जन्म और मृत्यु का पंजीकरण एक जरूरी प्रक्रिया : डॉ. राजेश हर्षवर्धन
लखनऊ। राजधानी के एसजीपीजीआई में आज जन्म मृत्यु अधिनियम सिद्धांत और व्यवहार विषय पर एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि किसी भी शख्स के जन्म और मृत्यु का पंजीकरण होना जरूरी है और जो एक व्यावहारिक प्रक्रिया …
लखनऊ। राजधानी के एसजीपीजीआई में आज जन्म मृत्यु अधिनियम सिद्धांत और व्यवहार विषय पर एक राज्य स्तरीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर एसजीपीजीआई के अस्पताल प्रशासन विभाग के प्रमुख डॉ. राजेश हर्षवर्धन ने बताया कि किसी भी शख्स के जन्म और मृत्यु का पंजीकरण होना जरूरी है और जो एक व्यावहारिक प्रक्रिया भी है, जन्म और मृत्यु के पंजीकरण से जनसंख्या के आंकड़े भी सुरक्षित होते हैं, जिससे उस जनपद से लेकर राज्य तथा देश की आबादी की सही जानकारी मिलती है।
इसके अलावा शख्स के बारे में भी सही जानकारी उपलब्ध रहती है, यह आंकड़े परिवार से लेकर सरकार तक के पास सुरक्षित रहते हैं, उन्होंने जन्म मृत्यु के पंजीकरण की आवश्यकता तथा उसकी उपयोगिता के बारे में बताते हुए कहा की पंजीकरण होने से आवश्यकता अनुसार इसका लाभ लिया जा सकता है,इस दौरान कार्यक्रम में मौजूद अन्य वक्ताओं ने अस्पताल के कर्मचारियों को किसी भी शख्स के जन्म और मृत्यु के प्रमाण पत्र को निर्गत करने से पहले तमाम सावधानियां बरतने की सलाह दी।
वक्ताओं ने नागरिक पंजीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि यह मौलिक अधिकारों के लिए भी अति आवश्यक है ,साल 1969 में जन्म और मृत्यु के पंजीकरण के लिए एक केंद्रीय अधिनियम बनाया गया था। इस मौके पर पीजीआई के सीएमएस डॉ. गौरव अग्रवाल, निदेशक और संयुक्त रजिस्ट्रार जनरल सिविल रजिस्ट्रेशन सिस्टम आईएएस शीतल वर्मा, निदेशक पीजीआई डॉ. आर के धीमन उपस्थित रहे।
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