कानपुर: मंत्री के इंतजार में मर गई सैकड़ों मछलियां, गंगा बैराज के अटल घाट पर निर्धारित था कार्यक्रम
कानपुर। गंगा बैराज के अटल घाट पर शुक्रवार की सुबह मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के इंतजार में सैकड़ों मछलियां मर गई। उनको जब गंगा में छोड़ा गया तो काफी मछलियां पानी में उतरती नजर आईं। मंत्री का सुबह 8.30 का कार्यक्रम निर्धारित था, जबकि वह एक घंटा देरी से पहुंचे। गर्मी और प्लास्टिक …
कानपुर। गंगा बैराज के अटल घाट पर शुक्रवार की सुबह मत्स्य मंत्री डॉ. संजय कुमार निषाद के इंतजार में सैकड़ों मछलियां मर गई। उनको जब गंगा में छोड़ा गया तो काफी मछलियां पानी में उतरती नजर आईं। मंत्री का सुबह 8.30 का कार्यक्रम निर्धारित था, जबकि वह एक घंटा देरी से पहुंचे। गर्मी और प्लास्टिक की थैलियों में बंद होने की वजह से मछलियों की हालत खराब हो गई। यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत हुआ।
मीडिया की नजरों से बचने के लिए मंत्री अपने समर्थकों को जल्दी-जल्दी मछलियां प्रवाहित करने का निर्देश देते नजर आए। उन्होंने सहायक निदेशक मत्स्य एनके अग्रवाल से नाराजगी जताई। कार्यक्रम में 40000 मछलियों को प्रवाहित करने का दावा किया गया। आयोजकों को मछलियों के मरने की पहले से ही आशंका थी।उन्होंने मंत्री के आने से पहले ही एनसीसी कैडेट्स के सहयोग से कई पैकेट खुलवाए। उनमें भी मछलियां मरी मिलीं।
शिकार किया तो होगी कार्रवाई :
मंत्री ने कहा कि दो महीने तक गंगा में शिकार प्रतिबंधित है। किसी ने मछलियां पकड़ी तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। मछलियों को गंगा को स्वच्छ करने के लिए प्रवाहित किया जा रहा है। गंगा में रोहू, कतला, मंगल वाटा और बाटा प्रजाति को छोड़ा गया है। मरी मछलियों को प्रवाहित करने की बात पर बोले कि यह मानवीय त्रुटि है। पहले के समय में ऑक्सीजन न मिलने और अन्य कारणो से करीब 50 फीसद मछलियां मर जाती थी। अब यह फीसद बहुत कम है।
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