Russia Ukraine War : यूक्रेन के राष्ट्रपति का दावा- मारियुपोल थिएटर के मलबे से निकाले गए 130 लोग
नई दिल्ली। रूस यूक्रेन के बीच जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जा रहे हमले में यूक्रेन के कई बड़े शहर तबाह हो गए हैं। वहीं दूसरी तरफ लाखों लोग देश छोड़ भाग रहे हैं। तबाही का आलम ये है कि युद्ध में संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यूक्रेन …
नई दिल्ली। रूस यूक्रेन के बीच जंग रुकने का नाम नहीं ले रही है। रूस द्वारा यूक्रेन पर किए जा रहे हमले में यूक्रेन के कई बड़े शहर तबाह हो गए हैं। वहीं दूसरी तरफ लाखों लोग देश छोड़ भाग रहे हैं। तबाही का आलम ये है कि युद्ध में संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यूक्रेन में अब तक कम से कम 816 नागरिकों की जान जा चुकी है। इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की का बयान सामने आया है।
शांति वार्ता शुरू करने का समय आ गया है
यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने शनिवार तड़के कहा कि यूक्रेन पर अपने आक्रमण में अधिक नुकसान से बचने के लिए मॉस्को के साथ ईमानदारी से शांति वार्ता शुरू करने का समय आ गया है। अन्यथा, रूस का नुकसान इतना बड़ा होगा कि कई पीढ़ियां उसे सुधार नहीं पाएंगी।
थिएटर के मलबे से 130 लोगों को बचाया गया
यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की ने कहा कि अब तक 130 लोगों को मारियुपोल थिएटर से बने शेल्टर के मलबे से बचाया गया है, जिस पर पहले रूस की ओर से बमबारी की गई थी। हालांकि उनमें से कुछ गंभीर रूप से घायल हैं लेकिन मरने वालों की कोई जानकारी नहीं है।
थिएटर पर रूस ने की बमबारी
बता दें कि शुक्रवार को रूसी सेना ने मारियुपोल शहर में एक थिएटर को ध्वस्त कर दिया है, जहां सैकड़ों लोगों ने शरण ले रखी थी। रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध को 20 दिन से अधिक गए हैं। जमीन पर दोनों ही देशों की सेना एक दूसरे के खिलाफ लगातार मुकाबला कर रही हैं।
अमेरिका समेत 6 देशों ने रूस पर लगाए आरोप
अमेरिका सहित छह पश्चिमी देशों ने रूस पर गलत सूचनाएं फैलाने, दुष्प्रचार करने, और यूक्रेन पर आक्रमण को जायज ठहराने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है। अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, अल्बानिया, आयरलैंड और नॉर्वे ने सुरक्षा परिषद के सत्र से पहले एक संयुक्त बयान में रूस पर यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि रूस ने लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन करते हुए जैविक हथियार कार्यक्रम बरकरार रखा है और रासायनिक हथियारों के उपयोग का एक अच्छी तरह से प्रलेखित इतिहास रहा है।
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