेंट्रल कालोनी …
रामपुर, अमृत विचार। यूक्रेन से रामपुर पहुंचे छात्र-छात्राओं के परिजनों के चेहरे खिल गए हैं। छात्र-छात्राएं देर रात को इंदिरा गांधी एअरपोर्ट से देर रात को अपने घरों को पहुंचे। पूरे दिन घर पर रिश्तेदारों, मिलने-जुलने वालों समेत आसपास के लोगों द्वारा यूक्रेन के हालात पूछने में गुजर गया।
शाहबाद गेट के निकट सेंट्रल कालोनी निवासी इमाबख्श के बेटे मोहम्मद नवाज ने बताया कि यूक्रेन के हालात इस वक्त बहुत खराब हैं। यूक्रेन में काफी भारतीय छात्र बंकरों में पनाह लिए हुए हैं। सायरन बजने पर सभी छात्र-छात्राओं को बंकर में पहुंचना पड़ता है। कीव और खारकीव में 24 घंटे छात्र-छात्राएं बंकर में पनाह लिए हुए हैं। उनके खाना खत्म हो चुका है और पानी की भी किल्लत हो रही है।
यूक्रेन में बर्फबारी हो रही है और चारों खौफ का माहौल है। विनित्सिया यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस का चौथा साल है। 20 फरवरी को हालात बिगड़ने पता चला। 24 फरवरी को रूस ने यूक्रेन पर सुबह 5:30 बजे हमला कर दिया। इसके बाद हड़कंप मच गया और सुबह-सुबह तमाम लोग खाने के सामान की खरीदारी कर रहे थे और वहां पर सामान की किल्लत हो गई। मोहम्मद नवाज ने बताया कि विनित्सिया शहर कीव से महज दो सौ किमी.दूर है।
जंग छिड़ते ही तमाम छात्र-छात्राएं बंकर में पहुंच गए। 25 फरवरी को विनित्सिया से 18 किमी.दूर मलेट्री बेस पर हमला हुआ। जब-जब सायरन बजता सब लोग बंकर में चले जाते थे। कमोबेश हर दिन यही स्थिति बनी रही। 27 फरवरी की सुबह 7:30 बजे बस से उज्ग्रोड शहर के लिए निकले। जोकि, 900 किमी. दूर था और करीब तीस छात्र-छात्राओं का जत्था हंगरी बार्डर पर पहुंच गया। बस का किराया भारतीय मुद्रा में डेढ़ लाख रुपये दिया गया। हंगरी बार्डर पर पहुंचने के बाद सभी लोगों ने बार्डर को पार किया।
इसके बाद करीब तीन-चार किमी. पैदल चले उस समय माइनस चार डिग्री सेंटीग्रेड टेंप्रेचर था। इससे पहले बार्डर क्रास करने के लिए करीब चार-पांच घंटे लाइन में खड़े रहे क्योंकि, कुछ नाइजीरियन छात्र-छात्राएं पहले से लाइन में लगे हुए थे। हंगरी पहुंचने के बाद बस के द्वारा रेलवे स्टेशन पर पहुंचे। रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद बूडापेस्ट पहुंच गए। बूडापेस्ट पहुंचने पर भारतीय दूतावास के अधिकारियों से मुलाकात करने बाद दूतावास के अधिकारी सभी को बस में बैठाकर शेल्टर में ले गए और वहां खाने-पीने रहने और आराम करने का अच्छा इंतजाम था।
एक मार्च को अधिकारियों ने बताया कि आपकी फ्लाइट है इसके बाद बूडापेस्ट एअरपोर्ट के लिए निकल पड़े। भारतीय समय के अनुसार रात को करीब 12 बजे फ्लाइट मिली जोकि, करीब सात-आठ घंटे लेट थी। गंगा फ्लाइट से उड़ान भरकर करीब रात आठ बजे इंदिरा गांधी एअरपोर्ट पर उतरकर राहत की सांस ली।
इसके बाद एअरपोर्ट पर पिकअप करने के लिए सरकारी गाड़ी पहुंची और सभी का स्वागत किया। इसके बाद अपने घरों की ओर चल दिए। मोहम्मद नवाज के साथ असद अहमद चौधरी मेरठ, शबाब उद्दीन मुरादाबाद, शादाब अली आगरा, जैनुल आबेदीन मेरठ, फरहान खान मेरठ, अमल पिल्लई कर्नाटक, कृष्णा नोएडा समेत छात्र-छात्राएं साथ आए हैं।
