बरेली: यूक्रेन से लौटा बेटा, मां बोली दूसरी जिंदगी मिल गई

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Edited By Amrit Vichar
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बिथरी चैनपुर/ बरेली, अमृत विचार। यूक्रेन में फंसा छात्र जब अपने घर पहुंचा तो उसके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटे के सही सलामत घर वापस लौटने के बाद उसकी मां बोली कि दूसरी जिंदगी मिल गई। छात्र ने बताया कि 40 से 50 घंटे तक ट्रेन में यात्रा करने के बाद फ्लाइट मिली। …

बिथरी चैनपुर/ बरेली, अमृत विचार। यूक्रेन में फंसा छात्र जब अपने घर पहुंचा तो उसके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। बेटे के सही सलामत घर वापस लौटने के बाद उसकी मां बोली कि दूसरी जिंदगी मिल गई। छात्र ने बताया कि 40 से 50 घंटे तक ट्रेन में यात्रा करने के बाद फ्लाइट मिली। दहशत के बीच शनिवार रात अपने घर पहुंचे।

बिथरी के उड़ला जागीर के डा. इकरार खान का बेटा तफज्जुल खारकीब नेशनल यूनिवर्सिटी से एमबीबीएस कर रहा है । तफज्जुल के एमबीबीएस का दूसरा वर्ष चल रहा है। तफज्जुल की मां सलमा ने बताया कि बेटे के घर वापस आने से ऐसा लग रहा है जैसे उन्हें दूसरी जिंदगी मिल गयी हो। वहीं पिता डा. इकरार ने बताया कि बेटे के वहां फंसे होने पर चिंता बनी हुई थी अब चिंता खत्म हुई। तफज्जुल ने बताया की खारकीब से हंगरी वार्डर तक वह ट्रेन से पहुंचे थे। उन्होंने बताया खारकीब से हंगरी वार्डर तक लगभग 40 से 50 घन्टे लग गए थे। फिर हंगरी वार्डर से दिल्ली के लिए फ्लाइट मिल गयी थी। 

खाना नहीं मिला तो नमकीन और बिस्किट खाकर तय किया सफर
तफज्जुल ने बताया कि इतने लंबे सफर में खाना नहीं मिल पाया था। लेकिन उन्होंने नमकीन और बिस्किट खाते हुए सफर तय किया और घर पहुंच गए। भूख की वजह से वहां पर फंसे अन्य छात्रों का भी बुरा हाल था।

बंकर में रहे थे
यूक्रेन में युद्ध चलने के दौरान ढाई सौ छात्र हास्टल के बंकर में रहे और वहीं खाना बनाकर खाया था । तफज्जुल ने बताया कि उन्हें किसी तरह का कोई खतरा नहीं लगा वह पूरी तरह सुरक्षित रहे। अब सही सलामत घर लौटने के बाद राहत महसूस कर रहे हैं।

यूक्रेन से लौटे छात्र को किया गया सम्मानित
यूक्रेन से वापस लौटे छात्र मो. आसिफ का वतन वापसी पर सम्मान किया गया। अंसारी मोहल्ला निवासी छात्र मो. आसिफ शुक्रवार को अपने घर पहुंचे थे। खारकीव के मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई करने वाले छात्र आसिफ ने बताया कि 24 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ इस समय सबसे पहला हमला खारकीव पर ही हुआ था। तभी से हम लोग परेशान थे कि किसी तरह हम लोग अपने देश लौट सके। घर लौटने पर चौकी प्रभारी अजय शर्मा ने छात्र मो. आसिफ को वीर अब्दुल हमीद स्मृति चिन्ह देकर हौसला अफजाई करते हुए उनको सम्मानित किया। आसिफ ने कहा कि हम जिस तरह से संघर्ष करते हुए यूक्रेन से इंडिया पहुंचे वतन वापसी पर हमें बेशुमार प्यार और सम्मान मिला जिसको हम भूल नहीं सकते।

सेजल और दिव्यांश पहुंचे लवीव
सीबीगंज की वेस्ट एंड कॉलोनी के रहने वाले डा. सुरजीत आर्या की बेटी सेजल और इज्जतनगर निवासी मुकुल दीक्षित के बेटे दिव्यांश एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। लेकिन वह भी यूक्रेन में हुए युद्ध में फंस गए थे। परिवार के लोगों ने बताया कि सेजल आर्या और दिव्यांश दीक्षित लवीव पहुंच चुके हैं। वह रोमानिया बार्डर जाएंगे।

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