यूपी सरकार का दावा: बेहतर आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों से घटी यूपी में बेरोजगारी दर

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बेरोजगारी दर मार्च में 4.4 फीसदी की तुलना में घट कर अप्रैल 2.9 फीसदी के स्तर पर आ जाने के आधार पर दावा किया है कि यह स्थिति योगी सरकार की बेहतर आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों की वजह से उत्पन्न हुई है। राज्य सरकार ने देश में बेरोजगारी …

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में बेरोजगारी दर मार्च में 4.4 फीसदी की तुलना में घट कर अप्रैल 2.9 फीसदी के स्तर पर आ जाने के आधार पर दावा किया है कि यह स्थिति योगी सरकार की बेहतर आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों की वजह से उत्पन्न हुई है। राज्य सरकार ने देश में बेरोजगारी और कारोबारी गतिविधियों की निगरानी करने वाले संगठन ‘सेंटर फॉर मॉनीटरिंग इंडियन इकोनॉमी’ (सीएमआईआई) के मासिक आंकड़ों के हवाले से सोमवार को जारी बयान में यह जानकारी दी है।

इसके अनुसार सीएमआईआई की ताजा रिपोर्ट में जारी किये गये आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी दर 2.9 फीसदी रह गयी है। यह मार्च महीने के मुकाबले काफी कम है। रिपोर्ट के अनुसार रोजगार उपलब्‍ध कराने के मामले में दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, केरल और तमिलनाडु जैसे राज्‍यों के मुकाबले उत्तर प्रदेश काफी आगे है। योगी सरकार ने पिछले 5 साल में युवाओं को 5 लाख से अधिक सरकारी नौकरियां देने की उपलब्धि भी हासिल की है।

सीएमआईआई की सर्वे रिपोर्ट में दिल्ली में बेरोजगारी दर 11.2 फीसदी, राजस्‍थान में 28.8 फीसदी, पश्चिम बंगाल में 6.2 फीसदी, तमिलनाडु में 3.2 फीसदी, पंजाब में 7.2 फीसदी, झारखंड में 14.2फीसदी, केरल में 5.8 फीसदी और आंध्र प्रदेश में 5.8 फीसदी है। देश की सबसे ज्‍यादा आबादी वाले यूपी में बेरोजगारी की दर महज 2.9 फीसदी है।

सरकार का दावा है कि प्रदेश में बेरोजगारी दर कम होने में योगी सरकार की रोजगारपरक योजनाओं की बड़ी भूमिका है। उत्तर प्रदेश में लगातार बढ़ रहे उद्योग और व्‍यापार के कारण ही आज उत्तर प्रदेश बेरोजगारी के मामले में न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। सरकार का कहना है कि कोरोना के बाद भी प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार उपलब्‍ध कराने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।

इसके तहत मिशन रोजगार चलाकर विभिन्न विभागों, संस्थाओं और निगमों आदि के माध्यम से प्रदेश के लोगों को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। पिछले पांच वर्षों में योगी सरकार की स्वरोजगार की विभिन्न योजनाओं के तहत करीब तीन करोड़ लोगों को रोजगार से जोड़ने का काम किया गया है।

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