देश में महंगी मेडिकल शिक्षा की पढ़ाई पर अमान अहमद बोला- कहां से आएंगे इतने रुपये, यूक्रेन जाना हमारी मजबूरी

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आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। जंग के बीच यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र अमान अहमद की चिंता कोई सिनेमाई कहानी नहीं है। अमान पढ़ाई पूरा करने के लिए फिर से यूक्रेन जाएंगे। डाक्टर बनकर पिता के सपने पूरा करेंगे। क्योंकि वह घर वालों के पैसे की कीमत जानते हैं। अमान के इस ऐलान के पन्ने कई जिंदगी …

आशुतोष मिश्र/अमृत विचार। जंग के बीच यूक्रेन से लौटे मेडिकल छात्र अमान अहमद की चिंता कोई सिनेमाई कहानी नहीं है। अमान पढ़ाई पूरा करने के लिए फिर से यूक्रेन जाएंगे। डाक्टर बनकर पिता के सपने पूरा करेंगे। क्योंकि वह घर वालों के पैसे की कीमत जानते हैं। अमान के इस ऐलान के पन्ने कई जिंदगी की कहानियों की बुनियाद हो सकते हैं। अमृत विचार से रूबरू अमान ने यह घोषणा करके घर वालों का सन्न कर दिया। अमान का ऐलान की है कि वह पिता की गाढ़ी कमाई का मर्म जानते हैं, इसलिए वहां से डाक्टर बनकर आएंगे। ऐलान किसी रुपहले पर्दे की कहानी नहीं है। बल्कि, मां की दुआओं और चाहने वालों के सपने साकार करने की तैयारी का हिस्सा है। बीते साल 28 नवंबर को अमान एमबीबीएस की पढ़ाई की हसरत लेकर टर्नोपिल पहुंचे थे। जबकि 22 फरवरी को परीक्षा के बाद 23 फरवरी के बाद घर लौटने का इरादा था।

ठाकुरद्वारा का छात्र मोहम्मद यासिर यूक्रेन से सकुशल वापस लौटा।

उधर, भारतीय दूतावास ने यूक्रेन के संभावित खतरों से अगाह किया था। लेकिन, पहले जहाज के टिकट की महंगाई ने कदम रोका। जब तक 24 फरवरी को धमाके शुरू हो गए। यह बात पता चलने के साथ घरवालों की सांसे अटक गयीं। उसके बाद परिजनों द्वारा मन्नतें मांगने का सिलसिला शुरू हो गया। मां रेशमा परवीन दुआएं मांगने लगीं। वह रात-रात भर तस्बीह (माला) फेरती रहीं। कई रोज घर के बर्तन खनकने बंद हो गए थे। मगर, गुरुवार की अल-सुबह बेटा घर में दाखिल हुआ तो सभी चहक पड़े। बेटा पहले मां के छाती से लिपट गया और भाई बहन उसे चूमने लगे। सप्ताह बाद घर के लोगों की हंसी लौटी।

बेटे ने घर वालों को संभालने के बाद जो कहा, वह और खास है। यानी अमान की चिंता हर गम पर भारी है।
बातचीत में तमाम चुनौतियों के बीच अमान अपनी योजना और मजबूरी के किताब का पन्ना पलटते हैं। कहते हैं कि हमारे देश में मेडिकल की पढ़ाई आसान नहीं है, यहां सवा करोड़ से अधिक रुपये चाहिए। इतने पैसे में यूक्रेन में तीन लोग डॉक्टर बन जाएंगे। वहां छह साल की पढ़ाई के लिए 40 से 45 लाख रुपये खर्च होते हैं। 45 लाख रुपये की कम नहीं होती। इसलिए हम वहां हालात सुधरने का इंतजार करेंगे। तब तक ऑनलाइन पढ़ाई करेंगे।

