मुरादाबाद : दूध के साथ की जाती थी तमंचे की सप्लाई, चार गिरफ्तार
मुरादाबाद, अमृत विचार। सिविल लाइंस पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार करके अवैध शस्त्र फैक्ट्री का खुलासा किया है। मौके से पांच बने और 10 अधबने तमंचे, एक लाइसेंसी डबल बैरल और एक पोनिया बंदूक, भारी मात्रा में कारतूस तथा तमंचे बनाने के उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इन अवैध हथियारों की सप्लाई दूध …
मुरादाबाद, अमृत विचार। सिविल लाइंस पुलिस ने चार लोगों को गिरफ्तार करके अवैध शस्त्र फैक्ट्री का खुलासा किया है। मौके से पांच बने और 10 अधबने तमंचे, एक लाइसेंसी डबल बैरल और एक पोनिया बंदूक, भारी मात्रा में कारतूस तथा तमंचे बनाने के उपकरण भी बरामद किए गए हैं। इन अवैध हथियारों की सप्लाई दूध के साथ की जाती थी। इस गिरोह के तार आसपास के जनपदों के अलावा उत्तराखंड से भी जुड़े हैं।
घटना का खुलासा करते हुए एसपी सिटी अखिलेश भदौरिया, एएसपी सागर जैन और सीओ क्राइम अपेक्षा निंबाडिया ने बताया कि मुखबिर की सूचना पर सिविल लाइंस पुलिस ने टिकली फैक्ट्री के बराबर में टावर के सामने खाली पड़े खंडहरनुमा मकान में छापा मारा। पुलिस ने घेराबंदी करते हुए ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के गांव रानी नागल निवासी सत्यवीर सिंह, कांठ थाना क्षेत्र के गांव मुजफ्फरपुर टांडा निवासी कृष्ण कुमार उर्फ भीमा, कांठ के ही गांव खलीलपुर कदीम निवासी भानू प्रताप और छजलैट थाना क्षेत्र के गांव संजरपुर निवासी कमल हसन को मौके से दबोच लिया।
पुलिस ने मौके से पूरी तरह तैयार 315 बोर के चार और 12 बोर का एक तमंचा, 315 बोर के छह और 12 बोर के चार अधबने तमंचे, 315 बोर की एक पौनिया और डबल बैरल की लाइसेंसी बंदूक बरामद की। इसके साथ ही मौके से भारी मात्रा में कारतूस भी बरामद किए गए। पुलिस ने यहां अवैध शस्त्र बनाने में प्रयुक्त होने वाले उपकरण भी बरामद किए हैं। बरामद लाइसेंसी बंदूक का नंबर आरोपियों ने घिस दिया था। इसलिए उसे एफएसएल लैब में भेजकर जांच कराई जाएगी। पुलिस ने चारों आरोपियों को अदालत में पेश करने के बाद जेल भेज दिया।
दूध के साथ भीमा करता था सप्लाई
पूछताछ में आरोपी कृष्ण कुमार उर्फ भीमा ने बताया कि वह डेयरी की आड़ में तमंचों की सप्लाई करता था। दूध की वजह से पुलिस भी उसे चेक नहीं करती थी। वह तमंचों को मुरादाबाद के अलावा पड़ोसी जनपदों और उत्तराखंड भी सप्लाई करता था। तमंचे बनाने वाला कारीगर उसे तीन हजार रुपये प्रति तमंचे के हिसाब से देता था, जिसे वह ग्राहक के हिसाब से पांच हजार रुपये तक का बेच देता था। पुलिस की नजरों से बचने के लिए ही उसने दूध की डेयरी खोल रखी थी।
मक्खन की तरह चलता है मेरा बनाया तमंचा
सत्यवीर ने बताया कि मेरा बनाया तमंचा मक्खन की तरह चलता है। सत्यवीर ने तमंचे बनाने का हुनर लालपुर निवासी इलियास से सीखा था। बाद में इलियास की कैंसर से मौत हो गई। उस्ताद की मौत के बाद सत्यवीर के बनाए तमंचों की क्षेत्र में मांग बढ़ गई। उसका घर भी जंगल में है इसलिए वह घर में भी तमंचे बनाता था। इसके अलावा जहां मांग होती थी, अपना सामान लेकर वहीं पहुंच जाता था और सूनसान जगह का चयन करके काम शुरू कर देता था। सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में उसने हाल ही में धंधा शुरू किया था।
कोरोना के चलते दो साल से बंद था काम
इंस्पेक्टर आरपी सिंह ने बताया कि पूछताछ में सत्यवीर ने बताया कि कोरोना की वजह से दो साल से उसका धंधा पूरी तरह बंद हो गया था। हाल ही में उसने काम शुरूकिया था कि पुलिस के हत्थे चढ़ गया। इससे पहले वह ठाकुरद्वारा पुलिस द्वारा भी अवैध शस्त्र बनाने के आरोप में जेल भेजा जा चुका है। सत्यवीर ने स्वीकार किया कि वह भीमा को तीन हजार के हिसाब से तमंचा बेचता था। तमंचा बनाने में एक हजार रुपये का खर्च आता है। इस प्रकार उसे एक तमंचे पर दो हजार रुपये की कमाई हो जाती थी। वह अब तक 150 तमंचे बनाकर बेच चुका है।
शौक पूरा करने के लिए खरीदे थे तमंचे
पुलिस के हत्थे चढ़े कमल हसन और भानु प्रताप ने शौक पूरा करने के लिए भीमा से तमंचे खरीदे थे। वह तमंचे देखने के लिए ही फैक्ट्री पहुंचे थे। इस दौरान पुलिस ने उन्हें दबोच लिया। भीमा ही दोनों को तमंचे दिखाने के लिए फैक्ट्री लेकर आया था। उसने दोनों से पैसे भी पहले ही ले लिए थे।
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