पीलीभीत: फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों पर 87 लाख का अनुबंध गठित, भुगतान जारी
अंकित मिश्रा, अमृत विचार। यहां तहजीब बिकती है यहां फरमान बिकते हैं… जरा तुम दाम तो बोलो यहां ईमान बिकते हैं। ये चंद लाइनें पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार के खेल की कहानी बयां करती हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए महीनों से चक्कर लगवाने वाले पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने पहले तो अपने चहेते ठेकेदार का 24 घंटे में …
अंकित मिश्रा, अमृत विचार। यहां तहजीब बिकती है यहां फरमान बिकते हैं… जरा तुम दाम तो बोलो यहां ईमान बिकते हैं। ये चंद लाइनें पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार के खेल की कहानी बयां करती हैं। रजिस्ट्रेशन के लिए महीनों से चक्कर लगवाने वाले पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरों ने पहले तो अपने चहेते ठेकेदार का 24 घंटे में पंजीकरण कर दिया और जांच में अनुभव प्रमाण पत्र फर्जी पाए जाने के बावजूद फर्म के नाम दूसरे दिन 87 लाख रुपये का सेलेक्शन बॉन्ड बना दिया और मार्च की लूट में भुगतान भी जारी कर दिया।
जबकि इससे पहले भी फर्जी एफडीआर पर बीसलपुर-बरेली सड़क निर्माण का करोड़ों रुपये का अनुबंध गठित करने के मामले में तत्कालीन अधीक्षण अभियंता, एक्सईएन सहित सात इंजीनियरों पर निलंबन की गाज गिर चुकी है तो दूसरी ओर मुख्यमंत्री के ड्रमंड, नूरानपुर दौरों में नियमों के विपरीत ठेकेदारों को करोड़ों रुपए का भुगतान करने के मामले में जांच अभी जारी है। मामला शासन तक पहुंचने के बाद पीडब्ल्यूडी में हड़कंप मच गया है।
पीडब्ल्यूडी में भ्रष्टाचार रोकने के लिए योगी सरकार ने भले ही प्रहरी साफ्टवेयर लागू करने से लेकर चाहे जितने भी जतन किए हों लेकिन भ्रष्टाचार का सिलसिला लगातार जारी है। ताजा मामला मुरादाबाद की हिमगिरि कांस्ट्रक्शन का है। प्रमुख अभियंता कार्यालय पीडब्ल्यूडी लखनऊ के इंजीनियरों ने एक मार्च 2019 को मुरादाबाद की हिमगिरि कांस्ट्रक्शन का रोड साइनेज कार्य के लिए ए श्रेणी में पंजीकरण कर दिया तो रजिस्ट्रेशन के दूसरे ही दिन यानि दो मार्च 2019 को अधीक्षण अभियंता पीलीभीत-बदायूं वृत ने राज्य योजना वर्ष 2018-19 के अंतर्गत हिमगिरि कंस्ट्रक्शन के नाम रोड सेफ्टी कार्य के लिए 86 लाख 99 हजार 856 रुपए का सेलेक्शन बॉन्ड बना दिया।
इस खेल में शामिल इंजीनियरों ने रजिस्ट्रेशन और सेलेक्शन बांड बनाने से पहले ठेकेदार के एफडीआर, हैसियत, चरित्र और अनुभव प्रमाण पत्रों का सत्यापन कराना तक मुनासिब नहीं समझा। इधर, पूरे मामले की जब शासन में शिकायत की गई तो ठेकेदार की ओर से रजिस्ट्रेशन के वक्त उपलब्ध कराए गए अनुभव प्रमाण पत्र जांच में फर्जी पाए गए। इस पर भी इंजीनियरों ने फर्जीवाड़े के आरोपी ठेकेदार के खिलाफ कारवाई करने के बजाय हिमगिरि कांस्ट्रक्शन को मार्च की लूट में 87 लाख रुपये का भुगतान जारी कर दिया।
इधर, हिमगिरि कांस्ट्रक्शन के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच में संबंधित कार्यालयों को पत्र भेजे गए। इसके जवाब में 10 नवंबर 2020 को धर्मराज राम अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद शेरकोट (बिजनौर) के कार्यालय से जारी पत्र में कहा गया है कि इस कार्यालय द्वारा हिमीगिरी कांस्ट्रक्शन को कोई अनुभव प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया है। इसी तरह 18 दिसंबर 2020 को निर्भय सिंह अधिशासी अभियंता निर्माण खंड-1 पीडब्ल्यूडी दुगडडा (पौड़ी गढ़वाल) के कार्यालय से जारी पत्र में भी हिमगिरि कांस्ट्रक्शन द्वारा रजिस्ट्रेशन में लगाए गए अनुभव प्रमाण पत्र उनके कार्यालय से निर्गत किए गए हैं।

पूरे मामले में पीडब्ल्यूडी बरेली के तत्कालीन चीफ इंजीनियर और अधीक्षण अभियंता से स्पष्टीकरण भी तलब किया गया लेकिन भ्रष्टाचार के भवर में फंस कर पूरे मामले ने दम तोड़ दिया। अब एक बार फिर मामले की शिकायत शासन से होने के बाद पीडब्ल्यूडी के भ्रष्ट इंजीनियरों में हड़कंप मच गया है।
रोड साइनेज कार्य का रजिस्ट्रेशन प्रमुख अभियंता कार्यालय पीडब्ल्यूडी लखनऊ से किया जाता है। हिमगिरि कांस्ट्रक्शन के अनुभव प्रमाण पत्रों की जांच वहीं के कार्यालय स्तर से से कराई गई होगी। कारवाई के बारे में मुझे जानकारी नही है। – एमएम निसार, मुख्य अभियंता, पीडब्ल्यूडी, बरेली।
फर्जी एफडीआर पर अनुबंध गठित करने पर सात इंजीनियर हुए थे निलंबित
केंद्रीय मार्ग निधि के अंतर्गत वर्ष 2016 में 25 करोड़ की लागत से बनने वाली बीसलपुर-बरेली सड़क निर्माण का ठेका लखनऊ की एवरग्रीन इंफ्राबिल्ड को मिला था। इसमें फर्जी एफडीआर पर करोड़ों रुपए का अनुबंध गठित करने पर तत्कालीन अधीक्षण अभियंता एसके आर्या, अधिशासी अभियंता राजकुमार राम, ओपी वर्मा, एई हेमंत कुमार, भूकेश सहित जेई लाखन सिंह, गुरमीत सिंह पर निलंबन की गाज गिरी थी। इस मामले की जांच काफी समय तक ईओडब्ल्यू ने भी की थी लेकिन सभी इंजीनियर अलग अलग शहरों में मलाईदार पदों पर तैनात कर दिए गए है।
मुख्यमंत्री के दौरों में भी भ्रष्टाचार, जांच जारी
नवंबर 2019 में बिलसंडा के नूरानपुर में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दौरा किया था। उस वक्त भी नियमों के विपरीत पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर ने अपने चहेते ठेकेदारों के नाम 1.5 करोड़ रुपए से अधिक का भुगतान जारी किया था। इधर, ड्रमंड राजकीय इंटर कॉलेज में भी सीएम के दौरे पर 1.75 करोड़ रुपए का भुगतान नियम विरुद्ध करने की तैयारी थी। अमृत विचार ने जब भ्रष्टाचार से जुड़े इन दोनों प्रकरणों को प्रमुखता से प्रकाशित किया तो प्रमुख सचिव पीडब्ल्यूडी नितिन रमेश गोकर्ण ने मामलों में जांच के आदेश दिए है जिसकी जांच अभी जारी है।
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