बाराबंकी: 4558 दिव्यांग बच्चों की बेरंग दुनिया में 29 शिक्षकों के भरोसे रंग भरने की कोशिश

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बाराबंकी। ख्वाब उनके भी होते हैं जिनकी आंखें नहीं होती। जो सुन नहीं सकते और देख भी नहीं सकते। जिनकी आंखें है वह ख्वाब में भी कल्पना नहीं कर सकते आंखों के बिना जिंदगी कैसी होती है। और न सुन पाने की वजह से जिंदगी कैसे बोझ बन जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग की सूची …

बाराबंकी। ख्वाब उनके भी होते हैं जिनकी आंखें नहीं होती। जो सुन नहीं सकते और देख भी नहीं सकते। जिनकी आंखें है वह ख्वाब में भी कल्पना नहीं कर सकते आंखों के बिना जिंदगी कैसी होती है। और न सुन पाने की वजह से जिंदगी कैसे बोझ बन जाती है। बेसिक शिक्षा विभाग की सूची में ऐसे ही 4558 बच्चे दर्ज है और 4562 बच्चों को चिन्हित किया गया है। जो अपनी बेरंग दुनिया में शिक्षित बन कर रंग भरने की जेद्दोजेहद में लगे हैं। और शिक्षित होकर अपने जीवन में रंग भरने में लगे हैं।

ऐसे बच्चों को शिक्षित करने के लिए स्पेशल एजुकेटर तैनात किये जाते हैं। जिले में सिर्फ 29 एजुकेटर ही है जबकि बच्चे 4558 है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई उस तरह नहीं हो पा रही है जैसे सामान्य बच्चों की होती है। एजुकेटर को ब्रेललिपि में पढ़ाने की योग्यता हासिल है। ये कैंप लगा कर स्कूलों में बच्चों को पढ़ाते हैं। ताकि सभी बच्चों में कुछ न कुछ ज्ञान पहुंच सके। इसके लिए ब्लाकवार स्कूल चिन्हित कर पढ़ाई कराई जा रही है।

सामान्य शिक्षक हैं पर दिव्यांग बच्चों कि संवार रहे जिंदगी

सलोनी शर्मा बनीकोडर ब्लॉक में एजुकेटर के रूप में तैनात हैं । सामान्य शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर दिव्यांग बच्चों के लिए शिक्षक तैयार करती है। वह वहां नोडल के रूप मे तैनात हैं । कुछ शिक्षकों से जब से बात हुई उनका कहना है वह ब्रेललिपि में तो प्रशिक्षित नहीं लेकिन उन्होंने ऐसे बच्चों को पढ़ाने का प्रशिक्षण लिया है उसके आधार पर ही शिक्षा दे रहे बच्चों में सुधार है वह तेजी से सीख रहें।

स्पेशल बेटियों की स्पेशल मैम है पूर्णिमा मिश्रा

फतेहपुर के प्राइमरी स्कूल की शिक्षिका पूर्णिमा मिश्रा स्पेशल बेटियों की स्पेशल मैम है। पूर्णिमा विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए कार्य करती हैं। उन्होंने एक अभियान शुरू किया है।इसके तहत उन्होंने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों की सूची तैयार कर रही है और फिर उन बच्चों को स्कूल में प्रवेश कराने के लिए प्रेरित करेगी पूर्णिमा कहती हैं इसकी प्ररेणा उन्हें जिला नोडल अधिकारी सुधा जायसवाल से मिली।

हर स्कूल में तैनात कर दिया एक नोडल

नोडल अधिकारी सुधा जायसवाल ने बताया कि हर स्कूल में स्पेशल बच्चे नहीं है। जिन स्कूलों में है वहां उनकी पढ़ाई बाधित ना हो इसके लिए वही के एक शिक्षक को बेसिक प्रशिक्षण देकर नोडल तैनात कर दिया है यह शिक्षक उन बच्चों को बोलकर पढ़ाते हैं। इसी दौरान स्पेशल एजुकेटर जब पहुंचते हैं तो उन्हें ब्रेल लिपि के माध्यम से पढ़ाते हैं।

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