यूक्रेन में चारों तरफ है दहशत का माहौल
यूक्रेन से आई शिफा बी अब भी दहशत में हैं और वह बताती हैं कि यूक्रेन में चारों ओर दहशत का माहौल और बमबारी और गोलीबारी हो रही है। हम लोगों को अपनी जान से ज्यादा सब लोगों की फिक्र थी कि सब लोग किसी तरह भारत पहुंच जाएं। घर में पहुंचने पर सब बहुत खुश हुए और रिश्तेदारों, मिलने -जुलने वालों के फोन आना शुरू हो गए। दिन निकलते ही रिश्तेदारों के आने का सिलसिला जारी है। शिफा बी का एमबीबीएस का चौथा साल है। यूक्रेन की यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की चौथे वर्ष की छात्रा शिफा बी बताती हैं कि यूक्रेन में चारों ओर बर्बादी का मंजर नजर आ रहा था।
आसपास मिजाइलें और बम फट रहे थे। रुक-रुककर सायरन बज उठता था और छात्र-छात्राएं बंकरों में पहुंच जाते थे। युद्ध की ऐसी विभीषिका उन्होंने अपने पूरे जीवन में नहीं देखी थी। रात को बंकर की लाइट बंद कर दी जाती थी इसके अलावा इंटरनेट सेवा भी रुक-रुककर चालू की जा रही थी। पास में जितना पैसा था वह खत्म हो चुका था और एटीएम से भी पैसा नहीं निकल रहा था। लेकिन, वे लोग जैसे-तैसे बार्डर पार करके हंगरी बार्डर तक पहुंचे और हंगरी में भारतीय दूतावास के लोगों ने उनकी काफी मदद की और एअरपोर्ट तक लेकर पहुंचे। शेल्टर में उन्हें और उनके सहपाठियों को भरपेट खाना और पानी मिला। इसके बाद भारतीय छात्र-छात्राएं गंगा फ्लाइट से भारत के लिए रवाना हुई और करीब रात आठ बजे दिल्ली पहुंची।
पोलैंड में केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने बंधाई ढाढ़स
साईं विहार निवासी नेकपाल सिंह के पुत्र अमित कुमार देर रात को अपने घर पहुंच गए। घर पहुंचने से परिजनों के चेहरे खिल गए हैं। अमित कुमार लवीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहे हैं। उनका यह पहला साल है वह बताते हैं कि यूक्रेन का बार्डर अपने दम पर ही क्रास करना है। यूनिवर्सिटी से पोलैंड बार्डर तक पहुंचने में उन्हें दो दिन का वक्त लगा। उन्होंने बताया कि ग्रुप 15 लोग शामिल थे और उन्होंने वहां से कार किराए पर ली।
इंडियन करंसी में कार वाले ने 45 किमी. के लिए तीन हजार रुपये लिए और करीब पोलैंड बार्डर से 35 किमी. पहले छोड़ दिया। पंद्रह लोग पैदल चलते हुए पोलैंड बार्डर पहुंचे। पोलैंड बार्डर से तीन चेक प्वाइंट क्रास किए और हर प्वाइंट पर करीब आठ से नौ घंटे का समय लग रहा था। हालात इतने खराब थे कि वह लोग यूक्रेन के लोगों को वरीयता दे रहे थे। भारतीय लोग तो बमुश्किल पोलैंड पहुंचे।
यूक्रेन का बार्डर क्रास करने के बाद पोलैंड में भारतीय दूतावास के अधिकारी मिले और वह बस से होटल लेकर पहुंचे और वहां अच्छा ट्रीटमेंट हुआ और खाना खाकर आराम किया। बताया कि करीब 250 लोगों की पहली फ्लाइट उड़नी थी। केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने भी छात्र-छात्राओं से मुलाकात कर ढाढ़स बधाई। अपने-अपने स्टेट जाने के लिए लोग खड़े इसके बाद वाहन उन्हें लेकर चले गए। अमित कुमार बताते हैं कि अभी कुछ साफ नहीं है कि आगे क्या करना है। फिलहाल, 15 दिन के लिए यूनिवर्सिटी बंद कर दी गई है। घर पहुंचने पर उनके माता-पिता बहुत खुश हैं।
