बरेली: कर्मचारियों के अभाव में कुपोषण से जंग कैसे ?
बरेली,अमृत विचार। जिले के जिम्मेदार अधिकारी कुपोषण से जंग लड़ने की तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहे हैं। विभाग की स्थिति को देखकर नहीं लग रहा है कि शासन की मंशा पूरी हो सकेगी। कर्मचारियों की कमी होने की वजह से समय से न तो आंगनबाड़ी केंद्र खुल रहे हैं और न ही पोषाहार …
बरेली,अमृत विचार। जिले के जिम्मेदार अधिकारी कुपोषण से जंग लड़ने की तैयारियां पूरी होने का दावा कर रहे हैं। विभाग की स्थिति को देखकर नहीं लग रहा है कि शासन की मंशा पूरी हो सकेगी। कर्मचारियों की कमी होने की वजह से समय से न तो आंगनबाड़ी केंद्र खुल रहे हैं और न ही पोषाहार लाभार्थियों तक पहुंच रहा है।
जिले में 2857 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें तीन लाख से अधिक बच्चे पंजीकृत हैं। सरकार की तरफ से पंजीकृत बच्चों के अलावा महिलाओं, किशोरियों को हर महीने गेहूं, चावल बांटे जाते हैं। नई व्यवस्था में अब चावल कोटेदार के माध्यम से बांटा जा रहा है। इन दिनों कुपोषण दूर करने वाला विभाग महिला एवं बाल विकास विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है।
आंगनबाड़ी केन्द्रों पर रोजाना गरम पोषाहार वितरण के अलावा बच्चों, गर्भवती महिलाओं के टीकाकरण के अलावा सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार की जिम्मेदारी है। महिला एवं बाल विकास परियोजना को सालाना करोड़ों रुपए का बजट आवंटित किया जा रहा है। अफसर कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभाग को प्रतिदिन नई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
संसाधनों का भी अभाव
शिक्षा विभाग की तर्ज पर चल रहे महिला एवं बाल विकास विभाग में कर्मचारियों के साथ संसाधनों का भी अभाव है। सीडीपीओ ऑफिसों में किराए के वाहनों से काम चलाया जा रहा है। एक-दो कंप्यूटर सिस्टम लगा रखे हैं, लेकिन कर्मचारी नहीं होने से सुपरवाइजरों को काम चलाना पड़ रहा है। इतना ही नहीं सूचनाओं के आदान-प्रदान अन्य गतिविधियां प्रभावित हो रही है।
इतने कर्मचारी का है अभाव
जिले में 104 के सापेक्ष मात्र 21 सुपरवाइजर हैं, इसके अलावा शहरी क्षेत्र में मात्र 150 के सापेक्ष 85 आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां हैं। जिलेभर में आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की 2857 होनी चाहिए, जिसके सापेक्ष मात्र 2527 ही हैं।
सीडीपीओ व अन्य कर्मचारियों के रिक्त पदों की रिपोर्ट हर माह निदेशालय को भेजी जाती है। रिक्त पदों को भरने का काम सरकार स्तर का है। शहरी क्षेत्र में करीब 65 आंगनबाड़ी कार्यकत्री सेवानिवृत्त हो गईं हैं, जिस वजह से समस्या बनी हुई है। — दीनानाथ द्विवेदी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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