बाराबंकी: श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाई गई बैसाखी
बाराबंकी। पंजाबी संस्कृति से रचा बसा बैसाखी पर्व का उल्लास गुरुवार को शहर के लाजपत नगर स्थित गुरुद्वारे में नजर आया। गुरुद्वारे में शबद कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा की मिश्री लूटने की सुखद अनुभूति के दृश्य नजर आए। गुरुद्वारे में दर्शन करने प्रदेश के खाद्य रसद मंत्री सतीश शर्मा गुरुद्वारे में दर्शन कर …
बाराबंकी। पंजाबी संस्कृति से रचा बसा बैसाखी पर्व का उल्लास गुरुवार को शहर के लाजपत नगर स्थित गुरुद्वारे में नजर आया। गुरुद्वारे में शबद कीर्तन के साथ श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धा की मिश्री लूटने की सुखद अनुभूति के दृश्य नजर आए। गुरुद्वारे में दर्शन करने प्रदेश के खाद्य रसद मंत्री सतीश शर्मा गुरुद्वारे में दर्शन कर उपस्थित लोगों से गुरु गोविंद सिंह के बताएं मार्ग पर चलने की अपील की।
प्रधान भूपेंद्र सिंह और सरदार रतन सिंह ने मंत्री को साफा बांध उनका स्वागत किया सरदार चरनजीत सिंह, सरदार मनमीत और परमजीत सिंह ने शाल भेंट कर मंत्री सतीश शर्मा का अभिनन्दन किया । बताते चले कि सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पूरब एवं खालसा सृजना दिवस के मौके पर गुरूद्वारा सिंघ सभा बाराबंकी की तरफ से गुरुद्वारा परिसर में शब्द गुरबाणी एवं लंगर का आयोजन किया गया जिसमें रागी जगजीत सिंह बबीहा दिल्ली वाले द्वारा शब्द गुरबाणी द्वारा संगत को निहाल किया।
इतिहास की अगर बात करें तो सिखों के प्रथम गुरु श्री गुरु नानक देव जी का जन्म बैशाखी वाले दिन ही हुआ था। उनके प्रकाश पूरब के दिन ही 14 अप्रैल सन् 1699 को सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोविंद सिंह जी द्वारा सिखों को अमृतपान करा कर सिख सृजना दिवस के रूप में इस दिन की स्थापना की। इसी दिन श्री गुरु गोविंद सिंह जी ने सिख पंथ को खालसा पंथ के रूप में स्थापित किया।
खालसा का मतलब होता है शुद्ध यानी कि खालिस। उन्होंने प्रथम 5 सिखों को अमृत पान कराया जोकि पंज प्यारे के रूप में आज भी जाने जाते हैं। उनका मकसद सिख पंथ को अध्यात्मिक के साथ-साथ रक्षात्मक भी तैयार करना था जो मौका पड़ने पर अपने पंथ की तो रक्षा करें ही करें साथ ही साथ अन्य धर्म की रक्षा के लिए तैयार रहें।
यह भी पढ़ें: बहराइच: अलग-अलग गांवों से नौ लोग गिरफ्तार
