यूपी: स्वास्थ्य विभाग में तैनात आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, वेतन का हुआ निर्धारण

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लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। बताया जा रहा है कि शासन की तरफ से चिकित्सा विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के कुछ पदों का वेतन निर्धारण किया गया है। दरअसल,संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ द्वारा उच्च न्यायालय में दायर वाद में आदेश …

लखनऊ। स्वास्थ्य विभाग में आउटसोर्सिंग के माध्यम से तैनात स्वास्थ्य कर्मचारियों के लिए राहत भरी खबर है। बताया जा रहा है कि शासन की तरफ से चिकित्सा विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के कुछ पदों का वेतन निर्धारण किया गया है। दरअसल,संयुक्त स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ द्वारा उच्च न्यायालय में दायर वाद में आदेश के बाद शासन ने चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के कुछ पदों का वेतन निर्धारण किया।

अपर मुख्य सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य अमित मोहन प्रसाद ने शासनादेश जारी करते हुए महानिदेशक चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण को निर्देश दिया है कि विभिन्न जनपदों में मिल रहे वेतनमान तथा चिकित्सा स्वास्थ्य महानिदेशालय द्वारा निर्धारित वेतनमान में जो सबसे अधिक वेतन हो वही वेतन सभी चिकित्सालय में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को दिया जाए। साथ ही यह भी साफ किया है कि यह वेतन उत्तर प्रदेश श्रम विभाग के न्यूनतम मजदूरी अधिनियम के अंतर्गत मिल रहे न्यूनतम वेतन से अधिक होगा।

न्यायालय के आदेश के बाद अब शासन ने भी चिकित्सा स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को श्रम विभाग के न्यूनतम वेतनमान से अधिक वेतन का आदेश जारी किया। इससे लगभग 50000 कर्मचारी लाभान्वित होंगे तथा कर्मचारियों के वेतन में समानता भी आएगी। अभी तक विभिन्न चिकित्सालयों में अलग-अलग वेतनमान दिया जा रहा था। नए आदेश के मुताबिक वार्ड बॉय तथा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी को 10706 रुपये तथा सफाई कर्मचारियों को 9999 रुपए कंप्यूटर सहायक को 12844 रुपए प्रतिमाह वेतन दिया जाएगा।

जिसमें से किसी भी प्रकार की कटौती नही होगी।कर्मचारियों को ईपीएफ ईएसआई तथा सेवा प्रदाता फर्म का सर्विस चार्ज अतिरिक्त भुगतान विभाग द्वारा किया जाएगा। स्वास्थ्य आउटसोर्सिंग संविदा कर्मचारी संघ के महामंत्री सच्चिता नन्द मिश्रा ने बताया कि कर्मचारी संगठन की यह सबसे बड़ी जीत है। इससे कर्मचारियों को लाभ होगा तथा वेतन में समानता होगी एवं अवैध कटौती नहीं होगी।

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