अयोध्या: जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों के रिश्तेदारों को अब नहीं मिलेंगे ठेके, जिला प्रशासन ने जारी किया निर्देश
अयोध्या। पंचायती राज और जिला पंचायत में अब ठेकों और अन्य कार्यों में मनमानी नहीं चल पायेगी। शासन के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने जन प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के नाते रिश्तेदारों को काम आवंटित किए जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। अब इस आदेश को लेकर जिले में खासा हड़कंप मचा …
अयोध्या। पंचायती राज और जिला पंचायत में अब ठेकों और अन्य कार्यों में मनमानी नहीं चल पायेगी। शासन के आदेश के बाद जिला प्रशासन ने जन प्रतिनिधियों और कर्मचारियों के नाते रिश्तेदारों को काम आवंटित किए जाने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।
अब इस आदेश को लेकर जिले में खासा हड़कंप मचा हुआ है। यह भी आदेश दिया गया है कि जहां भी नाते-रिश्तेदारों को कार्य दिए गए हैं फौरन वापस ले लिए जाए। इसे लेकर भी मुख्य विकास अधिकारी अनीता यादव ने ब्यौरा तलब किया है। हालांकि यह रोक राज्य और दशम वित्त आयोग की ओर से जारी धनराशि के कार्यों पर लगाई गई है।
इस आदेश के अनुसार दोनों वित्त आयोग के बजट से मैटीरियल, ईंधन, स्टेशनरी और अन्य सामग्री तथा सेवाओं की आपूर्ति के लिए पंचायतीराज विभाग से जुड़े पदाधिकारियों ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, ब्लाक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष व सदस्य के नजदीकी रिश्तेदारों से न करवाई जाए।
इसी तरह जिला पंचायत कर्मी, अधिकारी, सचिव के रिश्तेदारों से भी यह काम न करवाया जाए। यदि कोई ऐसा करवाते पाया जाता है तो संबधित फर्म के साथ – साथ उनके रिश्तेदार जनप्रतिनिधि या कर्मचारी से भी रिकवरी की जायेगी।
सीडीओ ने इस संबंध में पंचायती राज विभाग और जिला पंचायत को निर्देशित कर दिया है। इसके अलावा दोनों आयोग से आवंटित कार्यों का सम्पूर्ण ब्यौरा एक सप्ताह के भीतर तलब किया है।
रिश्तेदारों में यह है शामिल नजदीकी रिश्तेदारों में पिता, बाबा, ससुर, चाचा, मामा, पुत्र, पौत्र, दामाद, भाई, भतीजा, भांजा, सगा चचेरा या ममेरा भाई, पत्नी का भाई, बहनोई, पति, पति का भाई, पति की बहन, पत्नी की बहन, पुत्री, पुत्रवधु, बहन, भाभी जो भाई या सगे अथवा चचेरे-ममेरे भाई की पत्नी को गिनाया गया है। इनके अलावा माता, सास, चाची या मामी को भी इसी श्रेणी में गिना गया है।
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