मुरादाबाद : फिर खुली डॉ. शैली हत्याकांड की फाइल, 8 साल पहले हुई थी हत्या
मुरादाबाद, अमृत विचार। महानगर के चर्चित डॉ.शैली हत्याकांड की बंद हो चुकी फाइल से फिर धूल हटाई जा रही है। करीब आठ साल से खुलासे के इंतजार में बंद फाइल को शासन के आदेश के बाद फिर से खोला गया है। इस केस से जुड़ी एक-एक परत को फिर से खंगालने के साथ ही नए …
मुरादाबाद, अमृत विचार। महानगर के चर्चित डॉ.शैली हत्याकांड की बंद हो चुकी फाइल से फिर धूल हटाई जा रही है। करीब आठ साल से खुलासे के इंतजार में बंद फाइल को शासन के आदेश के बाद फिर से खोला गया है। इस केस से जुड़ी एक-एक परत को फिर से खंगालने के साथ ही नए सिरे से साक्ष्य जुटाने की कोशिश की जा रही है। वहीं अधिकारी कुछ अहम साक्ष्य मिलने का दावा भी कर रहे हैं। उनका कहना है कि आठ साल में पहली बार ऐसे साक्ष्य हाथ लग रहे हैं, जिससे खुलासा होने की पूरी उम्मीद है।
ये है पूरा मामला
महानगर का यह चर्चित हत्याकांड 13 मई 2014 की रात सिविल लाइंस कोतवाली क्षेत्र की जिगर कालोनी में हुआ था। जिला अस्पताल की सेवानिवृत्त सीएमएस डा. शैली मेहरोत्रा परिवार के साथ जिगर कालोनी में रहती थी। घटना की रात डा. शैली मेहरोत्रा के अलावा उनके पति डा. ओम मेहरोत्रा और ननद रश्मि मेहरोत्रा की गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। जबकि तीन साल की पोती दिव्यांशी उर्फ गिन्नी की गला दबाकर हत्या की गई थी। चार लोगों की हत्या की जानकारी जब अगले दिन हुई तो पूरे मंडल में हड़कंप मच गया था। इस मामले में मृतका डा. शैली की बेटी गुंजन अरोरा ने सिविल लाइंस कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
एसटीएफ समेत सात टीमें हो चुकी हैं फेल
इस हत्याकांड के खुलासे के लिए एसओजी समेत चार टीमों को लगाया गया था। मौका-मुआयना करने के साथ ही तमाम लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। कई दिन तक टीमें यूपी के अलावा उत्तराखंड, दिल्ली और हरियाणा समेत कई राज्यों की खाक छानती रहीं लेकिन नतीजा सिफर रहा। इसके बाद नवंबर वर्ष 2015 में इस बहुचर्चित हत्याकांड के खुलासे की जिम्मेदारी एसटीएफ को दी गई। मुरादाबाद पहुंची एसटीएफ ने इस केस से जुड़े सभी पहलुओं पर गहनता से जांच की। केस की तफ्तीश कर चुके पुलिस वालों से भी चर्चा की। शक के घेरे में आए डाक्टर फैमिली के बेहद करीबी शख्स से पूछताछ करने के बाद टीम उनके एक रिश्तेदार से पूछताछ करने के लिए रुड़की भी गई। हालांकि बाद में उस रिश्तेदार ने कोर्ट की शरण ले ली। उसने पुलिस पर पूछताछ के नाम पर तंग करने का आरोप लगाया। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद एसटीएफ व अन्य टीमें बैकफुट पर आ गई। थकहार कर पुलिस ने सितंबर वर्ष 2016 को फाइनल रिपोर्ट लगाकर केस को बंद कर दिया था।
कोर्ट के आदेश पर खुला केस, नहीं मिली सफलता
इसकी जानकारी जब वादी गुंजन अरोरा को हुई तो उन्होंने दोबारा जांच के लिए कोर्ट की शरण ली। कोर्ट के आदेश के बाद फिर केस को रीओपन किया गया। हालांकि कई दिन तक चली जांच के बाद भी खुलासा नहीं हुआ। इसके बाद पिछले वर्ष मुरादाबाद में तैनात एसएसपी प्रभाकर चौधरी ने इसके खुलासे की जिम्मेदारी सीओ सिविल लाइंस इंदू सिद्धार्थ को दी। हालांकि उनकी कवायद भी केवल फाइलों तक में उलझ कर रह गई। दरअसल जिस वक्त घटना हुई उस दौरान सीसीटीवी अधिक प्रचलन में नहीं थे। जिस कारण फुटेज और कोई फिंगर प्रिंट भी नहीं मिले, हालांकि उनके तबादले के बाद जांच फिर ठंडे बस्ते में चली गई।
अधिकारी कर रहे अहम साक्ष्य मिलने का दावा
हत्याकांड का रहस्य जानने के लिए परिजनों ने फिर शासन स्तर पर गुहार लगाई। लिहाजा एक बार फिर इस केस की फाइल रीओपेन कर दी गई है। नए और तेजतर्रार पुलिस कर्मियों को खुलासे की जिम्मेदारी दी गई है। स्थानीय अधिकारियों की मानें तो केस स्टडी और लंबी पूछताछ के बाद कुछ अहम सुराग मिल गए हैं, जिससे जल्द ही खुलासा होने की उम्मीद है। बस कड़ी से कड़ी जोडकर हत्यारोपियों पर शिकंजा कसने की तैयारी है।
इस बहुचर्चित हत्याकांड की जांच फिर से शुरू कर दी गई है। नए और तेज तर्रार पुलिस कर्मियों की टीम को लगाया गया है। उस वक्त खुलासे में लगे एसटीएफ के अधिकारियों से भी जानकारी की जा रही है।
बबलू कुमार-वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
