क्षेत्रीय सहमति के बाद ही अफगान तालिबान सरकार को मान्यता देगा पाकिस्तान

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इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने साफ किया है कि वह अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बारे में क्षेत्रीय देशों के बीच सहमति बनने के बाद ही इस सरकार को मान्यता देगा। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने यह बात कही है। डॉन की शनिवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी। अफगानिस्तान की …

इस्लामाबाद। पाकिस्तान ने साफ किया है कि वह अफगानिस्तान की तालिबान सरकार के बारे में क्षेत्रीय देशों के बीच सहमति बनने के बाद ही इस सरकार को मान्यता देगा। संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने यह बात कही है। डॉन की शनिवार को जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी।

अफगानिस्तान की वर्तमान तालिबान सरकार को किसी तरह की कूटनीतिक मान्यता नहीं देते हुए पूर्ववर्ती सरकार के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किये जाने को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में गुरुवार को प्रस्ताव पेश होने के बाद अफगानिस्तान में तालिबानी सरकार को मान्यता देने का मुद्दा एक बार फिर उछला। परिषद के 15 सदस्यों में से 14 ने प्रस्ताव के पक्ष में मत दिया जबकि रूस ने मतदान में हिस्सा ही नहीं लिया।

पाकिस्तान ने अभी तक अफगानिस्तान में तालिबान सरकार को मान्यता नहीं दी है हालांकि पाकिस्तान ही वह पहला देश था जिसने तालिबान सरकार की ओर लचीला रूख अपनाने की अपील पूरी दुनिया से की थी। संयुक्त राष्ट्र मे चीनी राजदूत झांग जुन ने कहा कि अगस्त 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था तब से लेकर अफगानिस्तान ने एक नये चरण में प्रवेश किया है और इस स्थिति से निपटने के लिए एक अधिक लचीला रूख अपनाने की दरकार है।

अफगानिस्तान के छह निकट पडोसी देशों चीन,ईरान , पाकिस्तान, तुकर्मेनिस्तान, ताजकिस्तान और उज़बेकिस्तान अगले माह चीन में होने जा रही बैठक में हिस्सा लेंगे और बैठक के दौरान तालिबान सरकार को मान्यता का मुद्दा सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में से एक होगा। इस बैठक में तालिबानी दल भी हिस्सा लेगा। पाकिस्तानी राजदूत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र में गुरुवार को स्वीकृत प्रस्ताव में एक कमी रही कि इसमें अफागिस्तान की सरकार का वास्तव में कोई जिक्र नहीं किया गया हालांकि इसमें कहा गया कि उचित सत्ताधारी से बात करने की जरूरत को रेखांकित किया गया। भारत और फ्रांस ने किसी भी वास्तविक प्राधिकारी या सत्ताधारी से बात करने का विरोध किया है और इसे आदेश से बाहर रखने का कहा है।

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