यूपी चुनाव 2022: प्रत्याशियों की जमानत राशि से निर्वाचन आयोग को हुई करोड़ों की कमाई
लखनऊ। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की पूरी कोशिश होती है कि चुनाव भले हार जाएं लेकिन कम से कम जमानत न जब्त होने पाए। जमानत जब्त होने को प्रत्याशी की प्रतिष्ठा का भी सवाल माना जाता है। वहीं प्रत्याशियों की इसी जमानत राशि से निर्वाचन आयोग मालामाल होता है। अकेले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों …
लखनऊ। चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की पूरी कोशिश होती है कि चुनाव भले हार जाएं लेकिन कम से कम जमानत न जब्त होने पाए। जमानत जब्त होने को प्रत्याशी की प्रतिष्ठा का भी सवाल माना जाता है। वहीं प्रत्याशियों की इसी जमानत राशि से निर्वाचन आयोग मालामाल होता है। अकेले उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में 3522 प्रत्याशियों की जमानत होने से आयोग को करीब 30 करोड़ रुपये आमदनी हुई है। हालांकि वर्ष 2017 के मुकाबले यह आमदनी करीब 5 करोड़ रुपये कम है। पिछले चुनाव में 3736 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हुई थी और उससे आयोग को करीब 35 करोड़ रुपये की आमदनी हुई थी।
वैसे पिछले विधानसभा में प्रत्याशियों की जमानत जब्ती का आंकड़ा कम नहीं था। 2017 में 4853 प्रत्याशी मैदान में थे। इसमें से 3736 प्रत्याशियों को जमानत जब्त हुई थी। वहीं 2012 में कुल 6839 प्रत्याशियों में से 5760 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। इससे पहले इसी तरह 2007 में 6086 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। जिसमें से 5034 प्रत्याशी जमानत नहीं बचा पाए थे। उल्लेखनीय है कि चुनाव के दौरान पर्चा दाखिल करते समय हर प्रत्याशी को एक तय जमानत राशि जमा करनी होती है। विधानसभा चुनाव में 10 हजार रुपये जमानत राशि जमा की जाती है।
अनुसूचित जाति और जनजाति के उम्मीदवारों को विधानसभा चुनाव में 5 हजार रुपये जमा करने होते हैं। वहीं, जमानत बचाने के लिए संबंधित विधानसभा सीट पर कुल वोटों का 1/6 (16.6%) वोट लाना जरूरी होता है। इतने वोट न मिलने पर जमानत राशि आयोग जब्त कर लेता है। जमानत राशि अलग बात है, लेकिन इसे बचाना प्रत्याशी और किसी दल की प्रतिष्ठा का भी सवाल होता है। किसी विधानसभा सीट पर 2 लाख वोट पड़े हैं और उस सीट से चुनाव लड़ने वाले किसी उम्मीदवार को 33]332 से कम वोट मिले हैं, तो उस प्रत्याशी की जमानत जब्त हो जाती है।
कांग्रेस के 387 प्रत्याशियों की हुई जमानत
कांग्रेस ने इस बार 399 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था , जिनमें 387 की जमानत जब्त हो गई। इसी प्रकार बसपा के भी 290 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। समाजवादी पार्टी के 6 और भाजपा के तीन प्रत्याशियों की भी मतदाताओं ने जमानत जब्त करा दी है। सपा के सहयोगी दल रालोद के 3 , सुभासपा के 5 और अपना दल (कमेरावादी) के तीन प्रत्याशी भी अपनी जमानत बचाने में सफल नहीं हो सके। हालांकि भाजपा के सहयोगी दलों निषाद पार्टी और अपना दल ( एस )के किसी प्रत्याशी की जमानत जब्त नहीं हुई।
2002 में सबसे कम प्रत्याशियों की हुई थी जमानत
वर्ष 2002 में प्रदेश की 403 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में कुल 5533 प्रत्याशी थे, इसमें से 4422 अपनी जमानत बचाने में सफल रहे थे। इस लिहाज से उस चुनाव में निर्वाचन आयोग को जमानत जब्ती से सबसे कम राशि प्राप्ति हुई थी। वहीं 1993 के विधानसभा चुनावों में करीब 88.95 प्रतिशत प्रत्याशी अपनी जमानत नहीं बचा पाए थे। तब कुल 9726 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था। जिसमें से 8652 प्रत्याशी अपनी जमानत जब्त हो गई थी। 1996 में 4429 प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे, जिसमें 3244 प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी।
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