पीलीभीत: निवेशकों की कमाई उड़ाकर जालसाज बना प्रापर्टी डीलर
पीलीभीत, अमृत विचार। निवेशकों से जमा कराई मोटी रकम हड़पने के बाद जालसाज ने कंपनी बंद कर दी। खुद प्रापर्टी डीलर बनकर करोड़ों रुपये कमा डाले। तकादा करने पर लंबे समय तक निवेशकों से टालमटोल करता रहा। फिर रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। दोबारा तकादा करने पर जान से मारने की धमकी देकर भगा …
पीलीभीत, अमृत विचार। निवेशकों से जमा कराई मोटी रकम हड़पने के बाद जालसाज ने कंपनी बंद कर दी। खुद प्रापर्टी डीलर बनकर करोड़ों रुपये कमा डाले। तकादा करने पर लंबे समय तक निवेशकों से टालमटोल करता रहा। फिर रुपये लौटाने से इनकार कर दिया। दोबारा तकादा करने पर जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया। कोर्ट के आदेश पर सुनगढ़ी पुलिस ने दो पीड़ितों की ओर से जालसाज के खिलाफ धोखाधड़ी, अमानत में खयानत और धमकाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की हैं।
सुनगढ़ी थाना क्षेत्र के रूपपुर कृपा गांव निवासी कलावती पत्नी होरीलाल की ओर से दर्ज की गई रिपोर्ट में बताया गया कि गांव के ही भगीरथ वर्मा का उनके घर आना-जाना था। साल 2013 में आरोपी ने बताया कि उसकी एमएचए प्रापर्टी इंडिया लिमिटेड कंपनी है। इसका कार्यालय गांधी स्टेडियम रोड पर है।
कंपनी पांच साल तीन माह के बाद जमा किए गए रुपये को दोगुना वापस करेगी। इस पर उन्होंने पॉलिसी करा ली। तय समय के हिसाब से रुपये जमा करते रहे मगर, जब रुपये वापस करने का समय आया तो आरोपी ने कंपनी बंद कर दी। उनका 4,58,400 रुपये हड़प कर लिया। कई दिन तक टालमटोल की गई। उसके बाद रुपये लौटाने से इनकार कर धमकी देकर भगा दिया।
इसी आरोपी पर एक रिपोर्ट अमरिया थाना क्षेत्र के सद्दरपुर गांव निवासी अंगनलाल की ओर से दर्ज कराई गई है। शिकायतकर्ता के अनुसार उसने 2012 में आरोपी भगीरथ की कंपनी में एक लाख 44 हजार निवेश किया था। 31 दिसंबर 2018 को समय सीमा पूरी हो गई तो रकम वापस लेने के लिए पहुंचे लेकिन आरोपी ने टालमटोल कर दी, फिर धमकी देकर भगा दिया।
आरोप लगाया कि इसी तरह से करोड़ों रुपये की हेरा-फेरी जालसाज ने की है और खुद प्रापटी डीलकर बनकर कमाई करता चला आ रहा है। फिलहाल कोर्ट के आदेश के बाद अब जालसाज पर दो मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इंस्पेक्टर सुनगढ़ी बलवीर सिंह ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर ली गई है। विवेचना में तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
जांच के नाम पर मामला दबाती गई पुलिस
कंपनी बनाकर निवेशकों की मेहनत की कमाई उड़ाने वाले जालसाज पर अब कोर्ट के आदेश पर भले ही दो एफआईआर दर्ज करा दी गई हो लेकिन पुलिस की कार्यशैली पूर्व में संदेहास्पद ही रही। पीड़ित पक्ष की ओर से दिए गए प्रार्थना पत्रों में स्पष्ट कहा गया है कि उन्होaने पहले थाना पुलिस और फिर अधिकारियों से शिकायतें की मगर, हर बार जांच के नाम पर मामला दबा दिया गया। उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो सकी।
तराई में लंबे समय से चल रहा धंधा
जालसाजों के लिए तराई काफी मुफीद साबित हुई है। ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिसमें कंपनी बनाकर मुख्य मार्गों पर कार्यालय खोले गए। वहां पर बेखौफ होकर जालसाजी का धंधा चलाया जाता रहा। फिर जब रुपये लौटाने की बारी आई तो कार्यालय बंद कर भाग गए। अधिकांश में एजेंट ने ही अपनी गर्दन फंसने पर आगे आकर तहरीर दी और एफआईआर दर्ज कराई मगर, अधिकांश मामले एफआईआर के बाद भी दबा दिए गए।
हल्ला होने पर अधिकारियों ने थानाध्यक्ष, चौकी प्रभारी और बीट सिपाहियों की इसे लेकर जिम्मेदारियां तय की मगर, यह भी धरातल पर नहीं हो सका। कुछ दिन के बाद हंगामा शांत होते ही पुलिस की सक्रियता भी खत्म होती गई। अभी भी तमाम ऐसे पीड़ित चक्कर लगा रहे हैं, जिनकी मेहनत की कमाई जालसाज उड़ा चुके हैं।
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