ठाकुरद्वारा के दिनेश वर्मा की पुत्री अर्चना वर्मा यूक्रेन से वापस लौटी।

बताया कि 12 मार्च तक यूनिवर्सिटी बंद है। वह यूक्रेन के हालात की जानकारी देते हैं। कहते हैं कि हमारे तिरंगे का वहां खूब सम्मान है। यूद्ध के हालात में 26 फरवरी को हम अपने शहर से बस से रोमानिया पहुंचे। रोमानिया वालों ने जो खातिरदारी उसकी हम जैसे भारतीय जीवन भर उसके कर्जदार रहेंगे। वहां के लोगों ने हम लोगों को अपने घरों में रखा है। जबकि मौसम में खूब परीक्षा ली, वहां तापमान माइनस 14 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था। अमान का कहना है कि अब पोलैंड, हंगरी, स्लोवाकिया और रोमानिया बॉर्डर खुल गये हैं। बुधवार की रात आई जहाज में यूपी के हम 20 से 25 छात्र आए। अब हम वहां युद्ध विराम का इंतजार करेंगे। अमान का कहना है कि वहां हालात खराब होने के पहले हम लौट सकते थे। लेकिन, यूनिवर्सिटी ने ऐसा मौका नहीं दिया। ऑनलाइन कक्षाओं का संचालन नहीं किया, जबकि भारतीय दूतावास ने हमें आगाह किया था। सरकार ने प्रयास करके हमें घर बुलाया है।

घर लौटे विद्यार्थियों के घर जश्न, कई घरों में अभी इंतजार
ठाकुरद्वारा। उप नगर व गांवों से यूक्रेन गए विद्यार्थी घर लौटने लगे हैं। गुरुवार को दो छात्र व दो छात्राएं घर पहुंची तो परिवार में खुशियों लौट आयीं। कई परिवारों को अभी और विद्यार्थियों की फ्लाइट का इंतजार है। व्यापारी मोहम्मद याकूब कुरैशी ने बताया कि बेटा सरकारी फ्लाइट से घर लौट आया है। उसके लिए वह दिल्ली एयरपोर्ट गए थे। जबकि कस्बे के शफीक अहमद का बेटा जावेद आलम हंगरी से घर पहुंचा है। उसे दिल्ली एयरपोर्ट पर भाई परवेज आलम ने रिसीव किया। सर्राफा व्यापारी दिनेश वर्मा की पुत्री अर्चना वर्मा भी घर वापस लौट आई है। उसके भाई ने दिल्ली एयरपोर्ट पर रिसीव किया। शहीद सैफी की पुत्री सीमा हंगरी बॉर्डर से घर पहुंच चुकी है। रामूवाला गणेश के निवासी खड़क सिंह ने बताया कि मेरा बेटा आदित्य वत्सल शनिवार तक घर वापस लौट सकता है। वह हंगरी स्थित भारतीय दूतावास की देखरेख में होटल में है। जबकि अन्य आठ विद्यार्थियों के परिजन भी उनका इंतजार कर रहे हैं।

यूक्रेन से लौटा छात्र देवांश परिवार में खुशी
मुरादाबाद । यूक्रेन व रूस के बीच चल रहे युद्ध के बीच शहर के कई छात्र वापस वतन लौट रहे हैं। गुरुवार को शहर के रामगंगा विहार के रहने वाले अधिवक्ता राकेश जौहरी का बेटा देवांश जौहरी यूक्रेन से घर लौट आया। देवांश यूक्रेन में एमबीबीएस की पढ़ाई पढ़ रहे थे और उनका पहला साथ था। अमृत विचार से बातचीत में छात्र ने बताया कि यूक्रेन का मंजर काफी भयानक था। ऐसे खतरनाक मंजर में वतन वापसी पर छात्र ने भारत सरकार का धन्यावाद भी किया। देवांश की सकुशल वापसी पर परिवार के सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ पड़ी। वहीं अखिल भारतीय कायस्थ महासभा ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रदीप सक्सेना एडवोकेट व महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतू सक्सेना अपनी टीम के साथ देवांश जौहरी के आवास पर पहुंचे और बुके देकर उसका स्वागत किया।

