मुरादाबाद : देवरा भूरा गांव की गोशाला में फिर मरीं 16 गायें
मुरादाबाद/संभल, अमृत विचार। गुन्नौर क्षेत्र के देवरा भूरा गांव में बनी गोशाला में गायों की मौत का तांडव जारी है। सोमवार को 16 गायों की मौत हो गई। मौत का कारण भूख और प्यास है। चर्चा है कि सप्ताह में करीब चार दर्जन गायों की मौत हो चुकी है। इनके शव को जेसीबी से गोशाला …
मुरादाबाद/संभल, अमृत विचार। गुन्नौर क्षेत्र के देवरा भूरा गांव में बनी गोशाला में गायों की मौत का तांडव जारी है। सोमवार को 16 गायों की मौत हो गई। मौत का कारण भूख और प्यास है। चर्चा है कि सप्ताह में करीब चार दर्जन गायों की मौत हो चुकी है। इनके शव को जेसीबी से गोशाला परिसर में ही दफनाया गया है।
मामले की जानकारी प्रशासन को भी है, लेकिन मीडिया के सामने सभी अनजान बने हुए हैं। जिलाधिकारी ने साफ तौर पर कहा कि यह सरकारी गोशाला नहीं है। दो दिन पहले मामला संज्ञान में आया था। प्रशासन की ओर से इस गोशाला में कुछ दाना-पानी का इंतजाम किया गया होगा, लेकिन इसका प्रशासन से कोई लेना देना नहीं है। पशुपालन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पूर्व विधायक की हार का खामियाजा इन बेजान पशुओं को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है।
यह है मामला
छुट्टा पशुओं से नाराज मतदाताओं को रिझाने के लिए पूर्व विधायक अजीत कुमार राजू ने मुख्यमंत्री की चुनावी सभा से एक दिन पहले रजपुरा के देवरा भूरा गांव में अस्थाई गोशाला बनवाई थी। आनन-फानन में पूरे विधानसभा क्षेत्र से छुट्टा पशुओं को पकड़ कर इस गोशाला में डाल दिया गया। ग्राम प्रधान ने बताया कि गायों के लिए दाना पानी का संकट तो है ही, उनके बछड़ों के लिए दूध का इंतजाम करना मुश्किल हो रहा है।
सरकारी गोशाला नहीं है। पूर्व विधायक ने अपनी जमीन पर गोशाला बनवाई है। विधायक के कहने पर प्रशासन ने इस गोशाला में दाना-पानी की व्यवस्था कर दी होगी। गायों की मौत की जांच कराई जाएगी। -संजीव रंजन, जिलाधिकारी, संभल
बीमार गायों की सूचना पर इलाज के लिए गोशाला में रोज यहां से डॉक्टर भेजे जाते हैं। आज भी डॉक्टर गोशाला में इलाज के लिए गए थे। वहां कुछ वृद्ध गायों की गायों की मौत की सूचना है। -मुन्नालाल यादव, मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी, संभल
क्या कहते हैं लोग
गोशाला के अंदर 15/ 16 गाय रोज मर रही हैं। शव को गड्ढा खोदकर यहीं पर दबा दिया जाता है। खाने पीने की कोई व्यवस्था नहीं है। रोज रात में भूख से तड़पती गायें शोर मचाती हैं। गांव वालों के पास खुद के ढोर हैं। फिर भी थोड़ा बहुत गांव के लोग दाना पानी डाल देते हैं। -अमर सिंह, ग्रामीण
गोशाला में पशुओं खाने-पीने की व्यवस्था ठीक नहीं है। सरकार से कोई मदद नहीं मिल रही है। प्रधान अपने स्तर से दाना पानी की व्यवस्था कर दे तो ठीक नहीं तो पूरी रात गायें भूख से बोलती हैं। यहां पर इतनी गायें मर चुकी हैं कि शायद पूरे इलाके 40 साल में इतनी मौत नहीं हुई होंगी। -दिनेश कुमार, ग्रामीण
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