Women’s Day Special : पति ने छोड़ा साथ, अपने दम पर बच्चों को बनाया इंजीनियर और डॉक्टर

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रामपुर/अमृत विचार। पति ने साथ छोड़ दिया तो आवास विकास कालोनी की गीता अग्रवाल ने खुद के दम पर परिवार संभालने का संकल्प ले लिया। बच्चों को इंजीनियर और डाक्टर बनाया। अब 16 लोगों को रोजगार की अहम जरिया हैं। डीजीसी सिविल रमेश कुमार गुप्ता एडवोकेट की पुत्री गीता अग्रवाल का विवाह मुरादाबाद निवासी कोठीवाल …

रामपुर/अमृत विचार। पति ने साथ छोड़ दिया तो आवास विकास कालोनी की गीता अग्रवाल ने खुद के दम पर परिवार संभालने का संकल्प ले लिया। बच्चों को इंजीनियर और डाक्टर बनाया। अब 16 लोगों को रोजगार की अहम जरिया हैं। डीजीसी सिविल रमेश कुमार गुप्ता एडवोकेट की पुत्री गीता अग्रवाल का विवाह मुरादाबाद निवासी कोठीवाल परिवार में वर्ष 1984 में हुआ था। उसी साल गीता अग्रवाल ने अपना एलएलबी फाइनल किया था।

वकालत करने के लिए पति ने अनुमति नहीं दी जबकि, गीता अग्रवाल के पिता, दादा और नाना सभी सरकारी वकील रहे हैं। गीता अग्रवाल का वर्ष 1997 में मनमुटाव के चलते पति से तलाक हो गया। इसके बाद वह अपनी आठ वर्ष की बेटी नीतिका अग्रवाल और तीन वर्षीय बेटे रघुराघव के साथ खाली हाथ अपने पिता के घर चली आईं। पिता ने कहा कि वकालत शुरू कर दो लेकिन, एकदम पैसे की जरूरत वकालत पूरा नहीं कर सकती थीं। तब उन्होंने काफी सोच विचार कर अपने भाई डा. हिमांशु गुप्ता से बातचीत की।

डा. हिमांशु गुप्ता ने कहा कि क्लीनिक में मेडिकल शुरू कर दो। इसके बाद डा. हिमांशु के क्लीनिक में मेडिकल शुरू कर दिया। बेटी का सेंट मेरीज स्कूल में और बेटे का दयावती मोदी एकेडमी में प्रवेश कराया। इसके बाद वकालत शुरू कर दी और हालात बेहतर होने लगे। पिता जी ने गंगापुर आवास विकास कालोनी में रहने को आवास दे दिया। बेटी की शादी कर दी जो, यूएस में है। बेटा डाक्टर रघुराघव की भी शादी कर दी और बहू भी डाक्टर ही मिली है। गीता अग्रवाल कहती हैं कि हर औरत में कोई न कोई खूबी जरूर होती है। विपत्ति पड़ने पर हिम्मत नहीं हारें बल्कि, जो हॉबी हो उसी को प्रोफेशन बनाने का प्रयास करें तरक्की निश्चित मिलेगी। मन से यह बात निकाल दें कि लोग क्या कहेंगे ?

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