यूक्रेन से मुरादाबाद पहुंचे छात्र देवांश जौहरी का स्वागत करते परिवार के लोग।

आयुष भारद्वाज एवं सरफराज दिल्ली पहुंचे
हसनपुर। यूक्रेन से लौटे मोहल्ला होली चौक के पंकज भारद्वाज के बेटे आयुष तथा काला खेड़ा निवासी मुन्ना अली के पुत्र सरफराज एमबीबीएस के छात्र हैं। यूक्रेन पर हमला के दौरान दोनो छात्र यूनिवर्सिटी के बंकर में रुके थे। बुधवार कि सुबह आयुष भारद्वाज एवं सरफराज रोमानिया एयरपोर्ट पहुंचे और गुरुवार को सुबह दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरे। दोनों को देख परिजनों के चेहरे खिल गए हैं। विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी एवं भाजपा के जिला महामंत्री अभिनव कौशिक ने दोनों छात्रों के घर पहुंचकर उनका स्वागत किया। उनकी कुशलता के विषय में बात की और दोनों छात्रों को विश्वास दिलाया कि बहुत जल्द बाकी छात्रों को सरकार वापस लाएगी।

हसनपुर में यूक्रेन से लौट कर आए सरफराज का स्वागत करते विधायक महेंद्र सिंह खड़गवंशी।

यूक्रेन के हालात बहुत खराब
हसनपुर। आयुष भारद्वाज व सरफराज के घर में खुशी है। परिवार के सदस्यों दोनों के देश वापसी पर केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। छात्रों का कहना है कि हमले के बाद यूक्रेन के हालात बेहद खराब हो गए हैं। हम दोनों के वहां से निकले ही फिर से ब्लास्ट हुआ। वहां अब भी तमाम भारतीय फंसे हुए हैं। छात्रों का कहना है कि सरकार छात्रों की वापसी कराकर बहुत अच्छा कार्य कर रही है। जो छात्र अभी फंसे हैं उन्हें जल्द लाने का प्रयास किया जाना चाहिए।

हसनपुर में यूक्रेन से वापस आए आयुष का स्वागत करते जिला महामंत्री अभिनव कौशिक।

यूक्रेन से जोया की अंशिका और अतरासी के उवैस पहुंचे घर
अमरोहा। यूक्रेन में दहशत भरे माहौल से गुरुवार को जिले के कई छात्रा-छात्राएं घर आ गयीं। जोया की अंशिका गौतम और अतरासी के उवैस चौधरी के घर वाले प्रसन्न हैं। घर पर परिजनों से मिलकर आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। परिजनों ने माला पहनाकर उनका स्वागत किया। अंशिका गौतम ने सात दिनों की आप-बीती सुनाई। बताया शुरू में जब हमले की बातें चल रही थीं, तब हमें मजाक लगा। लेकिन, हॉस्टल के पास एक धमाके के बाद हम डर गए। तब से रूस लगातार यूक्रेन पर हमला कर रहा है। सायरन बजते ही हम बंकर में छिप जाते थे। इंडियन एंबेसी ने सहायता नहीं की। इसके बाद हमने बस का इंतजाम कर पड़ोसी मुल्क रोमानिया के बॉर्डर पहुंचे। वहां से भारत सरकार ने मदद कर दिल्ली भेजवाया। छात्रा ने कहा कि अब घर वापसी से सब दुख भूल गई। परिवार से मिलकर बहुत खुश हूं।

