सीतापुर: फसलों को नुकसान पहुंचा रहे बेसहारा पशु, किसान परेशान

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सीतापुर। कस्बा समेत गोंदलामऊ विकास क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में घूम रहे छुट्टा पशुओ का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि किसान खेती करने से घबरा रहे हैं। क्योंकि कड़ी मेहनत के बीच किसानों द्वारा बोई गई गन्ना जैसी फसलों को बेसहारा मवेशी बर्बाद कर रहे हैं। लगातार हो रही गौवंशीय पशुओं की …

सीतापुर। कस्बा समेत गोंदलामऊ विकास क्षेत्र के लगभग सभी गांवों में घूम रहे छुट्टा पशुओ का खौफ इस कदर बढ़ गया है कि किसान खेती करने से घबरा रहे हैं। क्योंकि कड़ी मेहनत के बीच किसानों द्वारा बोई गई गन्ना जैसी फसलों को बेसहारा मवेशी बर्बाद कर रहे हैं।

लगातार हो रही गौवंशीय पशुओं की उपेक्षा के चलते इस समय इनका कोई भी तलाशी नहीं है। यह समस्या बीते कुछ वर्षों से तो ज्यादा ही भयावह हो गई है। पेट की आग बुझाने के लिए यह मवेशी किसानों के खेतों में बोई गई फसलों की ओर रुख करते हुए फसलें बर्बाद कर जाते हैं।

इन बेसहारा घूम रहे पशुओं से फसलों को बचाने के लिए किसानों द्वारा किए जा रहे प्रयास नाकाफी हो रहे है। गौवंशीय पशु जो हाल के वर्षों में किसानों के ही पालतू रहे हैं। उन्हें किसानों द्वारा ही छुट्टा छोड़ दिया गया।

इसके मद्देनजर सामाजिक चिंतक सिद्धिकुमार शुक्ल द्वारा सीएम पोर्टल पर शिकायत की गई थी। जिस पर 28 जनवरी को मुख्य पशुचिकित्साधिकारी द्वारा आख्या लगाई गई है। जिसमें जन सहयोग के आधार पर निराश्रित पशुओं को धरौली स्थित गौशाला भिजवाने की रिपोर्ट लगाई गई। इसके अलावा ज़िक्र किया गया कि यदि गौशाला बनवाना चाहते हैं, तो ग्राम प्रधान व खंड विकास अधिकारी द्वारा जिला स्तर पर प्रस्ताव भेजने संबंधी जानकारी दी गई है।

स्वयं संरक्षित करने पर पशु पालकों को मिलती है सरकारी मदद

मुख्यमंत्री निराश्रित जनसहभागिता आधारित योजना गौवंश संरक्षण कार्यक्रम के अंतर्गत इच्छुक ग्रामीण निराश्रित गौवंश को (अधिकतम चार पशु) स्वयं संरक्षित कर सकते हैं। सरकार द्वारा उन्हें 900 रुपए प्रति माह भरण पोषण के लिए डीबीटी के माध्यम से दी जाएगी। योजना में शामिल होने के लिए आवेदन पशुचिकित्सालय के कार्यालय से प्राप्त किए जा सकते हैं। इस प्रकार गांवों में निराश्रित पशुओं की समस्या का आसानी से निराकरण हो सकता है। किसानों को नहीं है इस योजना की जानकारी। जागरुकता के अभाव में यह योजना केवल फाईलों में ही कैद हो कर रह गई।

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