बाराबंकी: जिला अस्पताल में खराब पड़ा वाटर कूलर, पारा बढ़ने से बेहाल हुआ जनजीवन

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Edited By Amrit Vichar
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बाराबंकी। लोग गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। थोड़ी देर भी धूप में रहना भी सहन नहीं हो रहा है। हीटवेव जैसे हालात बनने लगे हैं। पिछले 3 दिन से पारा 40 डिग्री सेल्सियस रहने के कारण अप्रैल माह में ही मई जैसे हालात हैं। बुधवार को जिले का अधिकतम पारा जहां 40 डिग्री सेल्सियस …

बाराबंकी। लोग गर्मी से बेहाल हो रहे हैं। थोड़ी देर भी धूप में रहना भी सहन नहीं हो रहा है। हीटवेव जैसे हालात बनने लगे हैं। पिछले 3 दिन से पारा 40 डिग्री सेल्सियस रहने के कारण अप्रैल माह में ही मई जैसे हालात हैं। बुधवार को जिले का अधिकतम पारा जहां 40 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया वहीं न्यूनतम पारा 21 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग की माने तो इस बार अप्रैल माह में ही लोगों को लू का सामना करना पड़ेगा।

दरअसल इस बार मार्च महीने में ही तापमान में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई। 18 मार्च को होली के बाद तापमान लगातार बढ़ता ही गया। 20 मार्च के बाद तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के आसपास आया और फिर 25 मार्च के बाद तापमान 36 से 38 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। उमस और धूप से लोग मार्च के महीने में ही परेशान होने लगे थे। अप्रैल का पहला सप्ताह चल रहा है मगर हालात मई जैसे हैं। सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक तेज धूप से बचने के लिए लोग तरह-तरह के उपाय कर रहे हैं।

इसी कारण गमछा, स्कार्फ और छाते की बिक्री बढ़ गई है। इतना ही नहीं एसी और कूलर का प्रयोग तेजी से बढ़ा है जिससे अप्रैल माह में ही विद्युत की मांग बढ़ गई है। बिजली विभाग के अधिकारी भी स्वीकार करते हैं कि जिस तरह बिजली की मांग बढ़ी है वह मई-जून में होती थी। मौसम विभाग के आंकड़ों पर गौर करें तो सुबह 10 बजे का तापमान 35 डिग्री सेल्सियस के पार जा रहा था। दोपहर में यह तापमान बढ़कर 39 डिग्री के पार चला गया। मौसम विभाग के अनुसार अप्रैल के पहले सप्ताह में ही तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार जाने की संभावना है।

वाटर कूलर खराब हैंडपंप भी नहीं दे रहे हैं पानी

बढ़ती हुई तपिश के के बीच लोग सड़क किनारे लगे गिरने के जूस बर्फ से बने ठंडे शर्बत पीने के लिए बेताब दिख रहे। शहर में शीतल जल तो दूर की बात है जो हैंड पंप लगे हैं या तो वो पानी नहीं दे रहे या फिर पानी के साथ बालू फेंक रहे। शहरीय क्षेत्र में लगभग चार सौ हैंडपंप लगे हैं जिनमें से लगभग 100 से अधिक हैंडपंप खराब जल रहे हैं। हाट बाजार में रोज मर्रा की जरूरतों के लिए और स्कूल कालेज जाने वाले छात्रों को प्रयास लगने पर उन्हें या तो बोतल बंद पानी का सहारा लेना पड़ता है।हैंडपंप खराब

पुरूष जिला चिकित्सालय और इमरजेंसी के ठीक सामने लगे शीतल जल पेय का आलम ये है कि महीनों से खराब पड़े हैं । इमरजेंसी के सामने पार्क में लगा हैंडपंप महीनों से खराब पड़ा है ऐसे में मरीजों और तीमारदारों को दिखाने वाले लोगों को इस भीषण गर्मी में प्यास लगने पर परिसर के बाहर जाना पड़ता है ।

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