जोया में यूक्रेन से वापस लौटी छात्रा अंशिका का स्वागत करते परिजन।

बम- गोलियों की आवाज सुनकर बढ़ जाती थी धड़कन
अमरोहा। रजबपुर के अतरासी कलां निवासी उवैस चौधरी घर लौट आए हैं। उवैस एमबीबीएस चौथे वर्ष के छात्र हैं। मात्र 25 दिन पहले ही यूक्रेन गए थे। बातचीत में बताया कि बमबारी और धमाकों से सभी सहम जाते थे। बम और गोलियों की आवाज सुनकर धड़कन बढ़ जाती थी। ईश्वर से प्रार्थना कर रहे थे कि जल्द यहां से निकलकर अपने घर पहुंचे। वहां से निकलना बड़ा मुश्किल हो गया था। किसी तरह तीन बसों में 150 छात्र ग्रुप बनाकर रोमानिया पहुंचे। यूक्रेन और रूसी सेना ने वहां से निकलने में मदद की। रोमानिया के बुखारेस्ट में केंद्रीय मंत्री ज्योदिरादित्य सिंधिया पहुंचे तो लगा कि अब शायद यहां से बाहर निकल जाएंगे। उन्होंने हम सभी का हौसला बढ़ाया। रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट से सात घंटे का सफर कर सुबह दिल्ली एयरपोर्ट में पहुंचे। सरकार ने अपने खर्चे पर टैक्सी बुक की, जो घर तक छोड़कर गई है।

अमरोहा के अतरासी में यूक्रेन से वापस लौटे उवैस का स्वागत करते परिजन।

छात्र-छात्राओं के घर पहुंचने से परिजन खुश
नजीबाबाद। छात्र आसिद नेगी के घर वापसी पर परिजनों ने मिठाई खिलाकर बेटे का स्वागत किया। आसिद नेगी ने बताया कि यूक्रेन में अभी भी भारतीय छात्र फंसे हुए हैं। ऑपरेशन गंगा के तहत हमारी वापसी हुई है। करीब 10 किलोमीटर पैदल चलने के बाद हम लोग रोमानिया पहुंचे थे। बताया कि यूक्रेन में रहकर छात्रों को एमबीबीएस की पढ़ाई कराने वाले जलालाबाद निवासी महमूद कुरैशी के भाई डॉ. मशरूर जान जोखिम में डालकर छात्रों को वहां से बाहर निकालने में जुटे हैं। एसडीएम मनोज कुमार ने व सीओ गजेंद्र पाल सिंह ने यूक्रेन से लौटे विद्यार्थी से बात की।
ये विद्यार्थी लौटे हैं: मोहम्मद जैद पुत्र मोबिन हसन, दिव्यांशी पुत्री उदयवीर सिंह निवासी गोविंद नगर, गुलशमा पुत्री बाबू खान निवासी रेलवे कॉलोनी, अंकित रेसले पुत्र राजू रेसले निवासी रमपुरा, सिमरन खान पुत्री फुरकान अहमद निवासी पालोमल, मोहम्मद आदिल पुत्र अकबर निवासी किरतपुर।

कठिन सफर तय कर नवेद आलम पहुंचे घर, खुशी
बढापुर। मोहल्ला कस्साबान निवासी रईस अहमद के बेटे नवेद आलम यूक्रेन में मेडिकल की पढ़ाई कर रहे थे। युद्ध से निकलकर जब वह गुरुवार की शाम घर पहुंचे तो परिजन खुशी से झूम उठे। नवेद ने बताया कि इवानो फ्रेंसक्विक्स कालेज चार वर्ष की पढ़ाई पूरी हो चुकी है। शहर के नजदीक एयरपोर्ट पर 24 फरवरी की सुबह ब्लास्ट हुआ। उसके बाद साथी छात्रों संग रोमानिया का रुख कर लिया था। बॉर्डर पर बहुत ठंड थी। रात में आठ घंटे तकफील में गुजारने पड़े। उसके बाद रोमानिया में एंट्री मिली थी। वहां सभी को शेल्टर हाउस में रखा था। शेल्टर में यूक्रेन से आए छात्रों को रोमानिया के लोग खाना-पानी उपलब्ध करा रहे हैं।

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