लखनऊ: सरकारी अस्पतालों की आयुष विंग में दवा की भारी कमी, मरीज परेशान

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में बनी आयुषविंग में दवाओं की भारी कमी है,जरूरी दवायें स्टोर में नहीं है,ऐसे में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सिर्फ चिकित्सकीय परामर्श ही मिल पा रहा है,दवाओं के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है। कुल मिलाकर जिम्मेदार सरकार की मंशा पर पानी फेरने …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सरकारी अस्पतालों में बनी आयुषविंग में दवाओं की भारी कमी है,जरूरी दवायें स्टोर में नहीं है,ऐसे में इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को सिर्फ चिकित्सकीय परामर्श ही मिल पा रहा है,दवाओं के लिए मरीजों को भटकना पड़ रहा है।

कुल मिलाकर जिम्मेदार सरकार की मंशा पर पानी फेरने का काम कर रहे हैं,सीएमओ बताते हैं कि हम जीवन रक्षक दवाओं की उपलब्धता को बनाये रखते हैं,रही बात आयुष विंग की तो वहां पर टेंडर न हो पाने के चलते दवा नहीं पहुंच रही है,जैसे ही आचार संहिता हटेगी,उसके बाद ही दवा उपलब्ध करा दी जायेगी।

दरअसल, राजधानी के बलरामपुर, डफरिन, लोकबंधू, सिविल, झलकारी बाई, लोहिया संस्थान समेत कई सरकारी अस्पतालों में करीब आठ साल पहले आयुष विंग बनायी गयी थी, यहां पर होम्योपैथ, यूनानी, आयुर्वेद तथा योग के चिकित्सकों की तैनाती हुयी थी। इस विंग से पेट, मधुमेह, रक्तचाप, जोड़ों के दर्द के गंभीर मरीजों को खासा लाभ मिल रहा था, लेकिन बीते एक साल का समय होने को आया किसी भी आयुष विंग को दवा नहीं मिल पा रही है।

होम्योपैथ, आयुर्वेद तथा यूनानी के चिकित्सक मरीज को परामर्श तो दे रहे हैं, लेकिन दवा के नाम पर स्टोर में मौजूद दवा ही मरीजों को मिल पा रही है। दवाओं की कमी के कारण जहां पहले रोजाना एक चिकित्सक के पास 25 से 30 मरीज इलाज के लिए पहुंचते थे,आज उन मरीजों की सख्या घट कर महज दस से बारह रह गयी है। कुछ अस्पतालों की आयुष विंग में तो पूरे दिन सन्नाटा पसरा रहता है।

इलाज के लिए पहुंचे मरीजों को युनानी दवाओं में हब्ब-ए बुखार, कुर्स जिया जैसी प्रमुख दवायें नहीं मिल पा रही हैं, वहीं आयुर्वेद की बात करें तो पुनर्नवा काढ़ा,लवण भास्कर चूर्ण,आरोग्य वर्धनी,चन्द्र प्रभावटी जैसी जरूरी दवायें नहीं मिल पा रही हैं,यही हाल होम्योपैथ की दवाओं का भी बताया जा रहा है। दवाओं के न होने से मरीजों की समस्या बढ़ती जा रही है।

अस्पतालों में बनी आयुष विंग के संचालन का जिम्मा एनएचएम के पास है,कोरोना काल के बाद से ही आयुष विंग के बदहाली के दिन शुरू हो गये थे, दवाओं की आपूर्ति उस दौर से ही बाधित बतायी जा रही है,बीच-बीच में कुछ दवाओं को दिया गया था, लेकिन वह नाकाफी साबित हुयीं।

बताया जा रहा है कि आयुष विंग में तीनों पैथी के लिए दवाओ का बजट अलग-अलग आता है,लेकिन धनराशी समान है,इस  बजट में भी भारी कटौती हुयी है। सीएमओ डा.मनोज अग्रवाल बताते हैँ कि आचार संहिता के हटते ही दवाओं की कमी को पूरा कर दिया जायेगा।

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