मुरादाबाद : मोबाइल और कंप्यूटर ने आदमी को पासवर्ड के जाल में जकड़ा

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मुरादाबाद, अमृत विचार। डिजीटलाइजेशन के दौर में ना केवल बैंकिंग सिस्टम, बल्कि कामकाज का सिस्टम भी मोबाइल और कंप्यूटर में आकर सिमट गया है। इससे लोगों की जिंदगी काफी हद तक आसान तो हुई है, लेकिन दुश्वारियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या हरेक सिस्टम के लिए अलग अलग पासवर्ड का होना है। एक …

मुरादाबाद, अमृत विचार। डिजीटलाइजेशन के दौर में ना केवल बैंकिंग सिस्टम, बल्कि कामकाज का सिस्टम भी मोबाइल और कंप्यूटर में आकर सिमट गया है। इससे लोगों की जिंदगी काफी हद तक आसान तो हुई है, लेकिन दुश्वारियां भी कम नहीं हैं। सबसे बड़ी समस्या हरेक सिस्टम के लिए अलग अलग पासवर्ड का होना है। एक सामान्य आदमी को भी कम से कम से कम चार से पांच पासवर्ड याद रखना होता है।

इसमें भी कुछ पासवर्ड न्यूमेरिक होते हैं तो कुछ अल्फाबेटिकल। कुछ पासवर्ड चार करेक्टर के हैं तो कुछ के लिए छह या दस करेक्टर रखना होता है। ऐसे में एक आम आदमी को यह सभी पासवर्ड याद रख पाना काफी कठिन हो जाता है। यह स्थिति कारपोरेट सेक्टर में काम करने वालों के लिए और भी कठिन होता है। उन्हें कंप्यूटर से लेकर कंपनी के पोर्टल तक के लिए तीन या चार पासवर्ड अलग से याद करने की मजबूरी होती है। इस समस्या को देखते हुए अमृत विचार ने अलग अलग सेक्टर के लोगों से बात की। जानने का प्रयास किया आखिर यह दुश्वारियां किस हद तक परेशान करने वाली हैं। इसी के साथ साइबर विशेषज्ञ से इस समस्या का समाधान जानने की कोशिश की। पेश है रिपोर्ट:-

एक राष्ट्रीय स्तर के ऑटो मोबाइल कंपनी में काम करने वाले राजेश चौधरी बताते हैं कि उनके दो बैंकों में एकाउंट हैं। इन दोनों बैंकों का एटीएम उनके पास है, इसके अलावा दोनों में नेटबैंकिंग है। गूगल पे, फोन पे और पेटीएम भी है। कंपनी में ना केवल कंप्यूटर पासवर्ड से खुलता है, बल्कि कंपनी के आधिकारिक मेल और एचआर सिस्टम पासवर्ड से सुरक्षित हैं। व्यक्तिगत ईमेल तथा सोशल मीडिया के अलग अलग प्लेटफार्म के लिए भी पासवर्ड की जरूरत होती है। चूंकि यह सभी पासवर्ड अलग अलग रखने होते हैं।

ऐसे में कई बार वह भूल जाते हैं कि कौन सा पासवर्ड किस प्लेटफार्म पर इस्तेमाल किया जाएगा। शहर की ही एक स्थानीय मेटल फैक्ट्री में काम करने वाले अशोक विश्वकर्मा ने बताया कि उन्हें तो एसबीआई के नेटबैंकिंग में ही परेशानी हो रही है। इसमें लॉगिन के लिए अलग पासवर्ड और प्रोफाइल के लिए अलग पासवर्ड की आवश्यकता होती है। गृहणी राजलक्ष्मी ने बताया कि पासवर्ड के झंझट और आए दिन हो रहे ठगी के मामलों को देखते हुए उन्होंने अपना नेटबैंकिंग सक्रिय ही नहीं कराया। केवल एटीएम है, जिसका चार अंकों वाला पासवर्ड याद रखना होता है। इसी प्रकार गंज बाजार के किराना कारोबारी सुरेश मित्तल ने बताया कि पासवर्ड याद रखने के लिए अपने जीवन से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण नंबरों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं पासवर्ड बदलते समय वह इन्हीं नंबरों को स्पेशल करेक्टर के साथ आगे पीछे कर देते हैं।

नियमित तौर पर बदलें पासवर्ड
ध्यान रहे कि जब आप पहली बार अपने नेट बैंकिंग अकाउंट में लॉगिन करते हैं तो आपको बैंक द्वारा दिया गया पासवर्ड यूज करना होगा। हालांकि, अपने अकाउंट को सेफ रखने के लिए आप इस पासवर्ड को बदल सकते हैं। इसके अलावा भी नियमित तौर पर पासवर्ड बदलते रहें। कम से छह माह में तो पासवर्ड अवश्य बदल दें। सबसे जरूरी बात कि अपने पासवर्ड को हमेशा गोपनीय रखें।

पासवर्ड हमेशा मजबूत रखना चाहिए
उत्तर प्रदेश पुलिस में डिप्टी एसपी अभय कुमार मिश्रा बताते हैं कि पासवर्ड हमेशा मजबूत रखना चाहिए। यदि आपके पास एक से अधिक एकाउंट हो तो पासवर्ड भी हर एकाउंट के लिए अलग होना चाहिए। अन्यथा एक एकाउंट में सेंध लगाने के बाद जालसाज दूसरे एकाउंट में आसानी से पहुंच जाएंगे। खासतौर पर नेटबैंकिंग संबंधी पासवर्ड किसी खास पैटर्न पर तो होने ही नहीं चाहिए। प्रयास करें कि पासवर्ड में कुछ अल्फाबेट और न्यूमेरिक के साथ स्पेशल करेक्टर भी हों। पासवर्ड जितना मजबूत होगा, उसे तोड़ पाना उतना ही मुश्किल होगा।

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